MP News: जातिगत जनगणना से मिलेगा आदिवासी वर्ग को पूरा अधिकार और हिस्सेदारी- जीतू पटवारी
MP News: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के सभागार में आयोजित आदिवासी कांग्रेस विभाग द्वारा आयोजित आदिवासी लीडरशिप डेवलपमेंट प्रशिक्षण शिविर और साक्षात्कार बैठक को संबोधित करते हुए आदिवासी वर्ग के अधिकारों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए आदिवासी वर्ग के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उन्हें अपने संबोधन से प्रेरित किया।

आदिवासी वर्ग का महत्व और योगदान
जीतू पटवारी ने कहा कि आदिवासी इस देश के असली मालिक हैं और जल, जंगल, और जमीन पर उनका सबसे पहला अधिकार है। उन्होंने आदिवासी समाज के महापुरुषों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा, टंट्या भील, रघुनाथ शाह, शंकर शाह, और वीरांगना रानी दुर्गावती जैसे महान नेताओं ने न केवल देश की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया बल्कि आदिवासी समाज की रक्षा और सम्मान को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाई।
पटवारी ने जोर देते हुए कहा कि आदिवासी वर्ग के लिए जातिगत जनगणना जरूरी है, ताकि मध्यम और गरीब वर्ग को अपने अधिकार मिल सकें और आर्थिक, सामाजिक, और राजनीतिक समानता का अवसर प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी जी जातिगत जनगणना के पक्ष में हैं और इसे कांग्रेस पार्टी का समर्थन प्राप्त है, क्योंकि इससे आदिवासी वर्ग को उनके अधिकार मिलने की संभावना है।
आदिवासी वर्ग की समस्याएं
पटवारी ने आदिवासी वर्ग की कई समस्याओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आदिवासी वर्ग के लिए 1.5 लाख से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती नहीं हो पाई है। इसके साथ ही उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार और इसके नुमाइंदों पर आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी जमीनों पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। पटवारी ने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय को बांध और सेंचुरी के नाम पर उनकी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है।

इसके अलावा, उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार के तहत आदिवासियों पर अत्याचार और अनाचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पटवारी ने कहा कि आदिवासी महिलाओं का गायब होना एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, और सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़े इसका स्पष्ट प्रमाण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्तियों में भ्रष्टाचार किया जा रहा है, जबकि आदिवासी छात्रावास जर्जर अवस्था में हैं।
आदिवासी समाज की शिक्षा और स्वास्थ्य
पटवारी ने आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और शिक्षकों की कमी की समस्या को भी उठाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचलों में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है और शिक्षकों की भारी कमी है, जिसके कारण आदिवासी बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के मुद्दे को कांग्रेस पार्टी हमेशा अपनी प्राथमिकता बनाए रखेगी और उनके अधिकार प्राप्त करने के लिए संघर्ष करेगी। पटवारी ने जातिगत जनगणना को एक सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से आदिवासी समाज को समान अवसर मिलेंगे और उनके साथ होने वाले अन्याय को समाप्त किया जाएगा।
संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष की जरूरत
पटवारी ने आगे कहा, "हम सभी को संविधान को बचाने के लिए मिलकर संघर्ष करना होगा, ताकि संविधान की रक्षा हो सके और आदिवासी वर्ग का सम्मान बना रहे।" उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि आदिवासी वर्ग के जल, जंगल और जमीन पर उनके अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है, और आदिवासी समुदाय के साथ हो रहे अत्याचार को समाप्त करने के लिए संघर्ष जरूरी है।
आदिवासी लीडरशिप डेवलपमेंट प्रशिक्षण शिविर
आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में पटवारी ने बताया कि धार जिले के मोहनखेड़ा में 7 दिवसीय आदिवासी लीडरशिप डेवलपमेंट प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन के अधिकारों की रक्षा और उनके साथ होने वाले शोषण पर गंभीर चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस शिविर में सत्तारूढ़ दल भाजपा की नाकामियों और खोखले वादों पर भी बात की जाएगी, जिसमें झूठा पेसा एक्ट और आदिवासियों का विस्थापन जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे।
शिविर में शामिल होंगे देश और प्रदेश के वरिष्ठ नेता
पटवारी ने कहा कि इस आदिवासी लीडरशिप प्रशिक्षण शिविर का आयोजन आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर किया जा रहा है, और इसे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के मार्गदर्शन में आयोजित किया जाएगा।
इस शिविर में आदिवासी कांग्रेस कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जो आदिवासी समाज के अधिकारों और उनके शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए तैयार हैं। पटवारी ने अंत में यह भी कहा कि आदिवासी लीडरशिप को मजबूत करने के लिए इस तरह के प्रशिक्षण शिविर बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिससे आदिवासी समाज के नेतृत्व को और अधिक सशक्त किया जा सके।












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