मालेगांव बम ब्लाॅस्ट से बरी हुए लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को मिला प्रमोशन, क्या लगे थे आरोप?
Lieutenant Colonel Prasad Purohit: मालेगांव बम धमाका मामले में दोषमुक्त किए गए लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को अब कर्नल के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है। यह प्रमोशन उन्हें मामले से बरी होने के कुछ ही महीनों बाद मिला है।
याद रहे 2008 के इस मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित सहित सभी आरोपियों को 31 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने दोषमुक्त कर दिया था। इन आरोपियों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नेता साध्वी प्रज्ञा भी शामिल थीं।

क्या था मालेगांव केस?
29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास हुए बम विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह घटना देश के लिए एक बड़ा झटका थी और इसकी जांच में कई साल लगे।
किस आधार पर केस से बरी हुए थे कर्नल श्रीकांत पुरोहित?
विशेष एनआईए अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित के घर ए-9 से कोई भी आरडीएक्स, विस्फोटक सामग्री या बम बनाने से संबंधित संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई थी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अभियोजन पक्ष के पास इस संबंध में कोई ठोस सबूत नहीं था।
कोर्ट ने की थी बड़ी टिप्पणी
अपने फैसले में, अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि पुरोहित ने अपने घर में आरडीएक्स रखा था या बम को असेंबल किया था। अदालत ने अभियोजन पक्ष की कहानी को "पूरी तरह से संदेह और अनुमान पर आधारित" बताया, क्योंकि इसके पक्ष में कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किया गया था।
अदालत ने आगे कहा कि ठोस सबूत के बिना यह मान लेना कि कर्नल प्रसाद पुरोहित ने जम्मू-कश्मीर से आरडीएक्स लाकर अपने घर में छिपाया और बम बनाया, केवल एक अनुमान था। अभियोजन पक्ष की कहानी सबूतों के अभाव में टिकी नहीं रह पाई और वह कर्नल पर लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहा।
मालेगांव ब्लास्ट के पीड़ित छह परिवारों ने याचिका
हालांकि, एनआईए विशेष अदालत के इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। मालेगांव ब्लास्ट के पीड़ित छह परिवारों ने याचिका दायर कर विशेष अदालत के फैसले को रद्द करने की मांग की है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है।












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