राकेश सिंह बने मध्य प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष, जानिए कौन हैं ये
भोपाल। जबलपुर लोकसभा सीट से सांसद राकेश सिंह मध्य प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष होंगे। नंदकुमार चौहान के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद कई नामों पर चर्चा के बाद भाजपा आलाकमान ने बुधवार को राकेश सिंह के नाम पर मुहर लगा दी है। सांसद सिंह 2004 से लगातार तीसरी दफा सांसद हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नियुक्ति पत्र जारी कर दिया है। राकेश सिंह को अमित शाह के करीबियों में गिना जाता है, साथ ही उन्हें पीएम मोदी का भी भरोसेमंद माना जाता है।

पुराने भाजपाई हैं राकेश सिंह, कई अहम पदों पर रह चुके
राकेश सिंह पुराने भाजपाई हैं। वो करीब ढाई दशक से भाजपा के साथ जुडे है और उन्हें संगठन में काम करने का काफी अनुभव है। सिंह केंद्रीय कार्यकारिणी में रह चुके हैं और महाराष्ट्र में सह प्रभारी भी रहे हैं। राकेश सिंह लोकसभा में बीजेपी के मुख्य सचेतक हैं और केंद्रीय कोयला खनन एवं इस्पात संसदीय समिति के अध्यक्ष भी हैं। संगठन से अच्छे रिश्ते रखने वाले राकेश सिंह 2001 मेंभारतीय जनता पार्टी, जिला जबलपुर (ग्रामीण) के जिलाध्यक्ष और 2010 में प्रदेश महामंत्री, भारतीय जनता पार्टी, मध्यप्रदेश के पद पर रह चुके हैं।

कई नाम थे प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में
नंद कुमार चौहान के मप्र बीजेपी अध्यक्ष के पद से इस्तीफे के बाद भोपाल में भाजपा नेताओं के बीच लंबी बैठकों का दौर चला। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मंगलवार को भोपाल पहुंचे थे। राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मंगलवार को साफ कर दिया था कि नए प्रदेशाध्यक्ष का एलान बुधवार को किया जाएगा। सांसद राकेश सिंह के अलावा जल संसाधन मंत्री नरोत्तम मिश्रा, गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह, सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य के नाम भी प्रदेश अध्यत्र पद की दौड़ में थे लेकिन आलाकमान ने राकेश सिंह के नाम पर मुहर लगाई।

नंद कुमार के हटने की थी चर्चा
मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बताया था कि नंद कुमार ने उनसे प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी वापस लेने को कहा है, ताकि वो अपने संसदीय क्षेत्र में ज्यादा समय बिता सकें, जिसके बाद पद से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। हालांकि सूत्रों की मानें को नंद कुमार पर पद से हटने का दबाव था। कठुआ रेप केस पर नंदकुमार चौहान के विवादास्पद बयान और इसके पहले विधानसभा उपचुनावों में मिली हार के बाद से ही प्रदेश अध्यक्ष बदलने के कयास लगाए जा रहे थे। संघ और भाजपा की समन्वय बैठक में भी इस पर चर्चा होने की बात कही गई थी।












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