पुणे: कोरोना से दम तोड़ती जिंदगी, बेबस अस्पताल, ICU बेड्स के लिए भी गंभीर मरीजों की वेटिंग लिस्ट
पुणे, 27 अप्रैल। भारत कोरोना वायरस के भयानक प्रकोप का सामना कर रहा है। महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में अब हालात बेकाबू हो चुके हैं। पुणे में स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि अस्पतालों में आईसीयू बेड्स फुल हो चुके हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बेबस दिखाई दे रही है। शहर के बड़े अस्पतालों में रोजाना कई मरीजों को भर्ती करने के लिए फोन आ रहे हैं जिन्हें इमरजेंसी मेडिकल सहायता की जरूरत है।

कोरोना के बढ़ते मामलों से इतना भार है कि कुछ बड़े अस्पतालों ने आईसीयू में कम से कम 10 गंभीर रोगियों के प्रवेश को दैनिक रूप से मना कर दिया है। बताया जा रहा है कि अस्पताल के अधिकारियों के पास गंभीर मरीजों की लंबी वेटिंग लिस्ट है। पुणे के भारती अस्पताल में 75 आईसीयू बेड हैं। अस्पताल में गंभीर रोगी वाले 58 मरीज वेंटिलेशन पर हैं। अस्पताल प्रशासन ने कहा, हम रोजाना कम से कम 10 नए आईसीयू मरीजों को लेने से मना कर रहे हैं। 9 अप्रैल को पुणे में 7,000 नए मामले सामने आए।'
भारती अस्पताल में उप चिकित्सा निदेशक डॉ जितेंद्र ओसवाल ने कहा, 'कोरोना के कुछ मरीज एक सप्ताह के भीतर मध्यम या गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं। जब हम पहले से ही आईसीयू में भर्ती के लिए सक्षम नहीं हैं तो हम अन्य गंभीर रूप से बीमार रोगियों को कैसे स्वीकार करते हैं? ऐसी स्थिति में हम रोजना कम से कम आठ से 10 मौतें रोजाना देख रहे हैं।' कुछ ऐसी ही परिस्थिति नोबल अस्पताल की है जहां 55 आईसीयू बेड भरे हुए हैं।
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अस्पताल के कार्यकारी निदेशक डॉ एच के साले ने बताया कि उनके पास राजनेताओं, गैर सरकारी संगठनों और डॉक्टरों से प्रतिदिन कम से कम 50 फोन कॉल आते हैं। डॉ एच के साले ने कहा, 'छोटे अस्पतालों के डॉक्टर भी हमें बुलाते हैं, अपने गंभीर रोगियों के प्रवेश की मांग करते हैं। हम स्थिति का प्रबंधन करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन यह बेहद मुश्किल है। वेंटीलेटर खरीदे जा रहे हैं, लेकिन प्रत्येक की कीमत 12 लाख रुपए है।'












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