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प्याज की कीमतों पर महाराष्ट्र में कौन निकाल रहा है सियासी आंसू?

प्याज की कीमतों को लेकर महाराष्ट्र में जबर्दस्त राजनीति हो रही है। एनसीपी संस्थापक शरद पवार ने जहां केंद्र सरकार की घोषणा को उम्मीदों से कमतर बताया है तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के मुताबिक यह फैसला ऐतिहासिक है।

दरअसल, मंगलवार को केंद्र ने 2,410 रुपए क्विंटल के हिसाब से 2 लाख टन प्याज खरीदने का फैसला लिया, लेकिन महाराष्ट्र में इस मुद्दे पर अपने-अपने हिसाब से राजनीति की रोटी सेंकी जाने लगी है।

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पवार का केंद्र के फैसला पर वार
केंद्र के फैसले को लेकर शरद पवार ने दावा किया कि '2,410 रुपए के हिसाब से खरीदने पर तो उत्पादन लागत भी नहीं नहीं निकलेगा। यह 4,000 रुपए प्रति क्विंटल होना चाहिए और निर्यात शुल्क भी हटना चाहिए।' विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेता जो मांग कर रहे हैं, उसके माने जाने पर प्याज का थोक मूल्य ही 40 रुपए प्रति किलो के भाव हो जाएगा और खुदरा कीमतें कहीं ज्यादा तक भी हो सकती है।

पवार के समय ऐसी राहत कभी नहीं मिली- सीएम शिंदे
पवार के जवाब में सीएम शिंदे ने कहा, 'यह एक ऐतिहासिक फैसला है और इसको लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। शरद पवार एक बड़े नेता हैं। वह 10 साल तक केंद्रीय कृषि मंत्री रहे हैं। उस समय भी प्याज को लेकर संकट रहता था, लेकिन ऐसी राहत कभी नहीं दी गई।' इसके जवाब में पवार ने कह दिया कि 'हमने कभी भी प्याज पर 40% का निर्यात शुल्क नहीं लगाया।'

किसानों की पेट में लात मार रही है सरकार- उद्धव ठाकरे की पार्टी
प्याज पर निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी के खिलाफ पवार की पार्टनर शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उद्धव ठाकरे की पार्टी का आरोप है कि निर्यात शुल्क बढ़ाने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। पार्टी के मुखपत्र सामना में कहा गया है, 'यह दिखाने के लिए कि वे सार्वजनिक हित में महंगाई को नियंत्रण में ला रहे हैं, ये केवल दिखावा है। प्याज उत्पादकों की पेट में लात मारना.....यही मोदी सरकार की असली सच्चाई है.....'

कांग्रेस ने भी खोला केंद्र के खिलाफ मोर्चा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने यहां तक आरोप लगा दिया कि किसान मोदी सरकार से इससे अच्छे की उम्मीद नहीं कर सकते, जो एक साल पहले कथित तौर पर उन्हें आंतकवादी और नक्सली तक कह चुकी है। उनके मुताबिक ड्यूटी लगाने से प्याज की कीमतें गिरी हैं। किसानों के डर से राज्य सरकार केंद्र का दरवाजा खटखटा रही है।

सत्ताधारी दलों में भी श्रेय लेने की होड़!
उधर सत्ताधारी गठबंधन में केंद्र के इस फैसले का श्रेय लेने की होड़ के आरोप लग रहे हैं। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले जापान से ही इसको लेकर ट्वीट कर दिया। फिर बाद में महाराष्ट्र के कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने वही जानकारी दी। जबकि, वे खुद दिल्ली में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक में शामिल थे, जिन्होंने केंद्र सरकार की ओर से यह ऐलान किया था।

अजित पवार गुट की शरद पवार से अलग राय
संयोग से मुंडे शरद पवार की एनसीपी के ही बागी विधायक हैं, जो अजित पवार के साथ बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हुए हैं। मुंडे का दावा है कि 'निर्यात शुल्क लगाने के बावजूद किसान प्रभावित नहीं होंगे। उन्हें अपनी उत्पाद के लिए बेहतर दाम मिलेंगे और साथ के साथ उपभोक्ताओं को भी उचित दर पर प्याज मिलेगा।'

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