एकनाथ शिंदे सरकार के साथ क्रेडिट युद्ध और सीएम पद की चाहत, अजित पवार की इस पॉवर के पीछे क्‍या है माजरा?

Maharashtra News: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राज्‍य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार अपनी लोकप्रियता बढ़ाने में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पद की आकांक्षा रखने वाले वरिष्ठ नेता के रूप में मजबूत करने के लिए बड़े भाई के रूप में अपनी छवि को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

हाल ही में उनके कुछ वीडियो और रील सोशल मीडिया पर शेयर किए गए है जिसमें वो महाराष्‍ट्र सरकार की लाडली बहना योजना का प्रचार करते नजर आ रहे है। बजट सत्र में इस योजना की घोषणा करने के बाद से अजित पवार हर मौके पर इस योजना को शुरू करने को खुद को क्रेडिट देते नजर आ रहे हैं। मानो ये योजना महाराष्‍ट्र की शिंदे सरकार नहीं उन्‍होंने स्‍वयं ये योजना शुरू की है।

ajit pawar

जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी लाडली बहना योजना के जरिए अपनी सरकार का जमकर प्रचार कर रहे है और इसे मुख्यमंत्री लड़की बहन योजना का नाम दे रहे हैं। इससे पवार और शिंदे के बीच सत्ता की होड़ शुरू हो गई है, अजित पवार और शिंदे जैसे नेता सत्ता और प्रभाव के लिए पैंतरेबाजी कर रहे हैं।

विधानसभा चुनाव से पहले अजित पवार के इस प्रयासों को राज्य में खुद को एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। अजीत पवार अब अपने समकक्षों के मुकाबले खुद को मजबूत बनाने और अपने लिए सभी रास्ते खुले रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

महाराष्‍ट्र के आगामी चुनाव में अगर महायुति गठबंधन को जीत हासिल होती है तो अनुमान लगाया जा रहा है कि भाजपा को अधिकांश सीटें मिलेंगी। इस स्थिति में शिंदे शहरी निर्वाचन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रहे हैं। इस बीच, पुणे, सोलापुर और अहमदनगर जैसे क्षेत्रों में पवार का प्रभाव कम हो गया है, जिससे उनकी मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा में पांच साल की देरी हो सकती है।

गठबंधनों के भीतर चुनौतियां

अगर प्रतिद्वंद्वी महा विकास अघाड़ी गठबंधन विजयी होता है, तो पवार को अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए और भी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रति उनकी पार्टी की प्रतिबद्धता के बावजूद, महायुति के नेताओं में अजित पवार के इरादों को लेकर चिंता है। उन्हें संदेह है कि शायद वह अपने लिए सभी विकल्प खुले रख रहे हैं।

गौरतलब है कि अजित पवार ने जूनियर सहयोगियों की वजह से अपनी निराशा को खुलकर व्यक्त किया है और मुख्यमंत्री बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को स्पष्ट किया है। हालांकि, कुछ लोगों का मानना ​​है कि उनकी कथित अति-महत्वाकांक्षा और आत्म-केंद्रितता उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को बाधित कर सकती है।

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