क्या महायुति में बिगड़ रही है बात? सीट बंटवारा हुआ नहीं, तो एक सीट पर दो दल करने लगे प्रचार
महाराष्ट्र में अभी महायुति (महागठबंधन) या एनडीए की सरकार है। बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी इस बार लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ने वाले हैं। लेकिन, यूपी के बाद सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले प्रदेश में अभी तक इन दलों के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है।
2019 में महाराष्ट्र में एनडीए में दो ही दल थे। बीजेपी और शिवसेना (तब यह टूटी नहीं थी)। राज्य की 48 सीटों में से बीजेपी 25 सीटें लड़कर 23 सीटें जीती थी। और तबकी उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना 23 सीटों पर लड़कर 18 सीटें जीती थी।

2019 से बदल चुका है एनडीए में सीटों का गणित
अबकी बार यह समीकरण पूरी तरह से बदल चुका है। शिवसेना के दो टुकड़े हो चुके हैं। महायुति में शामिल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की असली शिवसेना के पास अभी 13 सीटें हैं। वहीं अभी गठबंधन में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एनसीपी भी शामिल है।
शिवसेना ने शुरू की दबाव की राजनीति
इस वजह से सीटों के बंटवारे वाला पुराना फॉर्मूला लागू नहीं किया जा सकता। उलझन यहीं पर है। दबाव की राजनीति के तहत शिवसेना ने उतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी जता दी है, जितनी पर पिछली बार लड़ी थी।
जबकि, जानकारी के मुताबिक पार्टी सांसदों के साथ पिछली बैठक तक सीएम शिंदे की पार्टी 18 सीटों पर ही दावेदारी की बात कह रही थी।
जानकार मानते हैं कि दावेदारी वाली सीटों की संख्या बढ़ाना दबाव की राजनीति का हिस्सा है, ताकि कम से कम उतनी सीटें जरूर आ जाएं, जिससे पार्टी के हितों को नुकसान की गुंजाइश न बचे।
अजित पवार की एनसीपी के आने से बदला सीटों का गणित
उधर बीजेपी की दिक्कत ये है कि शिवसेना के टूटने के बाद उसे ज्यादा सीटों पर लड़ने की उम्मीद थी, लेकिन अब अजित पवार की एनसीपी के लिए भी सीटों का जुगाड़ करना पड़ रहा है।
पिछली बार जिन 5 सीटों पर एनसीपी और कांग्रेस जीती थी, वहां तो अजित पवार की पार्टी का आसान जुगाड़ बैठ सकता है। लेकिन, पेच एनडीए की जीती 41 सीटों पर फंसने की बात आ रही है।
एक सीट पर दो-दो दल करने लगे प्रचार
सीटों के इस उलझन ने सहयोगी दलों को पूरी तरह से असमंजस में डाल रखा है। कुछ सीटें ऐसी हैं, जिसपर दो-दो दल मानकर चल रहे हैं कि आखिरकार यह सीट उन्हीं के खाते में आएगी और इसी वजह से मैदान में भी अजीब स्थिति सामने आ रही है।
साऊथ मुंबई में देवड़ा और नार्वेकर मैदान में उतरे
मसलन, पूरे महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित माने वाली मुंबई साऊथ लोकसभा सीट पर ऐसी ही स्थिति बन गई है। यहां बीजेपी और शिवसेना दोनों ही दलों के संभावित उम्मीदवार प्रचार मोड में आ चुके हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल स्पीकर ने साऊथ मुंबई लोकसभा सीट के अंदर आने वाले सभी 6 विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी बैठकें शुरू कर दी हैं और इससे जुड़े कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।
इसी तरह हाल में कांग्रेस से शिवसेना में शामिल होकर राज्यसभा पहुंचे मिलिंद देवड़ा ने भी इस चुनाव क्षेत्र में चुनाव अभियान लॉन्च कर दिया है। दोनों नेताओं के बैनर और पोस्टर से पूरा चुनाव क्षेत्र भर गया है। जबकि, इस सीट पर अभी शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) के अरविंद सावंत का कब्जा है।
देवड़ा हाल ही में जीते हैं राज्यसभा चुनाव
दिलचस्प बात ये है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री देवड़ा हाल ही में राज्यसभा का चुनाव जीते हैं, लेकिन उनका कहना है कि साऊथ मुंबई सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा वह पार्टी नेतृत्व के सामने भी जाहिर कर चुके हैं।
उनके मुताबिक, 'उम्मीदवारों पर फैसला महायुति के वरिष्ठ नेताओं को करना है, लेकिन जब मुझसे पूछा गया, तो चुनाव लड़ने में मैंने गहरी दिलचस्पी जताई थी। मुझे बताया गया है कि राज्यसभा के कई सांसद लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, इसलिए राज्यसभा, लोकसभा चुनाव लड़ने में कोई बाधा नहीं है।'
मैं पूरी तरह से तैयार हूं- मिलिंद देवड़ा
उनके मुताबिक भाजपा और सेना के नेताओं ने उन्हें बताया कि वे इस सीट पर चुनाव लड़ने और जीतने के लिए वे बेहतर हैं। उन्होंने कहा, 'मेरे समर्थक और मैं पूरी तरह से तैयार हूं और लड़ने के लिए सक्रिय हो गया हूं, ताकि साऊथ मुंबई जीतकर महायुति और पीएम मोदी का हाथ मजबूत करूं।'
मैं अपनी पार्टी के लिए काम कर रहा हूं-नार्वेकर
वहीं नार्वेकर का कहना है, 'मैं अपनी पार्टी के लिए काम कर रहा हूं, बीजेपी और एनडीए के लिए। इसलिए, महायुति से जिसे भी टिकट मिलेगा, मैं महायुति के उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करूंगा। मुझे पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी मैं लूंगा।'












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