MP News: अब डायल-100 नहीं, सीधे डायल करें 112 - मध्य प्रदेश में एफआरवी सेवा को नया पहचान नंबर
MP news: मध्य प्रदेश में पुलिस की तत्काल सहायता सेवा यानी फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल (FRV) अब नए अवतार में नजर आएगी। दशकों से 'डायल-100' के नाम से जानी जाने वाली यह सेवा अब 'डायल-112' से पहचानी जाएगी।
यह कदम प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। यूरोपीय देशों की तर्ज पर यह बदलाव लागू किया जा रहा है।

डायल-112 से मिलेगी बहुस्तरीय मदद
नया नेशनल इमरजेंसी नंबर 112, पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी सभी आपातकालीन सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर जनता के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। यानी अब दुर्घटना, अपराध या किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डायल-100, 101 और 102 जैसी पारंपरिक सेवाएं भी अब स्वतः डायल-112 पर रूट हो जाएंगी।
रिस्पॉन्स टाइम में भी आएगा सुधार
अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव के बाद एफआरवी का रिस्पॉन्स टाइम भी सुधरेगा। पहले जहां औसतन 20 से 25 मिनट लगते थे, वहीं अब एफआरवी की टीम 15 से 20 मिनट में मौके पर पहुंच सकेगी। नई तकनीक और अधिक एफआरवी वाहनों के जुड़ने से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी मदद तेजी से पहुंचेगी।
1200 नई एफआरवी जल्द होंगी सड़कों पर
मध्य प्रदेश के 55 जिलों में सेवा को और बेहतर बनाने के लिए 1200 नई एफआरवी वाहनों का टेंडर जारी हो चुका है। इन नए वाहनों के आने से न केवल पुराने वाहनों की जगह नई तकनीक से लैस गाड़ियां सड़कों पर दौड़ेंगी, बल्कि एफआरवी की संख्या में भी करीब 200 का इजाफा होगा। यानी पहले से ज्यादा टीमें अलर्ट और तैयार रहेंगी।
कंट्रोल रूम से होगा त्वरित समन्वय
112 पर आई कॉल सीधे आधुनिकीकृत कंट्रोल रूम में लैंड होगी, जहां से संबंधित सेवा - पुलिस, एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड - को तुरंत मौके के लिए रवाना किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अब सभी इमरजेंसी सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और समय की बचत होगी।
जनता को जागरूक करने चलाया जाएगा अभियान
राज्य पुलिस विभाग के मुताबिक, प्रदेश में व्यापक स्तर पर 'डायल-112' के प्रचार और जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे ताकि लोग नई व्यवस्था से भलीभांति अवगत हो सकें। विभाग का लक्ष्य है कि किसी भी आपात स्थिति में आमजन तुरंत एक ही नंबर - 112 - डायल कर सके और बिना किसी उलझन के मदद प्राप्त कर सके।
क्या बोले अधिकारी?
पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "यह न सिर्फ तकनीकी उन्नयन है बल्कि आम जनता की सुविधा का भी मामला है। अब अलग-अलग आपात सेवाओं के लिए अलग नंबरों की जरूरत नहीं रहेगी। नई एफआरवी और बेहतर रिस्पॉन्स टाइम से अपराधों की रोकथाम और आपातकालीन स्थितियों में जीवन बचाने में मदद मिलेगी।"
यूरोप और अमेरिका में भी यही मॉडल
यूरोपीय देशों और अमेरिका में पहले से ही '112' और '911' जैसे एकीकृत इमरजेंसी नंबरों का चलन है। मध्यप्रदेश सरकार भी अब उसी दिशा में कदम बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य में आपातकालीन सेवा प्रबंधन को वैश्विक मानकों के करीब ले जाएगा।












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