OPINION: आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की संवेदनशील पहल
MP News: आवारा पशुओं का प्रबंधन कई राज्यों में एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इससे सिर्फ आम जन-जीवन में ही परेशानी नहीं आती है। बेजुबान जानवरों पर भी संकट बना रहता है। लेकिन, मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने इसके लिए एक बहुत ही संवेदनशील कदम उठाया है।
आवारा पशुओं की समस्या के हल के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 2,000 से ज्यादा स्वयंसेवकों को नियुक्त करने की योजना तैयार की है। ये स्वयंसेवक आवारा पशुओं को सुरक्षित तरीके से आश्रय स्थलों तक पहुंचाएंगे, ताकि न तो ये मवेशी इंसानों की राह में परेशानी पैदा करें और ना ही खुद उनके अपने जीवन पर किसी तरह का संकट आए।

आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए शानदार पहल
राज्य सरकार इन स्वयंसेवकों को 5,000 से 10,000 रुपए तक मानदेय देने का भी इंतजाम कर रही है। आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए प्रदेश में 15 दिनों का एक विशेष अभियान भी चलाने का फैसला लिया गया है।

जिलास्तर पर ही तय होगी व्यवस्था
एमपी सरकार ने जो फैसला लिया है उसके तहत जिला पंचायत और शहरी विकास विभाग अपने क्षेत्रों में आवारा पशुओं की संख्या के आधार पर स्वयंसेवकों का संख्या तय करेंगे। साथ ही साथ स्थानीय जरूरतों के मुताबिक ही मानदेय भी निर्धारित करेंगे। यही नहीं, प्रत्येक जिला स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी व्यवस्था विकसित कर सकेंगे।

पशुओं की सुरक्षा का रखा जाएगा पूरा ख्याल
इनके अलावा आवारा पशुओं को आश्रय स्थलों तक ले जाने के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग ट्रॉलियां खरीदने की भी तैयारी की गई है, जिसकी कीमत 6 लाख रुपए है। इन ट्रॉलियों की मदद से पशुओं को सड़कों से सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करने में सहायता मिलेगी।

स्वयंसेवकों पर रहेगी आवारा पशुओं की हिफाजत की जिम्मेदारी
स्वयंसेवकों की नियुक्ति में ग्राम पंचायतें की अहम भूमिका होगी। स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी आवारा पशुओं को आश्रय स्थलों तक ले जाने की रहेगी और जरूरत पड़ने पर वे अस्थायी आश्रय स्थलों का निर्माण भी करेंगे। अक्सर देखा जाता है कि बरसात के मौसम में आवारा पशु सड़कों पर बैठ जाते हैं, जिससे आवाजाही करने वालों को काफी परेशानी होती है।

सरकार ने स्वयंसेवकों की नियुक्ति से लेकर मानदेय तय करने तक की जिम्मेदारी संबंधित जिलों के ऊपर छोड़ी है। इससे पहले पशुपालन विभाग की ओर से जिला पशु रोगी कल्याण समिति कोष से 5 लाख रुपए आवंटित किए गए थे। इस कोष का उद्देश्य गायों को सड़कों पर घूमने से रोकना था।
इसके लिए जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम से लैस विशेष वाहन से हाइवे पर निगरानी की भी व्यवस्था की गई है। मध्य प्रदेश सरकार के इस व्यापक दृष्टिकोण का उद्देश्य आवारा पशुओं की वजह से उत्पन्न समस्याओं को कम करना और उनकी सुरक्षा और बेहतरी सुनिश्चित करना है।
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