'रील लाइफ' की कहानी बनी 'रियल', MP के इस शहर में दोहराई गई फिल्म 'धड़क' की घटना
शिवपुरी में प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत, बेटी ने घर से भागकर रचाई थी शादी, 2 साल बाद लड़की के परिजनों ने कर दी हत्या
Shivpuri में 'धड़क' फिल्म की तरह ही प्यार की एक दर्दनाक कहानी देखने को मिली है। यहां धड़क फिल्म के नायक-नायिका की तरह ही प्रेमी-प्रेमिका ने घर से भागकर शादी की। दोनों के बच्चा भी हो गया लेकिन लड़की के घर वालों ने शादी के 2 साल बाद अपने दामाद की बेरहमी से हत्या कर दी।

मछावली गांव में शुरू हुई थी प्रेम कहानी
मछावली गांव के रहने वाले धीरू जाटव को अपने ही गांव की रहने वाली छाया से प्रेम हो गया। छाया भी धीरु से बेइंतेहा मोहब्बत करने लगी। दोनों एक दूसरे पर जान छिड़कने लगे और गांव की गलियों में छुप-छप कर मिलने लगे। दोनों का प्यार परवान चढ़ा और दोनों ने साथ जीने और मरने की कसमें खाईं।

छाया के घर वालों ने जानकारी मिलने पर जताई नाराजगी
धीरू और छाया का प्रेम परवान चढ़ रहा था लेकिन इसकी भनक छाया के घरवालों को लग गई। अपनी बेटी का प्रेम-प्रसंग गांव के ही लड़के के साथ सुनकर छाया के घरवाले आग बबूला हो गए। उन्होंने पहले अपनी बेटी को समझाया और इसके बाद धीरु हिदायत दे दी कि वह उनकी बेटी से दूर ही रहें नहीं तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।

प्रेमी जोड़े ने घर से भागकर रचाई शादी
घरवालों ने भले ही दोनों के प्यार पर पहरा लगा दिया लेकिन धीरु और छाया एक साथ जीने और मरने की कसमें खा चुके थे इसलिए दोनों ने घर से भागने का फैसला किया और साल 2020 में धीरू और छाया घर से भागकर अहमदाबाद चले गए। यहां दोनो ने कोर्ट में शादी कर ली।

छाया ने दिया नन्ही परी को जन्म
धीरू अपनी पत्नी छाया के साथ अहमदाबाद में रहने लगा। यहीं धीरू ने कामकाज भी शुरू कर दिया। इस दौरान छाया मां बनी और उसने नन्ही परी को जन्म दिया। धीरु और छाया ने बड़े प्यार से अपनी बेटी का नाम नायरा रखा। धीरू इस दौरान अपने माता-पिता के संपर्क में रहा। धीरु के माता-पिता की धीरू और छाया से फोन पर बातचीत होने लगी।

दीपावली का त्योहार मनाने घर आ गया धीरु
धीरु और छाया को गांव से भागे हुए 2 साल बीत चुके थे। धीरु को अनुमान था कि छाया के परिवार वाले अब सब कुछ भूल चुके होंगे और उनका गुस्सा भी शांत हो गया होगा इसलिए धीरू इस बार की दीपावली मनाने के लिए अपनी पत्नी छाया और बेटी नायरा के साथ अपने गांव आया लेकिन पिता की समझाइश के बाद धीरु मछावली न आते हुए अपने गांव के नजदीक दूसरे गांव पारागढ़ अमोल पठा में ठहर गया। यहां धीरू के रिश्तेदार रहते हैं।

उधारी के पैसे वापस लेने मछावली गया था धीरु
धीरू ने अपनी पत्नी और बच्ची के साथ धूमधाम से गांव में दीपावली मनाई। इसके बाद धीरु के चचेरे भाई महेंद्र ने फोन लगाकर धीरु को मछावली गांव बुलाया। महेंद्र ने उससे कहा कि उसने धीरू से जो ₹5000 उधार लिए थे वह पैसे लौटाने हैं इसलिए वह मछावली गांव आ जाए और अपने पैसे वापस ले जाए।

बाइक पर सवार होकर धीरू पहुंच गया मछावली
धीरू अपनी उधारी के पैसे वापस लेने के लिए अपने रिश्तेदार बल्ली जाटव के साथ बाइक पर सवार होकर मछावली गांव पहुंच गया। धीरू पर छाया के परिवार वालों की नजर पड़ गई और छाया के परिवार वालों ने धीरु को घेर लिया। वो धीरु को अपने साथ पकड़कर एक झोपड़ी की तरफ ले गए।

बंदूक के बटों से की पिटाई और कुल्हाड़ी से काटा
2 साल भले ही बीत गए हो लेकिन छाया के परिवार वालों का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। छाया के परिवार वालों ने धीरू के हाथ बांध दिए और उसे जमीन पर पटक दिया। छाया के परिवार वालों ने धीरू पर बंदूक की बटों से हमला करना शुरू कर दिया और इसके बाद कुल्हाड़ी से धीरू को काट दिया। धीरू की गर्दन पर कुल्हाड़ी मारी जिससे धीरु की मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस
धीरू के हत्याकांड की जानकारी जैसे ही पुलिस को मिली तो पुलिस मौके पर पहुंच गई लेकिन तब तक सभी हमलावर अपना घर छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने फिलहाल आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके उनकी तलाश शुरू कर दी लेकिन इस घटना के बाद छाया बेसुध हो गई है। धीरू और छाया ने अपनी जिंदगी के कई सपने देखे थे लेकिन इस प्रेम कहानी का 'धड़क' फिल्म की तरह दर्दनाक अंत हो गया।












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