'उनके हिस्से में आरक्षण दिया जाता है, तो', मराठा आरक्षण पर संजय निरुपम ने दिया बड़ा बयान
Maratha Reservation protest: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन पर जारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच, शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मनोज जरांगे पाटिल के मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की लड़ाई का वे सम्मान करते हैं, लेकिन किसी अन्य समुदाय के अधिकार को छीनकर अपना अधिकार मांगना उचित नहीं है।
निरुपम ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जरांगे पाटिल मराठा समाज को आरक्षण दिलाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने मराठा युवाओं को नौकरियों में अधिक अवसर मिलने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की, क्योंकि इस समाज में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी मौजूद है।

निरुपम ने जरांगे की इस ज़िद पर सवाल उठाए कि मराठा समाज को ओबीसी के तहत आरक्षण दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि मराठा समाज को ओबीसी के हिस्से में आरक्षण दिया जाता है, तो ओबीसी समुदाय इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने इसे 'तार्किक' नहीं बताया कि किसी समाज का हक छीनकर अपना हक मांगा जाए।
शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि मराठा समाज को जो आरक्षण मिला है, वह मिलना चाहिए। इसके अतिरिक्त यदि कोई और रास्ता ढूंढा जा सकता है, तो ढूंढा जाना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि किसी अन्य समाज का हिस्सा मांगकर उसमें से आरक्षण लेना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
निरुपम ने सुझाव दिया कि महाराष्ट्र के सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इस विषय पर राय बनानी चाहिए, ताकि कोई निर्णय लिया जा सके। उन्होंने महाविकास अघाड़ी (MVA) पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में MVA में शामिल पार्टियां चुप्पी साधे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि MVA केवल सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही है, जिससे जरांगे पाटिल का आंदोलन बिना वजह खराब हो सकता है। निरुपम ने मनोज जरांगे से भी अपील की कि उन्हें अपनी बात केवल सरकार या सरकार में बैठे लोगों से नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक पार्टियों से करनी चाहिए।












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