MP Election 2023: भाजपा और कांग्रेस के लिए MP विधानसभा चुनाव में आदिवासी वोट बैंक इतना महत्वपूर्ण क्यों
Madhya Pradesh Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही समय शेष रह गया हैं। भाजपा सत्ता में बरकरार रहने के लिए लगातार आदिवासी और महिला वोट बैंक पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं कांग्रेस भी सत्ता पानी के लिए कोशिश में लगी हुई है। दोनों के लिए उम्मीदों का सूरज आदिवासी क्षेत्रों से ही उदित होना है। यानी प्रदेश में आदिवासी वोट बैंक जिसके साथ चल देगा सत्ता के दरवाजे उसी के लिए खुल जाएंगे।
प्रदेश में आधी आबादी यानी महिला और आदिवासियों को साधने के लिए दोनों दल अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर चुके हैं। इसका असर इन दिनों प्रदेश की राजनीति और चुनावी तैयारियों पर भी भरपूर देखा जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों आदिवासी समुदाय को अपने साथ जोड़ने की जबरदस्त कवायद कर रही है।

सीधी में पेशाब कांड के बाद से प्रदेश भर में कांग्रेस इसे आदिवासियों पर इसे अत्याचार बता कर प्रचार कर रही है, वही भाजपा इस घटना में आरोपियों पर ताबड़तोड़ कार्यवाही करने के बाद अपने आपको आदिवासी हितेषी बताने लगी हुई है। ऐसे में आदिवासी वर्ग बड़ा दुविधा में पड़ गया है कि वह किसे अपना समझे। आदिवासी नेताओं की माने तो आदिवासी वर्ग प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों को छोड़कर किसी अन्य के साथ भी जा सकता है।
मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के लिए आदिवासी वोट बैंक कितना महत्वपूर्ण
मध्यप्रदेश में आदिवासी वर्ग की भूमिका सरकार बनाने और बिगाड़ने में महत्वपूर्ण रही है। प्रदेश में 2018 में जब 15 साल बाद आदिवासी वोट बैंक ने करवट ली तो भाजपा की शिवराज सरकार चली गई। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा आदिवासी 47 आरक्षित सीटों में से सिर्फ 16 जीत पाई थी, जिसके चलते बीजेपी की सत्ता से आउट हो गई। इधर कांग्रेस के पास 2013 में 15 आदिवासी सीटें थी जो 2018 में बढ़कर 30 हो गई अब दोनों ही पार्टी आदिवासियों को अपनी ओर खींचने में लगी हुई है।
इस साल राहुल गांधी भी आदिवासी क्षेत्र से करेंगे चुनाव प्रचार की शुरुआत
2018 के विधानसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी ने शहडोल का दौरा किया था। नहीं आप राहुल गांधी भी उसी जिले के ब्यौहारी में जनसभा को संबोधित कर चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे। ऐसे में माना जा सकता है कि कांग्रेस आदिवासी वोट बैंक को लेकर कितनी चिंतित है।
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर आदिवासियों को लेकर लगाए थे आरोप
बता दे पीएम मोदी ने भाषण में आदिवासी वर्ग के लिए भाजपा सरकारों द्वारा किए जा रहे कार्यों को तो गिनाया ही इस समुदाय के विकास से दूर रखने के आरोप भी कांग्रेस पर लगाए। मोदी जब आदिवासी वर्ग के साथ जुड़ते हैं तो यह बताना नहीं भूलते हैं कि देश की आजादी में आदिवासी वर्ग के महानायक को को कांग्रेस की सरकार ने विस्मृत करने का पाप किया है। अब भाजपा जनजातीय नायकों के शौर्य और बलिदान की स्मृतियों को देश के गौरव के रूप में पुनर्स्थापना कर रही है।
पीएम मोदी ने व्यक्तिगत रूप से आदिवासियों से की थी चर्चा
हाल ही में शहडोल में पीएम मोदी ने आदिवासी समुदाय के लोगों से मुलाकात की और व्यक्तिगत रूप से चर्चा भी की उनके साथ भोजन किया और उनकी कला को करीब से देखा उनके दौरे का पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी आदिवासी समुदाय पर निश्चित रूप से खासा प्रभाव पड़ा होगा। इसके पहले भी मोदी ने मध्य प्रदेश से ही जनजाति गौरव दिवस की शुरुआत की थी और देश के पहले विश्व स्तरीय सुविधाओं वाले रेलवे स्टेशन हबीबगंज को गौंड रानी कमलापति के नाम पर किया था। इसके अलावा जनजाति नायकों के सम्मान के क्रम में ही स्वतंत्रता सेनानी मामा टंटेया भील की स्मृतियों को संजोकर नामकरण किए हैं।
आदिवासियों को निभाने के लिए कांग्रेस भी लगा रही है एड़ी चोटी का जोर
उधर कांग्रेस की चुनावी रणनीति कार्बी आदिवासी समुदाय को अपनी तरफ खींचने के लिए काम कर रहे हैं। कांग्रेस विपक्ष के तौर पर जहां आदिवासी वर्ग के मुद्दे उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है वही योजनाओं को जाति-वर्ग में बांटने के बजाय सभी के लिए घोषित करते हुए आदिवासी वर्ग को भी साथ जोड़ रही है। पिछले दो दशकों में कांग्रेस प्रदेश में महज 15 महीने सत्ता रह पाई। इसलिए उसके पास दावे करने के लिए तथ्य भले ही कम हो, लेकिन वह आदिवासी वर्ग के सम्मान और स्वाभिमान का सवाल लगातार उठा रही है। सीधी पेशाब कांड को कांग्रेस ने आदिवासी वर्ग के अपमान का मुद्दा बनाकर आदिवासी स्वाभिमान रैली भी निकाली थी।












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