नवाब मलिक vs अबू आजमी: शिवाजीनगर में महायुती की बढ़ी ताकत, सुरेश पाटिल को मिल सकता है फायदा
Shivajinagar-Mankhurd Assembly Seat: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार अब अपने अंतिम चरण में है। मुंबई के शिवाजीनगर-मानखुर्द विधानसभा क्षेत्र में चुनाव की चर्चा जोर-शोर से हो रही है। समाजवादी पार्टी के चार बार के विधायक अबू आजमी के खिलाफ इस बार महायुति ने पूरी तैयारी की है। महायुति की ओर से शिवसेना शिंदे गुट के सुरेश पाटिल आजमी के खिलाफ मैदान में हैं।
सुरेश पाटिल और अबू आझमी पहले भी 2014 में एक-दूसरे के खिलाफ लड़े थे। तब आजमी ने 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतों के आधार पर सिर्फ 10,000 वोटों से जीत हासिल की थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। इस बार इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम समाज के तीन प्रमुख उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे शिवसेना शिंदे गुट के सुरेश पाटिल की जीत की संभावना बढ़ गई है।

शिवाजीनगर में कैसे होगा मुकाबला
इस क्षेत्र से मौजूदा विधायक अबू आजमी समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ राष्ट्रवादी पार्टी के अजित पवार गुट के भी एक उम्मीदवार हैं, साथ ही एमआईएम पार्टी के अतीक अहमद खान भी चुनावी मैदान में हैं। इन तीनों मुस्लिम उम्मीदवारों के खिलाफ महायुति ने शिवसेना शिंदे गुट के सुरेश पाटिल को चुनावी रिंग में उतारा है। मुस्लिम मतों का बंटवारा और महायुति द्वारा किए गए विकास कार्यों के कारण राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार शिवसेना का उम्मीदवार जीत सकता है।
अबू आजमी के खिलाफ नाराजगी
अबू आजमी के खिलाफ इस क्षेत्र में जनता की नाराजगी काफी बढ़ गई है। अपराध, नशीली दवाओं का जाल, बायोमेडिकल कचरे से होने वाला प्रदूषण, शिक्षा की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब होने के मुद्दों पर आझमी का कोई प्रभावी काम नहीं हो सका है। चार बार विधायक रहने के बावजूद वह इन समस्याओं का समाधान नहीं कर पाए हैं।
यही कारण है कि मतदाता उनके खिलाफ असंतुष्ट हैं। क्षेत्र में नशे का व्यापार बढ़ने से आम नागरिकों में डर का माहौल है। इसी वजह से मुस्लिम मतदाता अब इस सीट से नवाब मलिक का नाम आगे लाने की सोच रहे हैं। साथ ही एमआईएम ने भी अबू आझमी के खिलाफ अतीक अहमद खान को समर्थन देने के लिए मोर्चेबंदी की है।
महायुति के विकास कार्य
महायुति ने पिछले पांच वर्षों में इस क्षेत्र में कई विकास कार्य किए हैं। इसके अलावा महायुति सरकार के द्वारा किए गए विकास कार्यों की वजह से मतदाता आकर्षित हो रहे हैं। "लाडकी बहिन योजना" जैसी योजनाएं और अन्य महिला केंद्रित योजनाओं का यहां प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन हुआ है, जिससे मुस्लिम महिला मतदाता भी महायुति के प्रति सकारात्मक रुख अपना रहे हैं।
होगा मतों का बंटवारा?
तीन मुस्लिम उम्मीदवारों के कारण होने वाला मतों का बंटवारा, महायुति द्वारा किए गए विकास कार्य और सुरेश पाटिल का चर्चित चेहरा, इन तीन कारणों से राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना शिंदे गुट को इस चुनाव में विजय प्राप्त हो सकती है।
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