मनोज जरांगे ने खींचे महाराष्ट्र चुनाव से पैर, किसी को भी समर्थन नहीं, जानिए किसे होगा फायदा, किसे नुकसान?

Manoj Jarange: मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले बड़ा ऐलान किया है। मनोज जरांगे ने खुद को अपनी पार्टी को इस चुनाव से अलग कर लिया है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को सोमवार दोपहर तक अपना नामांकन वापस लेने के निर्देश दिए थे। मनोज जरांगे के इस फैसले से सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन कुछ ज्यादा परेशान नजर आ रहा है।

हालांकि, मीडिया से बातचीत करते हुए मनोज जरांगे पाटिल ने कहा,'हमने किसी भी राजनीतिक दल या स्वतंत्र उम्मीदवार को समर्थन नहीं दिया है।' पाटिल ने कहा कि हम केवल एक समुदाय पर निर्भर होकर चुनाव नहीं लड़ सकते। हमने मुस्लिम और दलित समुदायों के नेताओं से उम्मीदवारों की सूची मांगी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।

Manoj Jarange

इसलिए, हमने इस चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक नेताओं पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि राजनीति हमारा खानदानी धंधा तो नहीं है। हमने किसी भी पार्टी या नेता को सपोर्ट नहीं दिया है। जो 400 पार का नारा दे रहे थे, उनका क्या हुआ आपने देखा है। मराठा समुदाय का दबदबा कायम रहेगा, इसमें कोई शक नहीं।

मनोज पाटील के इस फैसले क्या पड़ेगा असर?
उन्होंने आगे कहा कि आप सभी को चुपचाप जाना है और वोट कर के वापस आना है। मराठा समुदाय ने अपनी लाइन समझ लेनी चाहिए। जो महाराष्ट्र की सियासत को जानते हैं उन्हें जरांगे पाटील की इस भाषा से काफी कुछ समझ आता है। बता दें, पाटिल का प्रभाव मराठवाड़ा में काफी मजबूत है और ये आठ लोकसभा सीटों वाला क्षेत्र है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनोज पाटील ने पिछले लोकसभा चुनाव में देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसका सबसे बड़ा नुकसान बीजेपी और शिंदे की शिवसेना को उठाना पड़ा था। इसी के बाद से महायुती के कुछ नेता मनोज पाटील के उम्मीदवार चुनाव में न आए, इसके लिए जरुर प्रयासरत थे।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मनोज जरांगे पाटील के फैसले से चुनाव पर काफी असर पड़ेगा, खास तौर पर महायुति के लिए। कुछ नेताओं ने अनुमान लगाया कि पाटिल द्वारा समर्थित उम्मीदवार महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन के पारंपरिक मराठा, दलित और मुस्लिम समर्थन आधार को विभाजित कर सकते हैं।

एमवीए के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने पाटिल के फैसले पर राहत व्यक्त करते हुए कहा,'एमवीए और पाटिल के हटने के बीच कोई संबंध नहीं है। मुझे खुशी है कि उन्होंने यह फैसला लिया, क्योंकि उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से स्पष्ट रूप से भाजपा को फायदा होता।' बता दें, मराठवाड़ा में 46 विधानसभा सीटें हैं, जबकि पश्चिमी महाराष्ट्र में 70 सीटें हैं।

इन दोनों ही क्षेत्र में पाटिल का काफी प्रभाव है। इसलिए विभिन्न दलों के उम्मीदवारों ने मनोज पाटील का समर्थन (स्पोर्ट) मांगा है। पिछले चुनावों में, मराठा, दलित और मुस्लिम समुदाय भाजपा विरोधी भावना के कारण एमवीए के बैनर तले एकजुट हुए थे। वहीं, भाजपा का लक्ष्य महायुति के लिए हिंदू वोटों को एकजुट करके एमवीए वोट बैंक को विभाजित करना है।

हालांकि, महायुति के भीतर अजित पवार का गुट अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि के कारण चुनौती पेश करता है। यह आंतरिक विभाजन भाजपा की रणनीति में बाधा बन सकता है। वहीं, दूसरी तरफ भाजपा महायुति के लिए हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है, लेकिन मराठा, दलित और मुस्लिम मतदाताओं के बीच भाजपा विरोधी भावना एक बाधा बनी हुई है।

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