MP News: कौन है एमपी बोर्ड के 10वीं की परीक्षा में टॉप करने वाली प्रज्ञा? 100 प्रतिशत नंबर लाकर रचा इतिहास
MP Board 10th Result News: कोयले की खदानों और औद्योगिक चिमनियों के लिए मशहूर सिंगरौली की धरती ने एक ऐसी बेटी को जन्म दिया, जिसने अपनी मेहनत और लगन से पूरे मध्य प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। प्रज्ञा जायसवाल, एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी, ने मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) की 10वीं बोर्ड परीक्षा 2025 में 100% अंक हासिल कर इतिहास रच दिया। खास बात ये है कि प्रज्ञा ने बिना कोचिंग के 500 में से 500 अंक हासिल किए है।
यह पहली बार है जब किसी छात्र ने एमपी बोर्ड में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। 6 मई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रज्ञा को स्टेट टॉपर घोषित किया, और तब से सिंगरौली की गलियां उनकी तारीफों से गूंज रही हैं। आइए, डूबते हैं प्रज्ञा की इस प्रेरक कहानी में, जहां मेहनत, अनुशासन और सपनों ने एक छोटे शहर की बेटी को सितारा बना दिया!

MP Board 10th: कोयले की नगरी से चमका सितारा, कौन हैं प्रज्ञा जायसवाल?
सिंगरौली, जिसे मध्य प्रदेश का "ऊर्जा केंद्र" कहा जाता है, अपनी खदानों और पावर प्लांट्स के लिए जाना जाता है। लेकिन अब यह शहर प्रज्ञा जायसवाल के नाम से गूंज रहा है। सेंट जोसेफ इंग्लिश मीडियम स्कूल की 16 वर्षीय छात्रा प्रज्ञा एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं। उनके पिता, रमेश जायसवाल, एक निजी कंपनी में कर्मचारी हैं, और मां, रीता जायसवाल, गृहिणी हैं। प्रज्ञा का एक छोटा भाई भी है, जो 7वीं कक्षा में पढ़ता है।
प्रज्ञा की सादगी और मेहनत उनकी पहचान है। पड़ोसियों के मुताबिक, वह हमेशा किताबों में डूबी रहती थी और स्कूल में शिक्षकों की फेवरेट थी। स्कूल के प्रिंसिपल फादर जोसेफ थॉमस ने बताया, "प्रज्ञा की सबसे बड़ी खासियत उसकी जिज्ञासा थी। वह हर विषय को गहराई से समझना चाहती थी। चाहे गणित का जटिल सवाल हो या विज्ञान का कॉन्सेप्ट, वह बिना पूरी तरह समझे रुकती नहीं थी।"
MP Board 10th: 100% अंकों का करिश्मा, कैसे संभव हुआ?
6 मई 2025 को जब एमपी बोर्ड ने 10वीं के नतीजे घोषित किए, तो सिंगरौली में जश्न का माहौल बन गया। प्रज्ञा ने हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और संस्कृत-सभी विषयों में 100 में से 100 अंक हासिल किए। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि एमपी बोर्ड में सख्त मूल्यांकन नीतियों के कारण पूर्ण अंक हासिल करना लगभग असंभव माना जाता है। इस साल 9,53,777 छात्रों ने 10वीं की परीक्षा दी थी, और पास प्रतिशत 76.22% रहा, जो पिछले 15 सालों में सबसे ज्यादा है।
प्रज्ञा की इस उपलब्धि ने टॉपर्स की सूची में उन्हें अकेले शीर्ष पर पहुंचा दिया। दूसरे स्थान पर रीवा की रीता विश्वकर्मा (496 अंक) और तीसरे स्थान पर बालाघाट के अनुज पाल (494 अंक) रहे। टॉप 10 में 8 लड़कियों का दबदबा रहा, लेकिन प्रज्ञा की शत-प्रतिशत उपलब्धि ने सबको हैरान कर दिया।
मेहनत का मंत्र, प्रज्ञा की पढ़ाई की रणनीति
प्रज्ञा की सफलता कोई रातोंरात का चमत्कार नहीं, बल्कि सालों की मेहनत और अनुशासन का नतीजा है। एक स्थानीय पत्रकार को दिए इंटरव्यू में प्रज्ञा ने अपनी पढ़ाई की रणनीति साझा की, जो हर छात्र के लिए प्रेरणा है:
नियमित दिनचर्या: प्रज्ञा रोजाना सुबह 5 बजे उठकर 2 घंटे पढ़ाई करती थीं। स्कूल के बाद शाम को 4-5 घंटे और पढ़ाई करती थीं।
- स्वयं के नोट्स: हर विषय के लिए उन्होंने अपने नोट्स बनाए, जिनमें महत्वपूर्ण बिंदु, डायग्राम और फॉर्मूले शामिल थे। इससे रिवीजन में आसानी हुई।
- मॉक टेस्ट और प्रीवियस पेपर्स: प्रज्ञा हर हफ्ते स्कूल के मॉक टेस्ट देती थीं और पिछले 5 साल के बोर्ड प्रश्नपत्र हल करती थीं। इससे उन्हें पेपर का पैटर्न समझने में मदद मिली।
- डिजिटल डिटॉक्स: प्रज्ञा ने पूरे साल मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। उन्होंने कहा, "मोबाइल मेरे लिए सिर्फ शिक्षकों से जरूरी सवाल पूछने का जरिया था। मैंने मनोरंजन के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया।"
- छोटे लक्ष्य: प्रज्ञा हर दिन छोटे-छोटे लक्ष्य बनाती थीं, जैसे एक टॉपिक पूरा करना या 10 सवाल हल करना। इससे उनकी प्रोग्रेस ट्रैक होती थी।
प्रज्ञा ने बताया, "मैं गणित और विज्ञान को सबसे ज्यादा समय देती थी, क्योंकि ये मेरे फेवरेट सब्जेक्ट हैं। लेकिन मैंने किसी भी विषय को हल्के में नहीं लिया। मेरे शिक्षकों ने मुझे हर कदम पर गाइड किया।"
परिवार और स्कूल, Pragya Jaiswal की ताकत
प्रज्ञा की इस उपलब्धि में उनके परिवार और स्कूल का बहुत बड़ा योगदान है। उनके पिता रमेश जायसवाल ने बताया, "प्रज्ञा को पढ़ाई के लिए कभी दबाव नहीं डाला। हमने बस उसका हौसला बढ़ाया। वह रात-दिन मेहनत करती थी। उसकी इस जीत से हमारा सिर गर्व से ऊंचा हो गया।" उनकी मां रीता ने कहा, "वह घर का काम खत्म करने के बाद भी किताबें लेकर बैठ जाती थी। हमने उसका हर सपना पूरा करने की कोशिश की।"
सेंट जोसेफ स्कूल की पूरी फैकल्टी ने प्रज्ञा की तारीफों के पुल बांधे। गणित शिक्षक रमेश पटेल ने कहा, "प्रज्ञा की गणित में पकड़ गजब की थी। वह जटिल सवालों को भी आसानी से हल कर देती थी।" विज्ञान शिक्षक रीना शर्मा ने बताया, "प्रज्ञा के डायग्राम और जवाब इतने परफेक्ट थे कि उन्हें पूरे अंक देना मजबूरी थी। वह हर टेस्ट में टॉप करती थी।"
सिंगरौली में जश्न, "हमारी बेटी ने कर दिखाया!"
प्रज्ञा की इस उपलब्धि ने सिंगरौली में जश्न का माहौल बना दिया। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। पड़ोसी, रिश्तेदार, स्कूल के शिक्षक और स्थानीय नेता सभी प्रज्ञा को शुभकामनाएं देने पहुंचे। सिंगरौली के जिला कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने प्रज्ञा को सम्मानित करने की घोषणा की और कहा, "प्रज्ञा ने सिंगरौली को देशभर में मशहूर कर दिया। वह हमारी बेटियों के लिए रोल मॉडल हैं।"
स्थानीय लोग प्रज्ञा की तारीफ करते नहीं थक रहे। एक पड़ोसी राकेश सिंह ने कहा, "हमारे सिंगरौली में कोयले की धूल और धुंआ ज्यादा है, लेकिन प्रज्ञा ने साबित किया कि मेहनत से कोई भी सितारा बन सकता है।" सिंगरौली के बाजारों में प्रज्ञा की चर्चा हर जुबान पर है, और बच्चे उन्हें अपना हीरो मान रहे हैं।
भविष्य के सपने, डॉक्टर बनकर समाज की सेवा
प्रज्ञा का सपना बड़ा है। वह 11वीं और 12वीं में साइंस स्ट्रीम (बायोलॉजी) लेकर नीट (NEET) की तैयारी करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य है कि वे एक डॉक्टर बनें और सिंगरौली जैसे छोटे शहरों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करें। प्रज्ञा ने कहा, "मैं चाहती हूं कि मेरी पढ़ाई से लोगों की जिंदगी बेहतर हो। सिंगरौली में अच्छे अस्पतालों और डॉक्टरों की कमी है। मैं उस कमी को पूरा करना चाहती हूं।"
वह सामाजिक कार्यों में भी रुचि रखती हैं। प्रज्ञा ने बताया, "मैं चाहती हूं कि गरीब बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करूं। मेरी सफलता से अगर एक भी बच्चा मेहनत करने का फैसला ले, तो मैं समझूंगी कि मेरा मकसद पूरा हुआ।"
सरकार और बोर्ड की प्रतिक्रिया, सम्मान और स्कॉलरशिप
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रज्ञा की उपलब्धि को "मध्य प्रदेश का गौरव" करार दिया। उन्होंने ट्वीट किया, "सिंगरौली की बेटी प्रज्ञा जायसवाल ने 10वीं में 100% अंक लाकर इतिहास रच दिया। उनकी मेहनत हर छात्र के लिए प्रेरणा है। सरकार उनकी पढ़ाई के लिए हरसंभव मदद करेगी।"
एमपी बोर्ड ने प्रज्ञा को 1 लाख रुपये नकद, एक लैपटॉप और प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश सरकार की "मेधावी विद्यार्थी योजना" के तहत प्रज्ञा को आगे की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दी जाएगी। सिंगरौली जिला प्रशासन ने भी प्रज्ञा को जिला स्तर पर सम्मानित करने का फैसला किया है।
सिंगरौली में शिक्षा की चुनौतियां: प्रज्ञा की जीत की अहमियत
सिंगरौली एक औद्योगिक जिला है, जहां शिक्षा के संसाधन सीमित हैं। कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बिजली की अनियमित आपूर्ति और इंटरनेट की खराब कनेक्टिविटी जैसी समस्याएं आम हैं। ऐसे में प्रज्ञा की यह उपलब्धि और भी खास हो जाती है। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया।
सिंगरौली के शिक्षाविद् डॉ. अजय शर्मा ने कहा, "प्रज्ञा की सफलता उन बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों और गांवों में पढ़ते हैं। सरकार को अब सिंगरौली में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करना चाहिए, ताकि और प्रज्ञा सामने आएं।"
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