कौन हैं वैशाली सिंह जिन पर पूरे मध्य प्रदेश को हो रहा गर्व? अब फीबा एशिया कप पर नजर

रीवा, 23 मई। मध्य प्रदेश के छोटे से गांव की बेटी ने कामयाबी की बड़ी छलांग लगाई है। नाम है वैशाली सिंह। रीवा जिले के बरौली ठकुरान डगडैया गांव की रहने वाली है। वैशाली का नेशनल बास्केटबॉल कैम्प के लिए चयन हुआ है। यहीं से फीबा एशिया कप के लिए टीम में जगह बनाने की राह आसान होगी।

नेशनल बॉस्केटबाल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन

नेशनल बॉस्केटबाल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन

बता दें कि हाल ही चेन्नई में नेशनल बॉस्केटबाल प्रतियोगिता हुई, जिसमें एमपी महिला बास्केटबॉल टीम की ओर से रीवा की वैशाली सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया। यही वजह है कि अब वैशाली को नेशनल बास्केटबॉल कैम्प में जगह मिली है। ऐसा करने वाली वैशाली मध्य प्रदेश की इकलौती बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं। अब वैशाली सिंह फीबा एशिया कप पर है। 24 मई से 24 जून तक बैंगलुरू में लगाए जाने वाले कैंप में प्रशिक्षण लेंगी। इसी के प्रदर्शन के आधार वैशाली का चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली फीबा एशिया कप प्रतियोगिता के लिए हो सकता है।

 जब पेरिस में बढ़ाया मान

जब पेरिस में बढ़ाया मान

मध्य प्रदेश के छोटे से गांव बरौली ठकुरान डगडैया निवासी वैशाली सिंह ने पूर्व में भी कई उपलब्धियां हासिल कर प्रदेश सहित देश का मान बढ़ाया था। वैशाली सिंह ने मात्र 17 वर्ष की आयु में ही वर्ष 2017 जुलाई में पेरिस में हुए अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन कर सिल्वर मेडल हासिल किया था। इसके बाद वह स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया रायपुर के लिए चयनित हुईं। तब से वह लगातार रायपुर स्थित कैम्प में ट्रेनिंग ले रही हैं।

मुम्बई में अकादमी खोलने का सपना

मुम्बई में अकादमी खोलने का सपना

वैशाली सिंह भारत का नाम इंटरनेशनल लेवल पर रोशन करने की ख्वाहिश रखने के साथ-साथ दूसरे खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ाना चाहती है। वन इंडिया हिंदी से बातचीत में बताया कि वे भविष्य की कई योजनाओं पर काम कर रही है। मुंबई में खुद की अकादमी खोलना चाहती हैं, ताकि महिला खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे सकें।

दादा से सीखी खेली की बारीकी

दादा से सीखी खेली की बारीकी

बता दें कि वैशाली के पिता रावेन्द्र बहादुर सिंह पेशे से किसान हैं। वहीं, दादा ददन सिंह शिक्षक होने के साथ ही वॉलीबाल के खिलाड़ी थे। वैशाली बचपन मे अक्सर अपने दादा से खेल के किस्से सुना करती थी। वैशाली खेल के प्रति अपने दादा से प्रभावित हुई और आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह बास्केटबॉल की खिलाड़ी बन गई।

महिलाओं को दिया खास संदेश

महिलाओं को दिया खास संदेश

वैशाली ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने दादा ददन सिंह, पिता रावेन्द्र बहादुर सिंह और अपने कोच के. राजेश्वर राय को दिया है। वैशाली ने खेल में रुचि रखने वाली अन्य महिला खिलाड़ियों को अपना संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स के क्षेत्र में लड़कियों के लिए अच्छे अवसर हैं और वह अपने कैरियर का एक रास्ता यहां भी चुन सकती हैं।

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