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BMC Election 2026: बीएमसी चुनाव संपन्‍न, जानें कितने फीसदी हुई वोटिंग, कौन बनेगा मुंबई का किंग?

BMC Election 2026: महाराष्ट्र में 15 जनवरी, 2026 को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित राज्य के 29 नगर निगमों के लिए मतदान हुआ। मुंबई में चार साल के इंतजार के बाद मतदाताओं ने अपने नगरसेवकों को चुनने के लिए वोट डाले। इस चुनाव को मुंबई की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 5:30 बजे तक चला। दिन भर में कई प्रमुख नेताओं और बॉलीवुड हस्तियों ने मतदान किया और नागरिकों से भी अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की। शुरुआती घंटों में मतदान प्रतिशत धीमा रहा, लेकिन बाद में इसमें तेज़ी देखी गई।

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मुंबई में कितने फीसदी हुआ मतदान?

15 जनवरी, 2026 को दोपहर 3:30 बजे तक 41.08 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 29 नगर निगमों में 893 वार्डों में 2,869 सीटों के लिए 15,908 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करने के लिए कुल 3.48 करोड़ मतदाता पात्र थे।

मुंबई का कौन बनेगा किंग?

भारत की सबसे धनी मुंबई महानगरपालिका के लिए भी चुनाव संपन्‍न हो चुका है। शिवसेना जो वर्षो से मुंबई बीएमसी पर कब्जा जमाए बैठी हैं उसके विभाजन के बाद ये पहला चुनाव है। शिवसेना के दाेनों गुट इस चुनाव मैदान में आमने-सामने हैं। इस बार के चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की MNS साथ चुनाव लड़ा है वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना भाजपा के साथ महायुति गठबंधन में चुनाव लड़ा है। 16 जनवरी को वोटों को गिनती के बाद ये साफ हो जाएगा कि अगले पांच साल तक मुंबई का किंग कौन ठाकरे ब्रदर्स या भाजपा-शिवसेना की महायुति।

मुंबई नगर निगम चुनाव के एग्जिट पोल से साफ पता चलता है कि मराठी भाषी मतदाताओं को बीजेपी से ज्यादा वोट शिवसेना और उद्धव ठाकरे से मिल रहे हैं। इस बीच, हिंदी भाषी मतदाता भाजपा की ओर झुकते दिख रहे हैं। इसके अलावा, मुंबई में मुसलमानों ने भी भाजपा को वोट दिया। कांग्रेस के पास सबसे बड़ा मुस्लिम समर्थन आधार है।

बीएमसी चुनाव क्‍यों कहलाता है मिनी विधानसभा इलेक्‍टशन?

देश की आर्थिक राजधानी होने के नाते, मुंबई नगर निगम का वार्षिक बजट कई छोटे भारतीय राज्यों के बराबर है। इसलिए, बीएमसी में सत्ता पर नियंत्रण का राज्य की राजनीति पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे यह चुनाव बेहद अहम बन जाता है। ये ही वजह है कि बीएमसी पर कब्जा जमाने के लिए सभी पार्टियों ने अपना पूरा जोर लगा दिया है।

मतदान के दिन उद्धव ठाकरे ने लगाए गंभीर आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मतदान प्रक्रिया में कई खामियां बताईं। उन्होंने शिकायत की, "कई जगहों से शिकायतें आ रही हैं। कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब हैं। पहली बार ऐसा हो रहा है कि लगाई गई स्याही को हटाया जा सकता है।"चुनाव प्रक्रिया के दौरान स्याही को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

स्याही को लेकर हुआ बड़ा विवाद

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें मतदाताओं, नेताओं और मीडियाकर्मियों को एसीटोन का उपयोग करके अपनी उंगलियों पर लगी "पक्की स्याही" को मिटाते हुए देखा गया। एसीटोन का इस्तेमाल आमतौर पर नेल पॉलिश हटाने के लिए होता है।

निर्वाचन आयुक्‍त ने आरोपों पर दिया करारा जवाब

महाराष्ट्र के राज्य निर्वाचन आयुक्त (एसईसी) दिनेश वाघमारे ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'कोरेस कंपनी' की मार्कर स्याही 2011 से उपयोग की जा रही है और इसकी रासायनिक संरचना सही है। उन्होंने लोगों से कहा कि पक्की स्याही को सूखने में समय लगता है और इसे मिटाना नहीं चाहिए। वाघमारे ने झूठ फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी इस स्याही विवाद पर चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया। दादर में मतदान करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि सरकार चुनाव जीतने के लिए प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है और स्याही को सैनिटाइजर से आसानी से मिटाया जा सकता है।

राज ठाकरे के आरोपों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके भी मतदान के निशान को मिटाया जा सकता था। फडणवीस ने चुनाव आयोग से मामले की विस्तृत जांच और बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया, साथ ही हर बात पर हंगामा उठाने को गलत बताया।

शिवसेना (उद्धव गुट) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी स्याही विवाद पर चिंता जताई और चुनाव में गड़बड़ी व पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उम्मीदवारों को पैसे ऑफर किए जा रहे हैं और कई कैंडिडेट्स को आवेदन वापस लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है, जिससे लोकतंत्र की आवाज दबाई जा रही है।

उद्धव ठाकरे ने "शाम, दाम और दंड" के हथकंडों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए चुनाव को तत्काल निलंबित करने की मांग की। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के 'वन नेशन, वन इलेक्शन' एजेंडे से भी जोड़ा और चुनाव आयुक्त से अपने कार्यों की जानकारी वेबसाइट पर साझा करने तथा उनके वेतन पर प्रतिबंध लागू करने की भी मांग की। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्याही विवाद को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।

मतदान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में खराबी की कई शिकायतें भी आईं। दादर के बालमोहन विद्या मंदिर मतदान केंद्र पर विशाखा राउत के सामने वाला बटन काम न करने से करीब 20 मिनट के लिए मतदान रुका रहा। वहीं, लालबाग के चिवड़ा गली मतदान केंद्र और बांद्रा के माउंट मेरी स्कूल में भी ईवीएम मशीनें अस्थाई रूप से बंद हो गईं, जिसके चलते लालबाग में मतदान का समय बढ़ाना पड़ा। नासिक में एक ईवीएम मशीन दो घंटे तक बंद रही।

नागपुर में नगर निगम चुनाव से पहले हिंसा का भी मामला सामने आया। भाजपा के वार्ड 11 के उम्मीदवार भूषण शिंगणे गोरेवाड़ा इलाके में झड़प में घायल हो गए, जब उन्हें असामाजिक तत्वों द्वारा चुनाव में गड़बड़ी और पैसे बांटने की खबरें मिली थीं। इस मामले में कांग्रेस उम्मीदवार मंजू चाचेकर के पति गणेश चाचेकर और अन्य के खिलाफ आपराधिक धमकी, दंगा और हत्या के प्रयास के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है।

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