महाराष्ट्र में एनडीए गठबंधन में क्यों नहीं सुलझ रही सीट शेयरिंग की गुत्थी, कहां फंसा है पेच?
Maharashtra Lok Sabha elections 2024: लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों का ऐलान 16 मार्च शनिवार को चुनाव आयोग करने वाला है। एक तरफ जहां चुनाव की तरीखों की घोषणा होने वाली हैं वहीं अभी तक महाराष्ट्र में सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए गठबंधन के अंदर पेच फंसा हुआ है।

अमित शाह के प्रतिनिधित्व में अब तक कई बैठक हो चुकी हैं लेकिन भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना और आजित पवार की एनसीपी के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं पाई है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सीटों का बंटवारा हो चुका लेकिन महाराष्ट्र में एनडीए गठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा अभी भी सिर दर्द बना हुआ है।
आइए जानते हैं महाराष्ट्र में जब एनडीए गठबंधन की ही सरकार है तो आखिर सीट शेयरिंग को लेकर गुत्थी क्यों नहीं सुलझ पा रही हैं? अब तक महाराष्ट्र में एनडीए गठबंधन के बीच सीट शेयरिंग क्यों नहीं हो पा रही है?
दरअसल, महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार वाली एनसीपी की महायुति गठबंधन की सरकार है। महाराष्ट्र में गृह मंत्री अमित शाह भाजपा के दोनों सहयोगी दलों के नेता एकनाथ शिंदे और अजित पवार के साथ बैठक कर रहे हैं लेकिन उनके बीच सीट शेयरिंग क्या होगी इस पर सहमति नहीं बन पाई है।
हालांकि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस दावा कर चुके हैं कि हमारे गठबंधन ने लगभग 80 प्रतिशत सीटों पर मामला सुलझा लिए गए हैं लेकिन सवाल उठ रहा है कि बाकी सीटों इस गठबंधन में बात बनेगी?
बता दें महाराष्ट्र में भाजपा, शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अब तक जो फॉर्मूला सामने आया है उसमें भाजपा ने खुद को 32 सीटें और शिंदें गुट की शिवसेना को 12 और अजित पवार की एनसीपी गुट को 4 सीटों दी हैं।
वहीं दो सप्ताह अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद भाजपा को 34 और शिंदे को 10, अजित पवार गुट को चार सीटों का ऑफर दिया गया था जिस पर शिंदे तैयार नही थे।
सूत्रों के अनुसार एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के वर्तमान समय में 13 सांसद है शिवसेना सभी सांसदों की सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन रामटे, यवतमाल-वाशम और कोल्हापुर समेत लगभग सात सीटें ऐसी हैं जहां पर भाजपा अपने कैंडीडेट चुनाव मैदान में उतारना चाहती है। जिस पर शिंदे तैयार नहीं हैं।
वहीं अजित पवार भी महाराष्ट्र की मावल और परभणी सीट की डिमांड कर हैं जबकि इन सीटों पर एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना के सांसद हैं।
दरअसल, बात केवल एकनाथ शिंदे की होती तो वो मान भी जाते लेकिन उन पर ठाकरे की शिवसेना छोड़कर उनके साथ आए नेताओं का भी दबाव है, वर्तमान सासंद अपनी सीटे नहीं छोड़ना चाहते हैं। शिंदे को डर है कि अगर भाजपा की बात मान कर वो 10 या 12 सीटों पर मान भी जाए तो कहीं उनके गुट के नेता आम चुनाव से ठीक पहले बगावत कर कहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूटीबी में ना शामिल हो जाएं।
ये ही दवाब अजित पवार पर भी है उन्हें भी डर है कि उनके साथ आए एनसीपी सांसद नेता सीटें ना मिलने पर शरद पवार गुट में कहीं वापस ना चले जाएं!
वहीं भाजपा की बात की जाए तो अब जबकि देश में मोदी और राम मंदिर की लहर हैं तो ऐसे में महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटों में से अधिक से अधिक पर चुनाव लड़कर भगवा फहराना चाहती है। कुल मिलाकर भाजपा के सामने चुनौती है कि बिना महाराष्ट्र सरकार के अपने साथी एकनाथ शिंदे और अजित पवार को नाराज किए बिना महाराष्ट्र में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय करें क्योंकि 2024 के अंत के महीनों में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं।
सूत्रों के अनुसार भाजपा विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल महाराष्ट्र की महाअघाड़ी गठबंधन की सीट शेयरिंग के फॉर्मूले का ऐलान होने का इंजजार कर रही है। इस विपक्षी महागठबंधन में उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूटीबी, शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस शामिल हैं। हालांकि महाअघाडी गठबंधन ने सीट शेयरिंग को लेकर आज एक अहम बैठक की है।












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