Sagar News: केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की समरसता, भोजन कराया, फिर खुद ही उठाने लगे जूठी पत्तलें
केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल ने समाज में छुआछूत जैसी प्रथाओं को जड़ से समाप्त करने के लिए बुंदेलखंड से सकारात्मक पहल करते हुए समरसता भोज आयोजित किया और भोजन के बाद मंत्री पटेल ने खुद ही लोगों की जूठी पतल उठाईं।

MP मोदी केमंत्रिमंडल के एक केंद्रीय मंत्री ने बाबा साहेब डाॅ, भीमराव अंबेडकर की जयंती से ठीक पहले समाज को समरसता का संदेश देते हुए सराहनीय पहल की है। दरअसल केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल ने बुंदेलखंड में बंडा विधानसभा के रूरावन गांव में समरसता भोजन का आयोजन कर गरीबों-दलितों को भोजन कराया, उनकी जूठी पत्तलें खुद अपने हाथ से उठाईं और बाद में आम लोगों के साथ बैठकर भोजन भी किया।

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मध्य प्रदेश में दमोह लोकसभा सीट से केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल सांसद हैं। उनकी लोकसभा के अधीन बंडा तहसील के रूरावन गांव में बुधवार को महोत्सव जैसा माहौल था। यहां मंत्री, संतरी, अधिकारी, नेता, पदाधिकारी सब एक साथ बैठे, बतियाते और भोजन करते नजर आ रहे थे। यहां पर मंत्री पटेल के नेतृत्व में समाज से छुआछूत को खत्म करने के लिए एक अनूठी और नई शुरूआत की गई। समाज के सभी वर्गों के मंत्री पटेल ने भोजन कराया, एक छत के सभी एक साथ मिलकर भोजन करते नजर आए तो बाद में जूठी पत्तलें खुद मंत्री पटेल ने अपने हाथों से उठाकर समाज को संदेश दिया समाज में कोई छोटा-बड़ा या ऊंचचीन नहीं होता है।
समरसता कुटम्ब भी बना रहे हैं
मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि वे अपने लोकसभा क्षेत्र दमोह में सामाजिकता समरसता कुटुम्ब बना रहे हैं। इसमें समाज के जो सक्षम और सवर्ण वर्ग के लोग हैं, वे अपने आसपास गरीब और दलित वर्ग के परिवार को अपने परिवार में शामिल करेंगे। ऐसे परिवारों को सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने, बच्चों की पढ़ाई, कुटीर से लेकर अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने में आगे आकर मदद करेंगे। इससे वंचित वर्ग समाज की मुख्यधारा में शामिल होगा। उन्होंने बताया कि हमने ऐसे 1 हजार परिवारों को चिन्हित किया है, जिन्हें पहले चरण में समरसता कुटुंब में शामिल किया जाएगा।
समरसता कोई नारा नहीं बल्कि एक विचार और व्यवहार है
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि मेरा मानना है कि समरसता कोई नारा नहीं है, बल्कि एक विचार और व्यवहार है, जो हमारी दैनिक जिंदगी का हिस्सा होना चाहिए। छुआछूत की भावना एक गहरी समाजिक और मानसिक बीमारी है, इससे हमें बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि रूरावन में हमारे अनूसूचित जाति-जनजाति के भाईयों के साथ सहभोज के साथ जूठी पत्तलें उठाकर सेवाकार्य करने का मौका मिला। इस माक्े पर समाज के माते-मुखिया व अन्य लोगों का सम्मान भी किया गया।
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