MP News: मंत्री विजय शाह की बढ़ेंगी मुश्किलें, 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में पेश होगी SIT की स्टेटस रिपोर्ट
MP News: मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्यमंत्री विजय शाह की मुश्किलें कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के बाद बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले में अपनी जांच तेज कर दी है और 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करने वाली है।
इस बीच, SIT ने मंत्री शाह से पूछताछ पूरी कर ली है, और अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। आइए, जानते हैं कि इस मामले में अब तक क्या हुआ और आगे क्या हो सकता है।

विजय शाह का विवादित बयान: क्या था मामला?
मामला 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक हलमा कार्यक्रम से शुरू हुआ। इस दौरान मंत्री विजय शाह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के संदर्भ में कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक और सांप्रदायिक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, "उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा। अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा, कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।"
यह बयान कर्नल सोफिया कुरैशी को निशाना बनाते हुए था, जो भारतीय सेना की एक वरिष्ठ अधिकारी हैं और 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय वायुसेना की ओर से जानकारी दे रही थीं। उनके साथ विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश विभाग के सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद थे। शाह का यह बयान न केवल सांप्रदायिक माना गया, बल्कि इसने सेना की गरिमा और एक महिला अधिकारी के सम्मान को भी ठेस पहुंचाई।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए 14 मई 2025 को शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने शाह के बयान को "गटर की भाषा" और "खतरनाक" करार दिया, जिसका मकसद न केवल कर्नल कुरैशी को निशाना बनाना था, बल्कि भारतीय सेना की छवि को भी धूमिल करना था। कोर्ट ने कहा कि यह बयान धार्मिक आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देता है और राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा है। हाई कोर्ट ने इसे आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेम्प्ट) माना और मध्य प्रदेश पुलिस को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196(1)(b), और 197(1)(c) के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार और SIT का गठन
शाह ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 19 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की और शाह की माफी को "नाटकीय" और "मगरमच्छ के आंसू" जैसा बताते हुए खारिज कर दिया। जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कहा, "आपके जैसे क्रास (अशोभनीय) कमेंट्स पूरी तरह से विचारहीन हैं... आपकी माफी में कोई ईमानदारी नहीं है।" कोर्ट ने यह भी कहा कि शाह का बयान पूरे देश को शर्मसार करने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों की एक SIT गठित करने का आदेश दिया, जिसमें एक महिला अधिकारी शामिल होनी थी। SIT में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस प्रमोद वर्मा, डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल कल्याण चक्रवर्ती, और सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस वाहिनी सिंह शामिल हैं। कोर्ट ने SIT को 28 मई 2025 तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था, जिसे बाद में बढ़ाकर 28 जुलाई 2025 कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने शाह की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी, लेकिन शर्त रखी कि उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चल रही समानांतर कार्यवाही बंद की जाए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है।
SIT की जांच: अब तक क्या हुआ?
SIT ने अपनी जांच शुरू कर दी है और कई कदम उठाए हैं:
शाह से पूछताछ: 19 जुलाई 2025 को SIT ने जबलपुर में विजय शाह से लगभग 25 मिनट तक पूछताछ की। इस दौरान 8-10 सवाल पूछे गए, जो मुख्य रूप से रायकुंडा गांव के हलमा कार्यक्रम में उनके बयान और घटनाक्रम से संबंधित थे।
वीडियो की जांच: SIT ने शाह के बयान का वीडियो फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। वीडियो की जांच रिपोर्ट के तथ्यों को SIT अपनी स्टेटस रिपोर्ट में शामिल करेगी।
गवाहों के बयान: SIT ने सात गवाहों के बयान दर्ज किए हैं और घटनास्थल का दौरा भी किया है। शाह के मोबाइल फोन को जब्त किया गया है और उनके बयान की ट्रांसक्रिप्ट तैयार की गई है।
अन्य सबूत: SIT ने FIR, हाई कोर्ट के आदेश, और उपलब्ध डिजिटल व प्रिंट मीडिया साक्ष्यों की जांच की है। सभी प्रमुख गवाहों के बयानों को रिकॉर्ड किया जा रहा है और उनकी क्रॉस-एग्जामिनेशन की जाएगी।
SIT ने सुप्रीम कोर्ट से जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है, और अब 28 जुलाई 2025 को स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाएगी।
कांग्रेस की मांग: शाह को मंत्री पद से हटाया जाए
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता डॉ. जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर विजय शाह को उनके मंत्रिपद से हटाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि शाह का बयान न केवल सांप्रदायिक और भड़काऊ है, बल्कि यह उनके संवैधानिक शपथ का उल्लंघन भी करता है। याचिका में तर्क दिया गया है कि शाह ने कर्नल कुरैशी को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया, जिससे राष्ट्रीय एकता को खतरा है।
कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा, "बीजेपी सरकार मई से शाह को बचा रही है। पुलिस ने 14 दिन तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की, और SIT ने दो महीने तक उनका बयान दर्ज नहीं किया। अब वह मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है?"
बीजेपी का रुख
बीजेपी प्रवक्ता दुर्गेश केशवानी ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। शाह ने अपने बयान के लिए सार्वजनिक माफी मांगी थी, जिसमें उन्होंने कर्नल कुरैशी को "राष्ट्र की बहन" कहा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया।
आगे क्या हो सकता है?
28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में SIT की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में अगला कदम तय होगा। संभावित परिदृश्य इस प्रकार हो सकते हैं:
SIT की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई: यदि SIT की रिपोर्ट में शाह के खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा सकता है या उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दे सकता है।
मामले की सुनवाई आगे बढ़ना: यदि SIT को और समय चाहिए, तो कोर्ट जांच की समयसीमा बढ़ा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने पहले ही इस मामले में सख्त रुख अपनाया है, इसलिए वह जांच को जल्द पूरा करने का दबाव बनाए रखेगा।
जया ठाकुर की याचिका पर सुनवाई: कांग्रेस नेता की याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट विचार कर सकता है। यदि कोर्ट इस याचिका को स्वीकार करता है, तो शाह को मंत्रिपद से हटाने का आदेश दिया जा सकता है।
राजनीतिक प्रभाव: इस मामले का मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। बीजेपी को दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अपनी छवि को लेकर सावधानी बरतनी होगी, जबकि कांग्रेस इस मुद्दे को और उछाल सकती है।
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