महाराष्ट्र चुनाव 2024: मतदान के दौरान प्रत्याशी शिंदे की मौत, बूथ पर आया हार्ट अटैक
महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हाल ही में संपन्न हुआ। महाराष्ट्र में 288 सीटों पर चुनाव हुए, आधिकारिक नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे, लेकिन एग्जिट पोल पहले ही जारी हो चुके हैं। ये पोल संभावित नतीजों का शुरुआती संकेत देते हैं। बीड विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी बाला साहब शिंदे की मतदान केंद्र पर ही हार्टअटैक से मौत हो गई। धुले के एक पोलिंग बूथ पर भाजपा और वंचित बहुजन अघाड़ी के कार्यकर्ताओं में मारपीट हुई।

एग्जिट पोल भविष्यवाणियां
महाराष्ट्र में 11 एग्जिट पोल में से छह में भाजपा गठबंधन, जिसे महायुति के नाम से जाना जाता है, सरकार बनाने का अनुमान है। चार में कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी गठबंधन को बहुमत मिलने का अनुमान है। एक पोल में त्रिशंकु विधानसभा का संकेत है। वहीं, झारखंड में आठ एग्जिट पोल किए गए। चार में भाजपा गठबंधन की जीत का अनुमान है, दो में अखिल भारतीय गठबंधन सरकार बनने का अनुमान है और दो में त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान है।
जनमत और एक्ज़िट पोल को समझना
चुनावों से पहले जनमत सर्वेक्षण विभिन्न मुद्दों पर जनता की भावनाओं को जानने के लिए आयोजित किए जाते हैं। इनमें सिर्फ़ मतदाताओं की ही नहीं, बल्कि सभी व्यक्तियों की प्रतिक्रियाएँ शामिल होती हैं। एग्जिट पोल चुनावों के दौरान होते हैं और इसमें वोट डालने के बाद मतदाताओं से सवाल पूछे जाते हैं। नतीजों से मतदाताओं की प्रतिक्रियाओं के आधार पर यह अनुमान लगाने में मदद मिलती है कि मतदाता किस तरफ़ झुकाव रखते हैं।
महाराष्ट्र का राजनीतिक परिदृश्य
महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिशीलता हाल के वर्षों में काफी बदल गई है। 2019 में, भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने बहुमत हासिल किया, लेकिन 2014 की तुलना में सीटों और वोट शेयर दोनों में गिरावट देखी गई। गठबंधन ने 2019 में 42% वोट शेयर के साथ 161 सीटें जीतीं, जबकि 2014 में 185 सीटें और 47.6% वोट शेयर था।
नवंबर 2019 में कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन करके उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, मई 2022 में जब एकनाथ शिंदे ने कई विधायकों के साथ बगावत कर दी तो राजनीतिक उथल-पुथल मच गई। इसके चलते उद्धव को इस्तीफा देना पड़ा और शिंदे सीएम बने और देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम बने।

झारखंड में हालिया घटनाक्रम
झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में भी पिछले विधानसभा चुनाव 2019 के बाद से काफी बदलाव देखने को मिले हैं, जब झामुमो, कांग्रेस और राजद ने सामूहिक रूप से 47 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हेमंत सोरेन ने पांच साल के भीतर दो बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
हेमंत को भूमि घोटाले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में पांच महीने जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। हेमंत की अनुपस्थिति में चंपई सोरेन कुछ समय के लिए सीएम रहे, लेकिन हेमंत सरकार द्वारा कथित जासूसी के कारण भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
आगामी चुनाव परिणामों से पता चलेगा कि क्या ये भविष्यवाणियां सच साबित होंगी या दोनों राज्यों में मतदान प्रक्रिया से अप्रत्याशित परिणाम सामने आएंगे।












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