Maharashtra Election: 'लाडकी बहीण योजना' बदल सकती है चुनावी तस्वीर! कैसा है चुनाव से पहले का माहौल?
Maharashtra Chunav 2024: लोकसभा चुनावों में हार के बाद महायुति सरकार ने जो 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना' की शुरुआत की, उसका लाभ प्रदेश के कोने-कोने तक के लाभार्थियों को मिल रहा है। 15 अक्टूबर को जब चुनाव तारीखों की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता लागू की गई, इस योजना की लाभार्थी महिलाओं की संख्या 2.3 करोड़ को पार कर चुकी थी। इतनी बड़ी आबादी में से सबके खाते में 7,500 रुपए सीधे पहुंच चुके हैं।
महाराष्ट्र में कुल 9.6 करोड़ वोटर है। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 4.98 करोड़ है और महिला वोटर 4.67 हैं। महाराष्ट्र के पांच जिलों में पुरुषों से महिला मतदाताओं की जनसंख्या ज्यादा है। प्रदेश में बीते 13 वर्षों में महिला वोटरों का लिंगानुपात भी बढ़ा है। 2011 में यह 929 था, जो अब 933 हो चुका है।

आधी महिला वोटरों में सबके के खातों में पहुंचे 7,500 रुपए
हम ये आंकड़े इसलिए बता रहे हैं कि इन्हीं में 20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का परिणाम छिपा हुआ है। यह आंकड़े बता रहे हैं कि महाराष्ट्र में कुल महिला मतदाताओं में से आधी वोटरों के खाते में महायुति सरकार की ओर से नवंबर महीने तक का 'माझी लाडकी बहीण योजना' का पैसा पहुंचा दिया गया है।
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एमवीए और महायुति के वोट शेयर में मात्र 0.2% मतों का था अंतर
अब आपके सामने एक और आंकड़ा रख रहे हैं, जिससे यह समझने में आसानी हो सकती है कि प्रदेश की कुल महिला वोटरों में से आधी को इस योजना का लाभ मिलने के मायने क्या हो सकते हैं। इस साल लोकसभा का जो चुनाव हुआ है, उसमें महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) को मिले कुल वोट में बहुत ही मामूली अंतर था।
जैसे कुल 48 सीटों में से 30 सीटें जीतने वाले विपक्षी एमवीए को 43.7% वोट मिले थे। वहीं सत्ताधारी महायुति गठबंधन को सीट भले ही 17 ही मिले हों, लेकिन उनका वोट शेयर भी 43.5% ही रहा है। ये आंकडे और लाडकी बहीण योजना की लाभार्थियों की तादाद चुनाव विश्लेषकों के दिलों की धड़कनें बढ़ा चुकी हैं।
करीब 2 लाख वोटों का अंतर और 2.3 करोड़ लाभार्थी, कौन किसपर पड़ेगा भारी?
अगर वोटों की संख्या के हिसाब से देखें तो बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी की महायुति की तुलना में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एससीपी) करीब दो लाख ज्यादा वोट मिले थे। एमवीए को मात्र दो लाख वोटों की बढ़त और 2.3 करोड़ 'माझी लाडकी बहीण योजना' की लाभार्थियों की संख्या, पूरी चुनावी तस्वीर बदलने की संभावनाएं पैदा कर सकती हैं।
महिलाओं के लिए अन्य लोक-लुभावना स्कीम
महाराष्ट्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सिर्फ एक योजना के तहत 1,500 रुपए महीने ही नहीं दे रही है, 52 लाख परिवारों को तीन फ्री गैस सिलेंडर, गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों की छात्राओं को स्कॉलरशिप और घरों में काम करने वाली कामगारों के लिए 10,000 रुपए मूल्य के बर्तन देने का भी एलान किया है।
लाभार्थी योजनाओं से किसकी किस्मत चमकेगी और किसका भविष्य बिगड़ेगा?
चुनावी जानकारों का कहना है कि इस तरह की लाभार्थी योजनाएं उन सीटों पर चुनाव परिणाम पलटने का दम रखते हैं, जहां हार और जीत का फैसला बहुत ही कम वोटों से होने वाला है।
महिलाओं के बीच 'लाडकी बहीण योजना' की दिख रही है लोकप्रियता
जहां तक महिला लाभार्थियों के बीच लाडकी बहीण योजना की लोकप्रियता की बात है तो टीओआई की एक रिपोर्ट से इसकी वजह से बन रहे माहौल पर भी स्थिति साफ हो सकती है।
मसलन, कल्याण इलाके में सिलाई काम काम काम करने वाली एक महिला अनिता साहू कहती हैं कि इससे उनके परिवार की आमदनी बढ़ गई है। उनके पति एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में चपरासी हैं। अगस्त से अनिता के खाते में 7,500 रुपए आ चुके हैं। इससे उन्होंने अपने एक बेटे की कॉलेज की फीस भर दी है और कुछ पैसे भविष्य के लिए बचाकर रखे हैं।
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इसी तरह से छत्रपति संभाजीनगर की संगीता शेलार ने योजना के पैसों को अपनी एक साल की बेटी की एलआईसी पॉलिसी में लगा दिया है। वहीं कोंढवा की 50 वर्षीय माया वाघमारे, जो कि कूड़ा उठाने का काम करती हैं, वह इन पैसों की वजह से कुछ बचत करने लगी हैं। वह सिर्फ यही चाहती हैं कि जो भी सरकार बने, यह योजना बंद नहीं होनी चाहिए।












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