शरद पवार ने उद्धव की दुखती नब्ज को दबाया, तो बिलबिलायी ठाकरे की शिवसेना?
महाराष्ट्र की राजनीति अभी बहुत ही उलझी हुई लग रही है। वैसे तो एमवीए में सबकुछ सही होने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन, शरद पवार ने अपनी किताब के जरिए उद्धव की कथित कमजोरी उजागर कर दी है।

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने अपनी आत्मकथा 'लोक माजा संगति' में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को उन बातों के लिए निशाने पर लिया है, जो आरोप उनके खिलाफ बीजेपी लगाती रही है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूं तो दावे करती है कि महा विकास अघाड़ी में सबकुछ ठीक है, लेकिन अपने नेता की ऐसी आलोचना को पार्टी हजम नहीं कर पा रही है।

पवार ने आत्मकथा में उद्धव की नाकामियां गिनाईं
उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला तो उसके पीछे मराठा नेता शरद पवार का बहुत बड़ा रोल रहा है। हर मौके पर वह ठाकरे को बचाते दिखे हैं, लेकिन अपनी ही आत्मकथा में उन्होंने उनकी कथित नाकामियां उजागर कर दी हैं।

उद्धव के राजनीतिक सामर्थ्य पर सवाल उठाए
पवार ने लिखा है कि उद्धव न तो अपनी पार्टी में बगावत रोकने में सफल रहे और न ही तीन पार्टियों की महा विकास अघाड़ी की सरकार को ही बचाने में कामयाब हो पाए। सीधे तौर पर कहें तो पवार ने एक तरह से ठाकरे को राजनीतिक तौर पर अपरिपक्व साबित कर दिया है।

सीएम बनने के बाद उद्धव से बन गई थी दूरी!
अपनी आत्मकथा में एनसीपी नेता ने दावा किया है कि वह जब चाहते थे तो बालासाहेब ठाकरे से उनकी बात हो जाती थी। लेकिन, सीएम बनने के बाद उद्धव से बातचीत कर पाना मुश्किल होने लगा था। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई है कि इसके पीछे ठाकरे की खराब सेहत हो सकती है।

राजनीतिक लड़ाई के पहले ही राउंड में हार मान गए उद्धव-पवार की आत्मकथा
पवार ने उद्धव ठाकरे के बारे में कहा है कि वह शिवसेना में हुई बगावत का अंदाजा तो नहीं ही ला पाए, सरकार और पार्टी को बचाने की गंभीर कोशिश करने से पहले ही एक तरह से हालात के सामने सरेंडर कर दिया। पवार के अनुसार राजनीतिक लड़ाई के पहले ही राउंड में हार मान गए।

पवार ने उद्धव पर वही आरोप लगाए, जो बीजेपी लगाती थी
पवार ने ठाकरे के प्रति इसलिए भी निराशा जताई है कि वह मुश्किल से हफ्ते में दो बार ही मंत्रालय जा पाते थे, जबकि एक मुख्यमंत्री को इसमें नियमित होना चाहिए। उद्धव के खिलाफ पवार के ये वो आरोप हैं, जो महा विकास अघाड़ी सरकार के शुरुआती दिनों से भारतीय जनता पार्टी लगा रही थी।
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पहले भी ठाकरे के फैसले पर उठाई थी उंगली
इससे पहले भी बिना एनसीपी से सलाह लिए इस्तीफा देने की वजह से भी पवार अपनी नाखुशी जता चुके हैं। उनका कहना था कि उद्धव ठाकरे शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार के अगुवा थे, इसलिए उन्हें कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले तीनों को विश्वास में लेना चाहिए था।

बीजेपी पर लगाए गए आरोपों की भी हवा निकाली
यही नहीं पवार ने बीजेपी पर मुंबई और महाराष्ट्र को अलग करने की साजिश वाले उद्धव ठाकरे की शिवसेना के दावों की भी यह कहकर हवा निकाल दी है कि उन्होंने इसका पता लगाया है और इस तरह की बातें बिल्कुल सही नहीं हैं।

अपनी आलोचना से खुश नहीं हैं उद्धव!
गुरुवार को उद्धव ठाकरे अपनी आलोचना पर नाखुशी जता चुके हैं, लेकिन यह भी कहा कि इससे एमवीए की एकता प्रभावित नहीं होगी। मंत्रालय नहीं जाने के पवार की टिप्पणी पर वो बोले कि 'सभी को अपनी आत्मकथा लिखने का अधिकार है, लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर मैंने जो किया है, वह जाना हुआ तथ्य है।'

दो दिन में किताब लाइब्रेरी में चली जाती है- संजय राउत
वहीं, ठाकरे की पार्टी में शरद पवार के सबसे करीबी माने जाने वाले संजय राउत ने जो प्रतिक्रिया दी है, उससे पार्टी के दर्द को महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'मैं इसे पढ़ूंगा। लोग दो दिन किताब पढ़ते हैं और फिर यह लाइब्रेरी में चली जाती है। इसे जाने दीजिए। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख (उद्धव ठाकरे) जल्द ही इसपर एक इंटरव्यू देंगे। उनके बारे में जो कुछ लिखा है, उसका जवाब देंगे।' (पीटीआई इनपुट के साथ)












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