महाराष्ट्र सीएम फडणवीस का वो विज्ञापन, जिस पर मचा बवाल, संजय राउत ने ₹40 करोड़ खर्च करने का लगाया आरोप
Maharashtra CM Fadnavis Advertisement Row: महाराष्ट्र में इन दिनों एक विज्ञापन जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा मीडिया में प्रकाशित करवाए गए विज्ञापन को लेकर जमकर बवाल मचा हुआ है। इस विज्ञापन की वजह से फडणवीस सरकार विपक्ष के निशाने पर आ चुकी है। विपक्ष इसे "प्रचार के लिए काले धन के दुरुपयोग" के रूप में पेश कर रहा है।
विपक्षी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मामले पर मुख्यमंत्री फडणवीस से सवाल किया है। राउत ने दावा किया कि इन विज्ञापनों पर 40 से 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन इनमें विज्ञापनदाता का नाम नहीं है। आइए जानते हैं आखिर क्या है ये विज्ञापन और क्यों मचा है इस बवाल?

क्या है ये विज्ञापन जिस पर मचा है बवाल?
दरअसल, महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विज्ञापन प्रिंट मीडिया, फ्लेक्स और अन्य माध्यमों पर बड़े पैमाने पर प्रसारित हुए। इन विज्ञापनों में मुख्यमंत्री को छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में फूल चढ़ाते हुए दिखाया गया था, जिस पर केवल 'देवाभाऊ' लिखा हुआ था। इस विज्ञापन से नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
संजय राउत ने लगाया फडणवीस सरकार पर लगाया बड़ा आरोप
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और सांसद संजय राउत ने इस मामले पर मुख्यमंत्री फडणवीस से सवाल किया है। राउत ने दावा किया कि इन विज्ञापनों पर 40 से 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन इनमें विज्ञापनदाता का नाम नहीं है।
संजय राउत का दावा- ये विज्ञापन "काले धन" से दिए गए होंगे
राउत ने पूछा, "जिसने भी ये विज्ञापन दिए हैं, उसने अपना नाम क्यों छिपाया? जनता को इसका पता चलना चाहिए।" उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ये विज्ञापन "काले धन" से दिए गए होंगे, क्योंकि विज्ञापनदाता का नाम जानबूझकर छिपाया गया है।
संजय राउत ने मुख्यमंत्री कार्यालय से इस संबंध में किसी भी निर्देश की जांच की मांग की। राउत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज का उपयोग अपने व्यक्तिगत राजनीतिक फायदे के लिए किया है।
राउत ने कहा, "छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे देवता हैं और उन्हें प्रणाम करना हर मराठी व्यक्ति का कर्तव्य है। लेकिन यह विज्ञापन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की छवि चमकाने के लिए किया गया है, जो परेशान करने वाला है।"
शिवाजी महाराज का स्मारक बनाने का क्या हुआ?
संजय राउत ने इस बात पर जोर दिया कि मराठा आरक्षण का छत्रपति शिवाजी महाराज से कोई संबंध नहीं है। राउत ने भाजपा पर जातीय राजनीति करके शिवाजी महाराज का नाम खराब करने का आरोप लगाया। राउत ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "अगर इतना ही प्रेम है, तो अरब सागर में शिवाजी महाराज का स्मारक बनाने का क्या हुआ?" उन्होंने भाजपा पर शिवाजी महाराज के 'सबको साथ लेकर चलने' के सिद्धांत को त्यागने का भी आरोप लगाया।
राउत ने कहा कि ये विज्ञापन 'देवाभाऊ' की प्रशंसा के लिए दिए गए हैं, जिससे उनका राजनीतिक प्रचार हो सके। उन्होंने सवाल उठाया कि शिवाजी महाराज के चरणों में फूल चढ़ाकर अपनी प्रसिद्धि बढ़ाने की कोशिश करने वाले ये विज्ञापन कौन देता है, और संदेह जताया कि ये पैसे "दो नंबर" के काम करने वालों के हो सकते हैं।












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