Maharashtra Election: कौन हैं सदा सरवणकर, जिन पर सीएम शिंदे ने जताया भरोसा

Maharashrea Election 2024: मराठा अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली शिवसेना में कई ऐसे दिग्गज हैं, जिन्हें उस वक्त से संघर्ष शुरू किया है, जब उनके मूंछें भी नहीं आईं थीं। सदा सरवणकर उन्हीं में से एक हैं। उनकी यूं ही नहीं मराठी लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली संगठन के रूप में शिवसेना की जल्दी ही पहचान बन गई। शिवसैनिकों के आंदोलनों ने मुंबई को हिला दिया था, मराठी लोगों के अधिकारों, उन्हें नौकरी के अवसर दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया।

नगरसेवक के रूप में किया काम
बिल्कुल युवा अवस्था से ही वे शिवसेना के विचारों और बालासाहेब की व्यक्तित्व से प्रभावित थे। मुंबई के अनगिनत युवाओं की तरह उन्होंने सामान्य शिवसैनिक के रूप में संगठन में काम करना शुरू किया। सामाजिक कार्य करते-करते दादर, माहिम क्षेत्र में उनका जनसंपर्क काफी बढ़ गया और 1992 में वे पहली बार बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर नगरसेवक के रूप में चुने गए। 1997 में उन्हें फिर से बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर नगरसेवक के रूप में काम करने का अवसर मिला। उनकी लोकप्रियता आगे भी बनी रही और 2002 में वे फिर से महापालिका पर चुने गए। 2002 से 2004 तक वे बृहन्मुंबई महानगरपालिका की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे।

Maharashrea Election 2024

2009 में कांग्रेस में एंट्री
महानगरपालिका में करियर बनाने के बाद 2004 में उन्हें विधानसभा का टिकट दिया गया और पहले ही प्रयास में वे विधानसभा पर चुने भी गए। शिवसेना के तत्कालीन नेता नारायण राणे से उनकी विशेष नजदीकी थी। 2009 में शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने सदा सरवणकर को टिकट नहीं दिया और शिवसेना की ओर से आदेश बांदेकर को उम्मीदवार बनाया गया। इस निर्णय से नाराज होकर सदा सरवणकर ने कांग्रेस में प्रवेश किया और कांग्रेस से माहिम निर्वाचन क्षेत्र से 2009 का विधानसभा चुनाव लड़ा। लेकिन सरवणकर को हार का सामना करना पड़ा और एमएनएस के नितिन सरदेसाई जीते।

5 साल बाद शिवसेना में वापसी
2014 में सदा सरवणकर शिवसेना में वापस आए और उन्हें माहीम विधानसभा क्षेत्र से शिवसेना ने मौका दिया और वे चुनाव जीत भी गए। 2019 में तीसरी बार विधायक चुने गए। अपने तीन कार्यकालों के दौरान उन्होंने माहीम विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय लोगों की कई समस्याओं का समाधान किया।

शिंदे का मिला समर्थन
2022 में शिवसेना में सत्ता परिवर्तन हुआ और चालीस विधायकों तथा आठ मंत्रियों ने उद्धव ठाकरे को किनारे कर एकनाथ शिंदे को शिवसेना की कमान सौंप दी। एकनाथ शिंदे शिवसेना के मुख्य नेता और राज्य के मुख्यमंत्री भी बने। पहले कुछ दिन उद्धव ठाकरे के साथ रहे सदा सरवणकर ने बाद में एकनाथ शिंदे को समर्थन दिया। एकनाथ शिंदे ने ही सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर सदा सरवणकर की नियुक्ति की। मुंबई के समाजकारण में सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष पद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस पद पर आते ही सदा सरवणकर ने विभिन्न कार्यों को गति दी। सिद्धिविनायक मंदिर परिसर में सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्यों को उन्होंने प्रोत्साहित किया। इसके लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से अनुरोध किया। सिद्धिविनायक मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य के लिए 500 करोड़ रुपये का फंड सरवणकर के प्रयासों से मंजूर हुआ। इस फंड से भक्तों के लिए निवास व्यवस्था, वाहन पार्किंग, दर्शन व्यवस्था, भक्तों के लिए कतार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

किनारी क्षेत्र और लाडली बहन के लिए प्रयास
माहीम विधानसभा क्षेत्र में किनारी क्षेत्र शामिल है। यहां की कोलीवाड़ा में अनियमित जल आपूर्ति की स्थानीय लोगों की शिकायत थी। सदा सरवणकर ने इस समस्या का समाधान करने का प्रयास किया और यहां के नागरिकों के लिए पंप उपलब्ध कराया। वहीं मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना शिंदे द्वारा शुरू की गई। सरवणकर ने इस स्कीम को माहीम निर्वाचन क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर लागू किया और कुल 12000 महिलाओं का इस योजना के लिए पंजीकरण करवाया। बता दें कि लाडली बहन स्कीम के तहत पात्र लाभार्थी महिलाओं को डेढ़ हजार रुपये प्रति माह उनके खाते में सरकार की ओर दिए जाते हैं।

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