भांडुप पश्चिम विधानसभा सीट पर अशोक पाटील गाड़ेंगे झंडा? जानिए क्या कहते हैं सियासी समीकरण

Bhandup West Assembly Election: ईशान्य लोकसभा क्षेत्र का भांडुप पश्चिम विधानसभा क्षेत्र हमेशा चर्चा में रहा है। मुंबई में कोकणी समुदाय का यह मतदाता क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। पहले यह चर्चा थी कि मनसे के युवा नेता अमित ठाकरे इस क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन बाद में उन्होंने भांडुप के बजाय माहिम क्षेत्र को चुना।

अब भांडुप क्षेत्र में दो शिवसेनाओं के बीच मुकाबला है। शिवसेना (ठाकरे) गुट के उम्मीदवार वर्तमान विधायक रमेश कोरगावकर और शिवसेना (शिंदे) गुट के अशोक पाटील के बीच मुख्य मुकाबला होगा। पिछले दस वर्षों से शिवसेना के कब्जे में रहे इस क्षेत्र की गणित अब बदलती नजर आ रही है। शिवसेना में फूट, मनसे की वापसी और भाजपा का बढ़ता प्रभाव इस बार शिंदे गुट को फायदा पहुंचाता हुआ दिख रहा है।

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पूर्व और वर्तमान नेताओं के बीच मुकाबला
इस क्षेत्र में अभी शिवसेना (ठाकरे) गुट के रमेश कोरगावकर विधायक हैं, लेकिन पिछले पांच वर्षों में बुनियादी समस्याओं को सुलझाने में उन्हें नाकामी मिली है। वहीं, शिवसेना (शिंदे) गुट के अशोक पाटील ने 2014 में इस क्षेत्र से विधायक रहते हुए कई मुद्दों को सुलझाया था, और उनके समर्थकों का कहना है कि उनके कार्यकाल में विकास हुआ था।

मतों का बंटवारा और संभावित परिणाम
भांडुप पश्चिम में इस बार मुख्य मुकाबला दो पूर्व और वर्तमान विधायक के बीच होने वाला है, लेकिन इस बार 12 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। 2014 के चुनाव में शिवसेना (शिंदे) गुट के अशोक पाटील ने जीत हासिल की थी, और उस समय भाजपा के मनोज कोटक को 36 हजार वोटों से जीत मिली थी।

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अब महायुती में भाजपा, शिवसेना (शिंदे) गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) एकजुट हैं, जिससे महायुती को मजबूती मिल रही है। दूसरी ओर, ठाकरे गुट के उम्मीदवार रमेश कोरगावकर को मनसे के शिरिष सावंत से मतों का बंटवारा हो सकता है। वंचित बहुजन आघाडी के स्नेहल सोहनी, बसपा के रवि थाटे और कुछ अन्य स्वतंत्र उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं। हालांकि, महायुती के एकजुट होने से इस बार चुनाव में उनकी जीत की संभावना ज्यादा जताई जा रही है।

कैसी है इस बार की स्थिति?
इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,98,510 मतदाता हैं, जिनमें 1,68,234 पुरुष और 1,31,255 महिलाएं हैं। इस क्षेत्र में 70% मराठी भाषी लोग रहते हैं। साथ ही भांडुप में उत्तर भारतीय, दाक्षिणात्य, मुस्लिम, गुजराती और सिख समुदाय के लोग भी निवास करते हैं।

यह क्षेत्र केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र है। हालांकि, पिछले कई वर्षों से भांडुप विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखी गई है। यही कारण है कि इस बार महायुति के लिए यहां सकारात्मक माहौल होने की चर्चा है।

मतदाताओं के मुद्दे और समस्याएं

भांडुप में कई बुनियादी सुविधाओं की कमी है। यहां के कई सड़कें संकीर्ण हैं, जिसके कारण अक्सर यातायात जाम की समस्या रहती है। इसके अलावा, भांडुप में एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है, और बच्चों के लिए खेलकूद के मैदान, सांस्कृतिक केंद्र और नाट्यगृह जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

भांडुप में नाले का पुनर्निर्माण परियोजना अभी भी कागजों में है, और कचरे का निपटान भी सही तरीके से नहीं हो रहा है। बारिश के मौसम में गटर और गंदे रास्ते नागरिकों के लिए बड़ी समस्या बन जाते हैं। इसलिए, वर्तमान विधायक रमेश कोरगावकर के लिए इस बार चुनाव आसान नहीं माना जा रहा है।

शिवसेना के लिए महत्वपूर्ण चुनौती, क्या होगी हैट्रिक?

भांडुप पश्चिम विधानसभा सीट महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से एक है, और यह ठाकरे गुट की शिवसेना के लिए एक अहम सीट मानी जाती है। पिछले 10 वर्षों से इस सीट पर शिवसेना की पकड़ मजबूत रही है। 2014 में शिवसेना के उम्मीदवार अशोक पाटिल ने यहां जीत हासिल की थी, जबकि 2019 में रमेश गजानन कोरगांवकर ने भी शिवसेना के लिए इस सीट पर जीत का झंडा गाड़ा था। अब सवाल यह है कि क्या इस बार भांडुप पश्चिम से शिवसेना की जीत की हैट्रिक हो पाएगी या फिर कोई नया समीकरण सामने आएगा।

भांडुप पश्चिम का इतिहास और परिसीमन

2008 में परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई थी। इससे पहले इस सीट को "भांडुप विधानसभा" के नाम से जाना जाता था। परिसीमन के बाद, इसमें कुछ नए इलाकों को जोड़कर भांडुप पश्चिम विधानसभा सीट बनाई गई। इस बदलाव के बाद से यह सीट शिवसेना के लिए अहम बन गई, और अब यह देखना होगा कि क्या शिवसेना अपने पुराने विजयी क्रम को जारी रख पाती है।

इस बार भी भांडुप पश्चिम में दो प्रमुख उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होने की संभावना है, जिनमें एक हैं शिवसेना (ठाकरे) गुट के रमेश कोरगावकर और दूसरे हैं शिवसेना (शिंदे) गुट के अशोक पाटिल। दोनों उम्मीदवारों के बीच टक्कर होगी, और इस बार की जीत निश्चित रूप से शिवसेना के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

चुनौतीपूर्ण माहौल और मतदाता समीकरण

भांडुप पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में 2,98,510 मतदाता हैं, जिनमें 70% मराठी भाषी लोग हैं। इसके अलावा, इस क्षेत्र में उत्तर भारतीय, दाक्षिणात्य, मुस्लिम, गुजराती और सिख समुदायों का भी अच्छा खासा जनसंख्या अनुपात है, जिससे यहां का मतदाता समीकरण थोड़ा जटिल हो सकता है। साथ ही, इस बार महायुती (भा.ज.पा., शिवसेना शिंदे गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस) के गठबंधन से शिवसेना को नई चुनौतियां मिल सकती हैं।

कुल मिलाकर, भांडुप पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिवसेना अपनी हैट्रिक पूरी कर पाती है या नहीं।

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