Maharashtra:अनिल देशमुख की छुट्टी लगभग तय, जानिए कौन बन सकता है नया गृहमंत्री ?

मुंबई: नवंबर, 2019 में सत्ता में आने के बाद महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी अपने सबसे गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। मुंबई में पूर्व पुलिस कमिश्नर परबीर सिंह के खुलासों के बाद जहां वहां की उद्धव सरकार हिली हुई हैं, वहीं उसके भूचाल का असर दिल्ली में भी सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं के बंगलों पर महसूस किया जा रहा है। दिल्ली में इस वक्त महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार का आवास बना हुआ है, जहां शिवसेना और उनकी अपनी पार्टी के नेताओं का आना-जाना लगा हुआ है। एक के बाद एक मुलाकातों का दौर चल रहा है। अब मंथन के केंद्र में प्रदेश के गृहमंत्री अनिल देशमुख हैं, जिनकी कुर्सी को बचा पाना ठाकरे सरकार के लिए बहुत ही मुश्किल लग रहा है। खुद पवार ने संकेत दिए हैं कि अगले एक-दो दिनों में वहां की सरकार में कुछ उठा-पटक देखने को मिल सकता है। ऐसे में कुछ नामों पर चर्चा शुरू हो चुकी है, जिन्हें देशमुख को हटाने के बाद नया गृहमंत्री बनाया जा सकता है।

पवार तय करेंगे महाराष्ट्र का नया गृहमंत्री

पवार तय करेंगे महाराष्ट्र का नया गृहमंत्री

उद्धव सरकार पर मुंबई के पूर्व पुलिस कप्तान परमबीर सिंह ने ऐसा बम फोड़ा है, जिसकी गूंज दिल्ली तक में सूनाई दे रही है। सत्ताधारी शिवसेना में सीएम उद्धव ठाकरे के बाद हाल के महीनों में सबसे ताकतवर बनकर उभरे संजय राउत भी गठबंधन बचाने की गुहार लेकर रविवार को पवार के दिल्ली दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। जब एंटीलिया विस्फोटक मामले और मनसुख हिरेन हत्याकांड में मुख्य आरोपी सचिन वाजे को लेकर एक से बढ़कर एक खुलासे हो रहे थे तो बड़बोले राउत उस संदिग्ध पुलिस वाले की शान में कसीदे पढ़ रहे थे। लेकिन, अब वो गठबंधन के सहयोगियों को आत्मचिंतन की पाठ पढ़ा रहे हैं। इससे उद्धव सरकार पर पवार के पॉवर का भी अंदाजा मिलता है, जिनके सामने चुनौती अनिल देशमुख पर लगे 100 करोड़ रुपये महीने की जबरन उगाही के दाग से सरकार का पीछा छुड़ाने की है। वो देशमुख पर लगे आरोपों को गंभीर तो मान रहे हैं, लेकिन अब परमबीर सिंह पर भी कार्रवाई चाहते हैं। इसीलिए लगे हाथ पूर्व आईपीएस जूलियो रिबेरो से जांच की वकालत कर रहे हैं। लेकिन, विपक्ष का दबाव ऐसा है कि देशमुख को ज्यादा दिन तक कुर्सी पर बिठाए रखना इनके लिए अब मुश्किल लगता है।

दिलीप वल्से पाटिल को नया गृहमंत्री बनाने की चर्चा

दिलीप वल्से पाटिल को नया गृहमंत्री बनाने की चर्चा

जानकारी के मुताबिक देशमुख के सियासी किस्मत का फैसला पवार के हाथों में ही है और इसलिए सूत्रों के मुताबिक वो दिल्ली में अपनी पार्टी के नेताओं से उनके विकल्प पर मंथन कर रहे हैं। संजय राउत के बाद पवार से मुलाकात के लिए दिल्ली आने वालों में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और प्रदेश एनसीपी अध्यक्ष जयंत पाटिल भी शामिल हैं। ये भी तय है कि महाराष्ट्र का अगला गृहमंत्री पवार ही तय करेंगे, जिसके लिए दिलीप वल्से पाटिल का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा तो ये है कि इसपर फैसला उद्धव लेंगे। जहां तक वल्से पाटिल का सवाल है तो वो एनसीपी बॉस के चहेते भी हैं और फिलहाल किसी बड़े विवाद से उनका नाम भी नहीं जुड़ा है। वह राज्य में श्रम और उत्पाद मंत्री हैं। ऐसे में अगर पवार उद्धव को उन्हें गृहमंत्री बनाने के लिए कहते हैं तो इसके लिए कोई खास तामझाम की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

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    सोमवार को हो सकती है महा विकास अघाड़ी की बैठक

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    माना जा रहा है कि इन नेताओं से विचार करने के बाद एनसीपी चीफ नए गृहमंत्री का नाम उद्धव को बता देंगे। उससे पहले वो उनसे चर्चा भी कर सकते हैं। वैसे जानकारी के मुताबिक औपचारिक रूप से अंतिम फैसले पर मुहर लगाने से पहले सोमवार को गठबंधन के दलों यानी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं के बीच मुंबई में कई दौर की बैठकें हो सकती हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर पूर्व पुलिस कमिश्नर ने निलंबित असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे और दूसरे पुलिस वालों को 100 करोड़ रुपये महीने वसूली करने के टारगेट दिए जाने के आरोप लगाए हैं। परमबीर को उद्धव सरकार ने उनके पद से हटाकर होमगार्ड का डीजी बनाया है।

    अब राउत को हो रही है सरकार की छवि की चिंता

    अब राउत को हो रही है सरकार की छवि की चिंता

    इस बीच नासिक में शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि , 'विपक्ष क्या कहता है या उनकी मांग पर सरकार कोई निर्णय नहीं करती है। लेकिन, मैंने पिछले कुछ घंटों में स्वीकार किया है कि खत के जरिए जो कुछ भी आरोप लगाए गए हैं, उससे सरकार की छवि खराब हुई है।' वो बोले कि, 'अब हम सबको साथ मिलकर बैठकर सोचना चाहिए कि सरकार की छवि कैसे साफ की जाए। लेकिन, मैंने पहले कहा है कि गठबंधन के सभी सहयोगियों को देखना चाहिए कि उनके पांव जमीन पर हैं।' उधर विपक्षी भाजपा उद्धव सरकार से नैतिक आधार पर इस्तीफा मांग रही है।

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