महाराष्ट्र: अनिल देशमुख पर लगे आरोपों की जांच के लिए कमिटी का गठन, रिटायर जज करेंगे तफ्तीश
मुंबई। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह के 'लेटर बंम' ने प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रखी है। परमबीर सिंह द्वारा गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने जांच कमेटी का गठन किया है। महाराष्ट्र के मंत्री और राकांपा नेता नवाब मलिक ने मंगलवार को इस मामले पर जानकारी देते हुई कहा कि अनिल देशमुख के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए रिटायर्ड जज कैलाश चंडीवाल के तहत एक समिति का गठन किया है।

उधर, मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने परमबीर सिंह की गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग और तबादले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने परमबीर सिंह को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने मंत्री के खिलाफ अभी तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई। बिना FIR जांच के आदेश कैसे दिए जा सकते हैं। कोर्ट ने पूछा कि परमबीर सिंह जो आरोप लगा रहे हैं उसे लेकर कोई एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई ? फिलहाल इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
क्या है मामला ?
महाराष्ट्र में एंटीलिया केस मामले में मुंबई पुलिस के पूर्व अफसर सचिन वाजे का नाम आने और एनआईए द्वारा उसकी गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को हटाकर उन्हें होमगार्ड का डीजी बना दिया था। ट्रांसफर के 3 दिन बाद 20 मार्च को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर भूचाल ला दिया था। इस पत्र में परमबीर सिंह ने गृहमंत्री अनिल देशमुख पर वसूली का आरोप लगाया था। उन्होंने लिखा था कि अनिल देशमुख ने पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे को मुंबई से हर महीने 100 की वसूली का टारगेट दे रखा था। इसमें मुंबई के 1750 बार से 40-50 करोड़ की वसूली शामिल थी। आठ पेज के पत्र में परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख के एंटीलिया केस से कनेक्शन की बात नहीं कही थी।
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