रेस्टोरेंट से मंगवाया वेज मोमोज, डिलीवर हुआ चिकन, Mumbai consumer court के फैसले से फूड सेफ्टी पर छिड़ी बहस

Mumbai Consumer Court Raises Food Safety: मुंबई से हाल ही में सामने आए एक उपभोक्ता विवाद मामले ने एक बार फिर से भारत में खाद्य सुरक्षा और शुद्धता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। एक शाकाहारी दंपत्ति ने उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने रेस्टोरेंट से शाकाहारी मोमोज मंगवाए थे, लेकिन उन्हें गलती से चिकन मोमोज भेज दिए गए।

उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) ने यह कहकर खारिज कर दिया कि अगर वे "सख्त शाकाहारी हैं, तो उन्हें ऐसे रेस्टोरेंट से ऑर्डर ही नहीं करना चाहिए जो मांसाहारी भी परोसता है।"

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यह बयान न केवल संवेदनशील उपभोक्ता वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि भारत में मौजूद खाद्य सुरक्षा मानकों और उनकी जमीनी हकीकत को भी उजागर करता है।

What is the whole matter? क्या है पूरा मामला?

मुंबई में हाल ही में उपभोक्ता अदालत द्वारा दिए गए एक फैसले ने देशभर में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक शाकाहारी दंपति ने शिकायत की थी कि उन्होंने ऑनलाइन ऑर्डर में शाकाहारी मोमोज मंगवाए थे लेकिन उन्हें गलती से चिकन मोमोज भेजे गए।

इस घटना से आहत होकर उन्होंने मुआवज़े की मांग की, लेकिन उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि अगर वे वास्तव में कट्टर शाकाहारी हैं, तो उन्हें ऐसे रेस्टोरेंट से खाना ऑर्डर नहीं करना चाहिए था, जो मांसाहारी भोजन भी परोसता हो। यह टिप्पणी न केवल विवादित है, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों और खाद्य मानकों पर भी सवाल खड़े करती है।

What does FSSAI law say? क्या कहता है FSSAI का कानून

भारत में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने खाद्य सुरक्षा और मानक (लाइसेंसिंग और पंजीकरण) विनियम, 2011 बनाए हैं, जो 2006 के अधिनियम के तहत आते हैं। इसके Schedule 4 में यह स्पष्ट कहा गया है कि:

  • शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों की तैयारी, प्रोसेसिंग और पकाने की प्रक्रिया पूरी तरह अलग होनी चाहिए।
  • कच्चे मांस और पोल्ट्री के लिए अलग फ्रिज होना अनिवार्य है।
  • क्रॉस-कंटैमिनेशन (भोजन के दूषित होने) से बचाव के लिए प्रशिक्षित स्टाफ और अलग-अलग किचन इक्विपमेंट का उपयोग जरूरी है।

हकिकत कागजी नियमों से बदत्तर

अगर FSSAI की नियमों को जमीनी हकीकत में देखें तो ये इससे बहुत अलग है। The Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, सड़क किनारे ठेले लगाने वाले तमाम दुकानदार इन नियमों को ताक पर रख कर खाने-पीने की चीजें बेचते हैं। इन विक्रेता से पूछने पर वह कहते हैं कि उन्हें किसी ऐसे नियमों की जानकारी ही नहीं है।

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष और Wow! Momo के CEO सागर दर्यानी ने बताया कि सभी प्रमुख रेस्टोरेंट्स FSSAI और FDA के दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं। उन्होंने कहा,
"हम न केवल वेज और नॉनवेज का अलग-अलग प्रोसेस करते हैं, बल्कि एलर्जन और डायटरी प्रेफरेंस को भी ध्यान में रखते हैं। अलग फ्रायर, स्टीमर, बर्तन, स्टोरेज एरिया - सब कुछ अलग होता है।"

उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख शहरों के बड़े ऑपरेटर्स इन दिशानिर्देशों को मानते हैं और उनके यहां स्वतंत्र ऑडिट भी कराए जाते हैं जो ब्रांड की गुणवत्ता, स्टाफ की हाइजीन और प्रोडक्ट की स्टोरेज को चेक करते हैं।

नियम मौजूद हैं, लेकिन जागरूकता की भारी कमी

इस मामले से साफ जाहिर होता है कि एक ओर जहां देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर नियम बनाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर छोटे विक्रेताओं और रेस्टोरेंट्स में जागरूकता की कमी और निगरानी की कमजोरी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब तक इन नियमों को व्यवहारिक तौर पर लागू नहीं किया जाएगा और खाद्य कारोबारियों को जागरूक नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे विवाद बार-बार सामने आते रहेंगे-और उपभोक्ता की सुरक्षा और विश्वास दोनों खतरे में रहेंगे।

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