MVA गठबंधन में अब लगने वाली सेंध! मानसून सत्र से पहले Uddhav Thackeray की बैठक में पहुंचे 60 में 37 विधायक
MVA Meeting Turmoil: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच मुंबई में आयोजित महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की समन्वय बैठक में विधायकों की कम उपस्थिति ने विपक्षी गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक न होने के संकेत दिए हैं। गठबंधन की एकजुटता दिखाने के लिए बुलाई गई इस रणनीतिक बैठक में कुल 60 विधायकों में से केवल 37 विधायक ही पहुंचे।
मानसून सत्र में सदन के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से हुई इस बैठक में आधे से अधिक विधायकों का अनुपस्थित रहना एमवीए नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस अहम सांगठनिक बैठक में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में सदस्यों का न आना जल्द बड़ी टूट होने के संकेत माना जा रहा है

विधायकों के बैठक में ना पहुंचने पर भड़के उद्धव ठाकरे
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान समन्वय की कमी को लेकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी चिंताएं खुलकर जाहिर कीं। उन्होंने सहयोगियों के सामने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि क्या महा विकास अघाड़ी सच में एकजुट है या यह केवल कागजों और बयानों तक सीमित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सदन के भीतर विपक्ष को एक स्वर में सरकार का मुकाबला करना चाहिए।
MVA के कौन से दिग्गज नेता बैठक में नहीं हुए शामिल?
इस बैठक में अनुपस्थित रहने वाले सांसदों और विधायकों की सूची में तीनों ही दलों के बड़े नाम शामिल हैं। विशेष रूप से कांग्रेस के छह, शिवसेना (यूबीटी) के पांच और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के पांच प्रमुख विधायक बैठक से नदारद रहे। इनमें नाना पटोले, जयंत पाटिल, विजय वडेट्टीवार और अमित देशमुख जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल हैं, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।
आखिर विधायकों ने क्यों बैठक से बनाई दूरी?
कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की अनुपस्थिति को उद्धव ठाकरे गुट की राजनीतिक स्थिति की अनदेखी के रूप में भी देखा जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के अपने ही पांच विधायकों का बैठक में न पहुंचना उद्धव ठाकरे के सांगठनिक नियंत्रण पर भी प्रत्यक्ष रूप से सवाल खड़े करता है।
MVA की बैठक में खाली कुर्सियां खड़ी कर सकती है मुसीबत?
बैठक का मुख्य उद्देश्य भले ही मानसून सत्र के दौरान सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना और जनहित के मुद्दों को उठाना था, लेकिन अब पूरी चर्चा समन्वय की विफलता पर केंद्रित हो गई है। एमवीए के वरिष्ठ नेताओं संजय राउत, शशिकांत शिंदे और सतेज पाटिल ने बैठक में एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया, लेकिन खाली कुर्सियों ने इस प्रयास की प्रभावशीलता को काफी हद तक कम कर दिया।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व ने हाल के दिनों में पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं की अनदेखी करने और भविष्य की लड़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। इसके बावजूद, वर्तमान विधायकों में दिख रही यह उदासीनता से पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर प्रतिकूल असर डाल सकती है, जिससे गठबंधन की राह और मुश्किल होगी।














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