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'जिंदगी प्यार की 2-4 घड़ी होती है... ये उम्र बड़ी होती है' 32 साल बाद रिटायरमेंट, विदाई में छलके आंसू, VIDEO

70 साल पहले अनारकली फिल्म में गीतकार राजेंद्र कृष्णन की कलम से रचित गीत 'जिंदगी प्यार की दो-चार घड़ी होती है...' फिल्माया गया। इस गीत की पंक्ति महाराष्ट्र के सोलापुर में जिला अदालत के जज की विदाई के लम्हों पर सटीक बैठती हैं।

सोलापुर के प्रधान जिला न्यायाधीश डॉ शब्बीर अहमद की सेवानिवृत्ति के समय अदालत परिसर में मौजूद वकील, साथी जजों और अदालत के कर्मचारियों ने उन्हें नम आंखों से विदा किया। विदाई की वायरल वीडियो में जज पर फूलों की बारिश देखी जा सकती है।

solapur judge

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 32 साल की न्यायिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए डॉ. शब्बीर अहमद औटी जब व्हील चेयर पर अंतिम बार कोर्ट रूम में जा रहे थे तो परिसर में मौजूद कृतज्ञ लोगों ने गुलाब की पंखुड़ियों की बरसात कर उन्हें विदा किया।

साथियों की श्रद्धा और इमोशंस को देखने के बाद जज खुद भी भावविभोर हो गए और डॉ. ऑटी की आंखों से भी आँसू छलक आए। वायरल वीडियो में न्यायाधीश के सम्मान में हाथ जोड़े खड़ी वकील बिरादरी और उनके जूनियर साथियों को पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेते देखा जा सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ. शब्बीर अहमद औटी ने 32 साल पहले इसी सोलापुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से अपने करियर की शुरुआत की थी। न्यायिक क्षेत्र में उनका करियर शानदार रहा। उनका प्रशासन लंबित मामलों को निपटाने में उल्लेखनीय और त्वरित था। उनके कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले हुए।

जिला न्यायालय में 11 मंजिला नए भवन की प्रशासनिक स्वीकृति, माधा और करमाला में वरिष्ठ सिविल न्यायालयों का उद्घाटन और न्यायालय परिसर में संविधान की प्रस्तावना का अनावरण जैसे उल्लेखनीय काम डॉ. औटी के कार्यकाल में ही हुए।

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    'जिंदगी प्यार की 2-4 घड़ी होती है...ये उम्र बड़ी होती है'32 साल बाद रिटायरमेंट, विदाई में छलके आंसू

    अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के बीच बेहतर संचार और समन्वय सुनिश्चित किया। मराठी अखबार लोकसत्ता के मुताबिक, यह पहली बार था जब किसी जिला न्यायाधीश को इतनी भावपूर्ण विदाई मिली।

    रिटायरमेंट पर जज डॉ शब्बीर का सम्मान उनकी ईमानदारी और निष्पक्ष निर्णय के लंबे करियर के साथ प्रोफेशन के प्रति समर्पण का भी प्रमाण है। जिला न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया कि नए प्रधान जिला न्यायाधीश के रूप में डॉ. औटी की जगह एमएस आज़मी लेंगे।

    कहना गलत नहीं होगा कि गीतकार राजेंद्र कृष्णन के इसी गीत में लिखी पंक्ति- 'चाहे थोड़ी भी हो ये उम्र बड़ी होती है।' जस्टिस शब्बीर की विदाई के मौके पर चरितार्थ होती है। उन्होंने न्यायिक करियर के अलावा एक इंसान के तौर पर भी भरपूर प्यार और सम्मान पाया।

    न्यायपालिका में अपने कर्म से पहचान कायम करने वाले कई और जजों को भी इससे पहले भावुक विदाई दी जा चुकी है, लेकिन सोलापुर के जज Shabbir Ahmed Awati की विदाई इसलिए विशेष है, क्योंकि पूरी अदालत के साथ वकील बिरादरी भी उनके सम्मान में हाथ जोड़े कृतज्ञ दिखी।

    बता दें कि हाल ही में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने भी साथी न्यायमूर्ति की विदाई के दौरान बशीर बद्र का शेर पढ़कर जस्टिस कृष्णमुरारी को सुप्रीम कोर्ट से विदा किया था।

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