Rajeev Satav:क्या है साइटोमेगालो वायरस, जिसने कोरोना को हराने वाले कांग्रेस सांसद की ली जान ?

पुणे, 16 मई: कांग्रेस के युवा सांसद राजीव सातव कोरोना वायरस को हराने के बावजूद एक दूसरे वायरस की चपेट में आकर जिंदगी की जंग हार गए। महाराष्ट्र के पुणे स्थिति एक प्राइवेट हॉस्पिटल में रविवार को उनका निधन हो गया। वो करीब 20 दिन तक कोविड-19 से जंग लड़कर ठीक हुए थे। लेकिन, साइटोमेगालो वायरस की वजह से वह फिर से बीमार पड़े और आखिरकार उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। राजीव सातव फिलहाल राज्यसभा के सांसद थे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बहुत ही करीबी माने जाते थे। पार्टी ने इस वक्त उन्हें गुजरात समेत कई राज्यों का प्रभारी महासचिव बना रखा था। आइए जानते हैं कि साइटोमेगालो वायरस है क्या, जिसकी वजह से देश ने एक युवा सांसद खो दिया है।

कोविड से जीतकर साइटोमेगालो वायरस से हारे सातव

कोविड से जीतकर साइटोमेगालो वायरस से हारे सातव

46 साल के कांग्रेस सांसद राजीव सातव की तबीयत बिगड़ने के बाद पुणे के जहांगीर अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर ने बयान जारी कर कहा है,'लंबी बीमारी के बाद कांग्रेस सांसद राजीव सातव का सेकंडरी निमोनिया के साथ मल्टी-ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम की वजह 16 मई को निधन हो गया।' अस्पताल ने इस बात की पुष्टि की है कि वह कोविड-19 से ठीक हो चुक थे। महाराष्ट्र के मंत्री विश्वजीत कदम ने कहा कि , 'करीब 20 दिन तक बीमार रहने के बाद करीब 4 दिन पहले सातव का कोविड टेस्ट निगेटिव आया था। हालांकि, उनका लंग्स बहुत ज्यादा संक्रमित था।' इससे पहले महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने शनिवार को बताया था कि 'सातव को साइटोमेगालो वायरस की वजह से नया इंफेक्शन हो गया है।'

क्या है साइटोमेगालो वायरस ?

क्या है साइटोमेगालो वायरस ?

साइटोमेगालो वायरस एक सामान्य हर्पीज वायरस है। आमतौर पर यह वायरस शरीर में निष्क्रिय पड़ा रहता है और प्रेगनेंसी के दौरान और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में ज्यादा परेशानियां पैदा कर सकता है। अमेरिका के सेंट्रल फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक यह एक सामान्य वायरस है और किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। लेकिन, जिन लोगों का इम्यून मजबूत होता है, वह इससे बचे रहते हैं। अमेरिका में 5 साल की उम्र तक करीब एक-तिहाई बच्चे इससे संक्रमित हो जाते हैं। जबकि, 40 साल से ऊपर के आधे से ज्यादा व्यस्कों को यह संक्रमित कर चुका होता है।

साइटोमेगालो वायरस के सामान्य लक्षण

साइटोमेगालो वायरस के सामान्य लक्षण

साइटोमेगालो वायरस की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि एकबार किसी व्यक्ति के शरीर में दाखिल होने के बाद यह हमेशा कि लिए उसके अंदर ही मौजूद रहता है और कभी भी फिर से सक्रिय हो सकता है। यही नहीं इंसान इस वायरस के दूसरे स्ट्रेन से भी दोबारा संक्रमित हो सकता है। ज्यादातर लोगों में साइटोमेगालो वायरस के कोई लक्षण नजर नहीं आते और उन्हें अहसास ही नहीं होता कि वो इससे संक्रमित हो चुके हैं। सीडीसी के मुताबिक कुछ लोगों में इस वायरस के लक्षण नजर आ सकते हैं और वह बीमार हो सकते हैं- मसलन, इसकी वजह से बुखार, गले में खराश, थकान और ग्रंथियों में सूजन जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। कुछ लोगों में इसकी वजह से मोनोन्यूक्लिओसिस या हेपेटाइटिस (लिवर की समस्या) की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

साइटोमेगालो वायरस से खतरा

साइटोमेगालो वायरस से खतरा

लेकिन, जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है(कमजोर इम्यून सिस्टम) उनमें इसके ज्यादा गंभीर लक्षण दिख सकते हैं और इसकी वजह से उनकी आंखें, लंग्स, लिवर, भोजन की नली, अमाशय और आतें प्रभावित हो सकती हैं। जो बच्चे इसकी चपेट में आ जाते हैं, उनमें दिमाग, लिवर, स्प्लीन, लंग के साथ-साथ विकास की समस्या हो सकती है। कई बच्चे तो इसकी वजह से सुनना ही बंद कर देते हैं।

साइटोमेगालो वायरस कैसे फैलता है ?

साइटोमेगालो वायरस कैसे फैलता है ?

यह वायरस शरीर के फ्लूइड जैसे कि लार, पेशाब, खून, आंसू, सीमन और ब्रेस्ट मिल्क से संक्रमित व्यक्ति से दूसरों तक पहुंच सकता है। व्यस्क लोगों में जिसमें इसके लक्षण दिखाई पड़ते हैं, उनके ब्लड टेस्ट से इसका पता चल सकता है। हालांकि, नवजात बच्चों के लिए उसके लार या पेशाब का टेस्ट कराना ज्यादा सही माना जाता है। आमतौर पर स्वस्थ व्यक्ति को इसके संक्रमण के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की आवश्यकता नहीं पड़ती। लेकिन, कमजोर इम्यून सिस्टम के लोगों और जन्मजात संक्रमित बच्चों का इलाज जरूरी होता है।

कौन थे राजीव सातव ?

कौन थे राजीव सातव ?

राजीव सातव ने बहुत कम समय में ही अपनी गिनती कांग्रेस के बड़े नेताओं में करवाना शुरू कर दिया था। वे राहुल गांधी के चहेते थे और इस समय राज्यसभा सांसद थे। 16वीं लोकसभा में वह महाराष्ट्र के हिंगोली का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। कांग्रेस ने उन्हें इस समय गुजरात, दादरा और नगर हवेली और दमन और द्वीव का प्रभारी महासचिव बना रखा था। वह भारतीय युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस के भी पूर्व अध्यक्ष थे। वह महाराष्ट्र में पहले विधायक भी रह चुके थे।

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