Maharashtra Politics: विपक्षी दलों के नेता क्यों बने CM देवेंद्र फडणवीस के मुरीद, क्या हैं इसके सियासी मायने?
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में खासकर के पिछले पांच वर्षों से जो एक कड़वाहट आ गई थी,वह इस बार के विधानसभा चुनावों के बाद से धीरे-धीरे सियासी शुचिता में तब्दील होती नजर आ रही है। जो पिछले कुछ वर्षों में एक नेता के दुश्मन बने नजर आ रहे थे, वही अब उनकी शान में कसीदे पढ़ रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं बीजेपी नेता और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की। इनकी लोकप्रियता पर महाराष्ट्र की जनता चुनावों के माध्यम से मुहर लगा चुकी है। अब विपक्षी दलों के नेता भी उनकी तारीफ करने के मौके ढूंढ़ने लगे हैं। यह बदलाव तो अच्छा है, लेकिन इसके सियासी मायने समझना भी दिलचस्प होगा।

Maharashtra Politics: एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) हुई सीएम देवेंद्र फडणवीस की मुरीद
महाराष्ट्र के नव नियुक्त मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए पिछला साल भले ही बहुत माथापच्ची और सियासी खींचतान वाला रहा हो, लेकिन नया साल 2025 उनके लिए अच्छी सियासी संभावनाओं के द्वार खोलता नजर आ रहा है। मसलन, सीएम फडणवीस के सामने अभी गार्डियन मंत्री के पदों को लेकर सगयोगी दलों के साथ तालमेल बिठाने की चुनौती है।
इसी दौरान विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के दो सहयोगियों से मिल रही तारीफ से उनका मनोबल ऊंचा हुआ है। फडणवीस के कुछ करीबियों का भी मानना है कि 'अब सीएम के लिए उनके जाने हुए विरोधियों की ओर से आलोचना नहीं, बल्कि गुलदस्ते आ रहे हैं।'
Maharashtra Politics: फडणवीस एकमात्र व्यक्ति हैं, जो ईमानदारी से काम कर रहे हैं- सुप्रिया सुले
पहले शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र सामना में मुख्यमंत्री फडणवीस के कार्यों की सरहाना की,तो शनिवार को एनसीपी (एसपी) नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने अपनी जिम्मेदारियों के प्रति उनकी नेकनीयती की तारीफ की।
मुख्यमंत्री फडणवीस इस साल 1 जनवरी को नक्सलवाद के लिए कुख्यात महाराष्ट्र के जिले गढ़चिरौली का दौरान किया था, इसकी सुले ने जोरदार तरीके सराहना की है। उन्होंने कहा, 'देवेंद्र फडणवीस पहले दिन से ही ऐक्शन मोड में हैं। ऐसा लगता है कि वही एकमात्र व्यक्ति हैं, जो सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। कोई दूसरा मंत्री सक्रिय नहीं है।'
एनसीपी के संस्थापक शरद पवार की बेटी ने यहां तक कहा कि 'पूर्व गृहमंत्री और एनसीपी के दिवंगत नेता आरआर पाटिल ने गढ़चिरौली जिले की जिम्मेदारी ली थी। यह देखकर अच्छा लगता है कि फडणवीस जिले की विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। वह एकमात्र व्यक्ति हैं, जो ईमानदारी से काम कर रहे हैं।'
Maharashtra Politics: शरद पवार की पार्टी के बदले रवैए से बीजेपी के लोग भी हैरान
सुप्रिया सुले की ओर से फडणवीस की तारीफ सुनना बीजेपी को भी हैरान कर रहा है। भाजपा के एक नेता ने कहा, '2014 से फडणवीस हमेशा शरद पवार के निशाने पर रहे हैं। 2014 से 2019 और 2022 से 2024 के बीच इसके नेताओं ने प्रशासन में फडणवीस की भूमिका को कभी स्वीकार नहीं किया। हर बात के लिए उन्होंने फडणवीस को निशाना बनाने की कोशिश की।' ऐसे में 'सुले की ओर से तारीफ बहुत ही चौंकाने वाली है।'
बीजेपी के लोग यह सोचकर दंग हैं कि यही सुप्रिया सुले हैं, जिन्होंने पिछली एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुति सरकार के दौरान बदलापुर यौन उत्पीड़न कांड में फडणवीस को 'पार्ट-टाइम होम मिनिस्टर' कहकर तंज कसा था। उनका आरोप था कि वे महाराष्ट्र से ज्यादा दिल्ली में व्यस्त रहते हैं।
Maharashtra Politics: अच्छा है कि हमारे विरोधी भी सीएम की विश्वसनीयता और साफ छवि की खुलकर तारीफ कर रहे हैं-बीजेपी
एनसीपी नेता के बयान के बारे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावकुले ने कहा है, 'महाराष्ट्र में सीएम की ईमानदारी के बारे में सब जानते हैं। जिन लोगों ने उन्हें एमएलए से लेकर मुख्यमंत्री तक देखा है, वे उन्हें सबसे मेहनती और ईमानदार राजनेता मानते हैं। यहां तक कि उनके कट्टर-आलोचक भी, जो सार्वजनिक तौर पर उनपर हमला करते हैं, उनकी विश्वसनीयता और साफ छवि के बारे में जानते हैं। इसलिए यह अच्छा है कि हमारे विरोधी खुलकर सामने आ रहे हैं और इसे स्वीकार कर रहे हैं। हम इसका स्वागत करते हैं।'
Maharashtra Politics: शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना'का संपादकीय लिखा- 'अभिनंदन देवभाऊ'
Maharashtra Politics: क्या हैं इसके सियासी मायने?
महाराष्ट्र की सियासत में यह बदलाव दो परिवारों पर आधारित दो राजनीतिक दलों में संभावित परिवर्तन के बीच दिख रहा है। एक में तो उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एनसीपी और उनके चाचा शरद पवार की एनसीपी (एसपी) में विलय की अटकलें लगने लगी हैं। इस कयासबाजियों को अजित पवार की मां आशा पवार के उस बयान से हवा मिली है, जिसमें उन्होंने 'पवार परिवार की एकता' की वकालत की है।
बीजेपी के एक नेता ने कहा भी है, 'संभावना है कि एनसीपी और एनसीपी (एसपी) अपने मतभेदों को मिटाने के लिए काम कर रहे हों। उनका एक पार्टी में विलय होगा या नहीं और एकजुट होंगे या नहीं, यह देखना अभी बाकी है।'
उधर उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई मनसे प्रमुख राज ठाकरे की एक पारिवारिक समारोह में हुई मुलाकात ने भी नई राजनीतिक संभावनाओं को जन्म दे दिया है। राज लोकसभा चुनावों से पहले एनडीए को समर्थन दे रहे थे।
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