मुंबई ब्लास्ट केस में सभी आरोपी बरी, शिवसेना MP मिलिंद देवड़ा बोले- 'मुंबईकर के तौर पर यह फैसला स्वीकार नहीं'
2006 Mumbai Train Blasts: 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सभी 12 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने कड़ी आपत्ति जताई है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक मुंबईकर और उस समय के सांसद होने के नाते वह इस फैसले को स्वीकार नहीं कर सकते।
मिलिंद देवड़ा ने कहा कि "2006 में जब यह आतंकी हमला हुआ था, तब मैं खुद मुंबई से सांसद था। मैंने अपनी आंखों से वह तबाही देखी थी। आज जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है, तो यह फैसला मेरे लिए और लाखों मुंबईकरों के लिए बेहद पीड़ादायक है।"

महाराष्ट्र सरकार से की अपील
देवड़ा ने महाराष्ट्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले को हल्के में नहीं लेना चाहिए और देश के सबसे बेहतरीन वकीलों को इस केस में शामिल करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार को हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ शीघ्रता से सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी चाहिए।
उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि "मैं महाराष्ट्र सरकार से अपील करता हूं कि वे देश के सबसे योग्य कानूनी विशेषज्ञों को इस केस में शामिल करें और जल्द से जल्द बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करें,"।
पीड़ितों की आवाज को उठाने की कोशिश
देवड़ा की प्रतिक्रिया उन सैकड़ों पीड़ितों और उनके परिवारों की पीड़ा को आवाज़ देने के रूप में देखी जा रही है, जो पिछले 18 सालों से न्याय का इंतज़ार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कानूनी मामला नहीं है, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति और न्याय प्रणाली की साख से जुड़ा हुआ मामला है।
उन्होंने कहा कि "यह फैसला सिर्फ एक अदालत का फैसला नहीं है, यह उन सभी के लिए गहरी चोट है जिन्होंने अपनों को खोया और 18 साल से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे।"
मुंबई ट्रेन ब्लास्ट क्या था मामला?
11 जुलाई 2006 को मुंबई की भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेनों में लगातार 7 बम धमाके हुए थे। यह बम धमाके पीक आवर्स में हुए जब हजारों की संख्या में लोग ट्रेनों में सफर कर रहे थे। इस भीषण आतंकी हमले में 189 लोगों की मौत हुई थी और 800 से अधिक घायल हुए थे। यह घटना मुंबई के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक मानी जाती है।
महाराष्ट्र ATS और अन्य एजेंसियों ने इस मामले में जांच करते हुए कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक आरोपी बाद में फरार घोषित हुआ। 2015 में विशेष मकोका कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिन पर आतंकवादी गतिविधियों, साजिश रचने और हत्या के आरोप सिद्ध हुए थे।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्यों किया सभी को बरी?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत द्वारा दोष सिद्ध करने के लिए जिन साक्ष्यों पर भरोसा किया गया था, वे "विश्वसनीयता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते"। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई गवाहों की गवाही में स्पष्ट अंतर, अपर्याप्त फॉरेंसिक साक्ष्य, और गंभीर प्रक्रिया संबंधी गलतियां इस मुकदमे को संदेह के घेरे में ले आती हैं।
जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस एन.जे. जमादार की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष "संदेह से परे" दोष सिद्ध करने में असफल रहा है। कोर्ट ने माना कि आरोपी को दोषी ठहराने के लिए जिस प्रकार के ठोस साक्ष्य की आवश्यकता होती है, वह इस मामले में प्रस्तुत नहीं किया गया।
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