Sharad Pawar resigns: 2019 के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में क्या-क्या हुआ? Timeline
Sharad Pawar resigns: महाराष्ट्र की राजनीति 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही लगातार बदल रही है। शरद पवार का एनसीपी अध्यक्ष छोड़ने से पहले वहां की सियासत में काफी बदलाव आ चुका है।

Sharad Pawar resigns: महाराष्ट्र की राजनीति ने 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद तब अचानक से करवटें लेनी शुरू कर दी, जब तत्कालीन शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे ने भाजपा के साथ चुनाव जीतने के बावजूद सीएम पद की मांग को लेकर कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिला लिया। उसके बाद से राज्य की सियासत लगातार हिचकोले खाती नजर आई है।
24 अक्टूबर, 2019: बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को चुनाव में जीत मिली। 161 सीटों में से बीजेपी को 105 और शिवसेना को 56 सीटें मिलीं। एनसीपी तीसरे नंबर पर 54 सीटें के साथ रही और कांग्रेस 44 पर सिमट गई।
25 अक्टूबर, 2019: सरकार बनाने के लिए बीजेपी को शिवसेना की आवश्यकता बढ़ गई। उद्धव ठाकरे की पार्टी ने ज्यादा कैबिनेट पद और 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग कर डाली। पार्टी के मुखपत्र सामना में भाजपा नेता और तत्कालीन सीएम देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा गया और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की तारीफों के पुल बांधे गए।
8 नवबंर, 2019: बीजेपी- शिवसेना का गठबंधन टूट गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस्तीफा देना पड़ा। क्योंकि, 9 नवंबर को विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा था।
21 नवबंर, 2019: उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे ने एनसीपी चीफ शरद पवार के मुंबई वाले घर पर बैठक की। महा विकास अघाड़ी नाम का नया गठबंधन बना। इसमें शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस शामिल हुई। इसे कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी का भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
23 नवंबर, 2019: महाराष्ट्र राजभवन में बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस सियासी चालबाजी से एमवीए को बहुत बड़ा झटका लगा, जो ताजपोशी की तैयारी शुरू कर चुकी थी।
25 नवंबर, 2019: मुंबई के एक फाइव-स्टार होटल में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने अपने समर्थन में कुल 162 एमएलए का परेड कराया। इन सभी विधायकों ने गठबंधन के साथ बने रहने की शपथ ली।
26 नवंबर, 2019: मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका था। आखिरकार नंबर गेम में पिछड़ता देख शपथ लेने के मुश्किल से 80 घंटे के बाद उन्होंने दोबारा अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले अजित पवार ने 'निजी कारणों' से इस्तीफा दे दिया था।
28 नवंबर, 2019: शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के 18वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली और कांग्रेस-एनसीपी के साथ महा विकास अघाड़ी सरकार का नेतृत्व शुरू किया।
20 जून, 2022: महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव में कड़ी टक्कर के बीच बीजेपी ने 10 में से 5 सीटें जीतकर, एमवीए सरकार की नींव हिला डाली। कथित तौर पर शिवसेना के 12 एमएलए ने बीजेपी प्रत्याशियों के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग किया।
21 जून, 2022: विधान परिषद चुनाव के बाद शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे पार्टी के कई विधायकों के साथ अचानक गायब हो गए। यहीं से एमवीए सरकार की संकट के दिन शुरू हो गए। पहले शिंदे गुट के विधायकों के सूरत के एक फाइव स्टार होटल में जुटने की खबर आई। फिर सारे के सारे गुवाहाटी चले गए। शिंदे ने कहना शुरू किया कि वह शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से दगाबाजी नहीं कर सकते। उन्होंने हिंदुत्व पर भी पार्टी की पहली वाली लाइन लेनी शुरू कर दी।
28 जून, 2022: फडणवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को उद्धव सरकार को सदन में बहुमत साबित करने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखा। गवर्नर ने 30 जून की तारीख निश्चित कर दी। उद्धव गुट ने गवर्नर के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
29 जून, 2022: सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत परीक्षण के गवर्नर के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। उद्धव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और शिंदे की अगुवाई वाले पार्टी के बागी विधायक गोवा पहुंच गए।
30 जून, 2022: शिंदे मुंबई पहुंचे और भाजपा नेता फडणवीस के साथ बैठक करने के बाद राजभवन पहुंचकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बने और फडणवीस उनके डिप्टी बने।
17 अप्रैल, 2023: शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि 15 दिन में महाराष्ट्र की राजनीति में दो बड़े विस्फोट होंगे।
22 अप्रैल, 2023: एनसीपी नेता अजित पवार ने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताकर राज्य की राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी। वे बोले कि 2024 का इंतजार क्यों करना, मैं आज भी दावेदार।
2 मई, 2023: शरद पवार ने बिना कारण बताए एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी।












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