Lok Sabha elections: महाराष्ट्र में कांग्रेस नेताओं में क्यों मची है भगदड़, मुंबई से दिल्ली तक कौन जिम्मेदार?
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों को लेकर हुए एक हालिया टीवी सर्वे में राज्य में कांग्रेस और इंडी अलायंस की स्थिति बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए की तुलना में अच्छी बताई गई थी। लेकिन, पिछले करीब एक महीने में कांग्रेस से जिस तरह से बड़े नेता का पलायन शुरू हुआ है, वह अलग जमीनी हकीकत की ओर इशारा कर रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बाद राज्य के दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का कांग्रेस छोड़ना और फिर बीजेपी में शामिल हो जाना, राज्य में कांग्रेस की वास्तविक स्थिति का प्रमाण है।

अशोक चव्हाण बड़े जनाधार वाले मराठा चेहरा हैं
देवड़ा और सिद्दीकी का दायरा मुंबई तक सीमित माना जा सकता है। लेकिन, अशोक चव्हाण कांग्रेस के सबसे बड़े जनाधार वाले नेताओं में शामिल थे। इसलिए चुनावों से पहले धारणा की राजनीति में बीजेपी को बड़ी जीत मिली है।
वह मराठा होने के साथ-साथ नांदेड़ इलाके में बहुत ही प्रभावशाली माने जाते हैं। वह 38 वर्षों से कांग्रेस में जुड़े हुए थे तो उनके पिता और पूर्व सीएम शंकरराव चव्हाण की कांग्रेसी विरासत तो और भी पुरानी है।
कांग्रेस से क्यों टूट रहा है बड़े नेताओं का भरोसा?
सवाल है कि कांग्रेस के इतने वफादार और समर्पित नेताओं के साथ आखिर ऐसा क्या हो रहा है, जिसकी वजह से उन्हें न तो पार्टी पर भरोसा रह गया है और न ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर।
क्योंकि, अशोक चव्हाण तो उस समिति में भी शामिल थे, जो इंडी अलायंस में उद्धव ठाकरे और शरद पवार की पार्टियों के साथ सीटों के बंटवारे पर चर्चा कर रही है।
कांग्रेस में घुटन महसूस हो रही है- बाबा सिद्दीकी
खुद चव्हाण का कहना है कि जिस पार्टी में उन्होंने इतने दिन गुजारे हैं, उसके बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ कहना मुनासिब नहीं समझते हैं। लेकिन, बाबा सिद्दीकी की मानें तो महाराष्ट्र में कांग्रेस की डंवाडोल होती स्थिति की वजहों की ओर इशारा मिल सकता है।
उनका कहना है, 'और लोग छोड़ने वाले हैं, क्योंकि वे घुटन महसूस कर हैं और वह रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। यह कांग्रेस के लिए वेक-अप कॉल है, लेकिन मैं नहीं समझता कि वे जागने जा रहे हैं।'
राहुल गांधी के करीबियों की ओर उठ रही है पार्टी की हालत के लिए उंगली
सिद्दीकी अब एनसीपी में शामिल हो चुके हैं। जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस नेता क्यों पार्टी छोड़ते जा रहे हैं तो उन्होंने इसके लिए पार्टी हाई कमान के फैसलों को जिम्मेदार बताया है।
उन्होंने कहा, 'मैं नहीं समझता कि यह सब किसी एक खास नेता की वजह से हो रहा है। यह हाई कमान की ओर से लिए जा रहे सामूहिक निर्णयों की वजह से हो रहा है।'
लेकिन, अगली ही लाइन में उन्होंने इसे और ज्यादा स्पष्ट कर दिया, 'जो लोग चुने हुए नहीं हैं, वह पार्टी में फैसला लेते हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन्होंने कभी चुनाव लड़ा ही नहीं।'
माना जा रहा है कि उनका इशारा पार्टी के महासचिवों केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश जैसे नेताओं की ओर है। यह दोनों ही राहुल गांधी के बेहद वफादार कांग्रेसियों में गिने जाते हैं। रमेश ने कभी चुनाव नहीं लड़ा है और वेणुगोपाल भी अभी राज्यसभा में हैं।
हाल ही में कांग्रेस ने यूपी कांग्रेस के बड़े नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम को अनुशासनहीनता के आरोपों में निकाला है। उन्होंने तो साफ तौर पर आरोप लगाया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तो रबर स्टांप की तरह काम कर रहे हैं।
मौजूदा कांग्रेसी नेताओं को भी हाई कमान से है शिकायत
सोमवार को जब चव्हाण ने कांग्रेस छोड़ा था तो कम से कम दो वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने साफ कहा था कि हाई कमान उनके जैसे नेताओं की चिंताओं पर गंभीरता से सोचने में नाकाम रहा है।
जैसे कि संजय निरुपम ने कांग्रेस नेताओं के बर्ताव को लेकर बड़ा सवाल उठा दिया था। उन्होंने कहा,'अशोक चव्हाण निश्चित तौर पर पार्टी के लिए एक बड़ी संपत्ति थे। कुछ उन्हें बोझ बता रहे हैं तो कुछ ईडी को दोष दे रहे हैं। यह सब बेकार की प्रतिक्रियाएं हैं। सच्चाई में उन्हें महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता (नाना पटोले की ओर इशारा) के बर्ताव से परेशानी थी।'
उनके मुताबिक अगर नेतृत्व उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेता तो यह समस्या पैदा ही नहीं होती। उन्होंने 2022 में नांदेड़ में चार दिनों तक गुजरी भारत जोड़ो यात्रा की सफलता में उनके योगदान का भी जिक्र किया है और कहा कि उनकी क्षतिपूर्ति किसी से भी नहीं की जा सकती।
इसी तरह मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और एमएलसी भाई जगताप का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व को इस बात पर आत्मचिंतन करना चाहिए कि वरिष्ठ नेता पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं। इन नेताओं का इशारा महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले की ओर है।
पटोले बीजेपी से आकर महाराष्ट्र कांग्रेस में शीर्ष पर पहुंचे हैं और अपने विवादित बयानों की वजह से अक्सर पार्टी को परेशानी में डालते रहे हैं। लेकिन, उनकी पकड़ दिल्ली तक इतनी मजबूत है कि उन्हें कोई छू नहीं पाता। कांग्रेस छोड़कर जाने वाले नेताओं की भावनाओं में यह दर्द बार-बार बयां हुआ है।












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