'सुरक्षा बढ़ा दो वरना साइरस मिस्त्री जैसा हाल होगा', मुंबई पुलिस के पास आया रतन टाटा को लेकर धमकी भरा कॉल
उद्योगपति रतन टाटा को लेकर मुंबई पुलिस के पास एक धमकी भरा कॉल आया है। कॉल करने वाले व्यक्ति ने धमकी देते हुए कहा कि अगर रतन टाटा की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई तो उनका भी हाल साइरस मिस्त्री जैसा होगा।
मुंबई पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए जिस नंबर से कॉल आया था उसे ट्रेस किया। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि कॉल करने वाला पुणे का था। धमकी देने वाला व्यक्ति सिजोफ्रेनिया से पीड़ित था। मुंबई पुलिस का कहना है कि कॉल करने वाला व्यक्ति मानसिक रुप से बीमार है इसलिए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

कौन थे साइरस मिस्त्री?
साइरस मिस्त्री उद्योगपति पालोनजी शापोरजी मिस्त्री के सबसे छोटे बेटे थे। पालोनजी मिस्त्री 150 साल से ज्यादा पुरानी कंस्ट्रक्शन कंपनी शापोरजी पालोनजी ग्रुप के चेयरपर्सन थे। कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में उन्होंने साम्राज्य खड़ा किया था। साइरस मिस्त्री के पास भी आइरिश नागरिकता थी। लेकिन वे भारत के स्थायी निवासी बनकर रहे।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी की जिम्मेदारी संभालते हुए साइरस ने शापोरजी पालोनजी का कंस्ट्रक्शन बिजनेस 159 करोड़ रुपये से 11 हजार करोड़ तक बढ़ा दिया। इसके अलावा शापोरजी पालोनजी ग्रुप को कंस्ट्रक्शन के इतर अलग-अलग फील्ड में भी उतारा। साइरस की सरपरस्ती में कंपनी ने मरीन, तेल और गैस, रेलवे सेक्टर, रियल एस्टेट में भी कारोबार को बढ़ाया।
कैसे हुई साइरस मिस्त्री की मौत?
साइरस मिस्त्री की मौत बीते साल 4 सितम्बर को सड़क दुर्घटना में हुई। मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। एक्सिडेंट इतना भयावह था कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और साइरस मिस्त्री ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।
टाटा ग्रुप से रिश्ता
टाटा ग्रुप के साथ साइरस मिस्त्री के परिवार का रिश्ता काफी पुराना है। 1930 में मिस्त्री के दादा ने टाटा संस में 12.5 फीसदी स्टेक खरीदा था। बाद में हिस्सेदारी बढ़कर 18 फीसदी से भी ज्यादा हो गई। साल 2006 में पालोनजी टाटा ग्रुप के बोर्ड से रिटायर हो गए। इसके बाद साइरस टाटा के इस बोर्ड में शामिल हुए। टाटा ग्रुप से जुड़ने के बाद वे टाटा पावर और टाटा एलेक्सी के डायरेक्टर भी रहे थे।
साल 2012 में साइरस टाटा सन्स के छठे चेयरपर्सन बने। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनके कमान संभालते ही रतन टाटा के साथ उनके रिश्ते बिगड़ गए। उन पर आरोप लगने लगे कि वो अपने फैसलों में रतन टाटा को शामिल नहीं करते हैं। विवाद बढ़ा तो 2016 में टाटा संस के बोर्ड ने उन्हें चेयरपर्सन से हटाने का फैसला किया।












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