उद्धव ठाकरे को संजय राउत से जेल में मिलने की नहीं मिली इजाजत, अधिकारी बोले-कोर्ट से लाएं अनुमति
मुंबई, 07 सितंबर। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को बुधवार को आर्थर रोड जेल में बंद करीबी और पार्टी नेता संजय राउत से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। शिवसेना नेता संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1 अगस्त को उपनगरीय गोरेगांव में पात्रा चॉल के पुनर्विकास में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। उद्धव ठाकरे को संजय राउत से मिलने की अनुमति देने से इनकार करते हुए जेल अधिकारियों ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को इसके लिए अदालत से अनुमति लेनी होगी। अगर उद्धव ठाकरे आम कैदियों की तरह संजय राउत से मिलना चाहते हैं, तो मिल सकते हैं, लेकिन उन्हें जेलर के कमरे में मिलने की विशेष अनुमति नहीं दी जा सकती है।
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इससे पहले बीते दिनों अदालत ने संजय राउत की ज्यूडिशियल कस्टडी को 14 दिन यानि कि 19 सितंबर तक बढ़ा दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई भी 19 सितंबर को होगी। आपको बता दें कि ईडी यानि कि प्रवर्तन निदेशालय ने संजय राउत को 1 अगस्त को गिरफ्तार किया था। वहीं, 9 दिनों तक संजय राउत से खुद ईडी ने पूछताछ की थी। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
ईडी की जांच पात्रा 'चॉल' के पुनर्विकास में कथित वित्तीय अनियमितताओं और राउत की पत्नी व सहयोगियों से संबंधित वित्तीय लेनदेन से संबंधित है। हालांकि, शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के करीबी सहयोगी राउत ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है। साथ ही उन्होंने उनके खिलाफ ईडी की कार्रवाई को "झूठा" कहा है।
ईडी को जांच में क्या मिला है ?
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि प्रवीण राउत को रियल एस्टेट कंपनी एचडीआईएल (यह जीएसीपीएल की ही सिस्टर कंपनी है) से 100 करोड़ रुपए मिले, जिसे उन्होंने अपने 'नजदीकियों, परिवार के सदस्यों, बिजनेस सहयोगियों' को विभिन्न अकाउंट में बांट दिए, जिसमें शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत का परिवार भी शामिल है। ईडी का कहना है कि 2010 में इस गोरखधंधे से 83 लाख रुपये संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खाते में ट्रांसफर किए गए, जिसका इस्तेमाल उन्होंने दादर में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया। ईडी का दावा है कि इसके अलावा महाराष्ट्र के अलीबाग स्थित किहिम बीच पर कम से कम 8 प्लॉट वर्षा राउत और स्वपना पाटकर के नाम से खरीदे गए।
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