Chhindwara lok sabha: छिंदवाड़ा सीट से अरबपति नकुलनाथ या करोड़पति बंटी साहू, किसकी होगी जीत, ग्राउंड रिपोर्ट
Lok sabha election 2024: छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस में सीधा मुकाबला है, लेकिन यह सीट देश की हॉट सीटों में शुमार है। इस सीट पर कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ कांग्रेस उम्मीदवार है वहीं भाजपा ने विवेक बंटी साहू को चुनावी मैदान में उतारा है।
यहां पर चुनाव के दौरान कई मामले सामने आए, जिसमें वीडियो क्लिप की भी एंट्री हुई। पुलिस FIR तक हुई। यानी जीत के लिए दोनों ही दलों ने हर दांव पेंच यहां पर लगा दिए हैं। फिलहाल सभी के दिमाग में यही सवाल है कि आखिर छिंदवाड़ा सीट कौन जीतेगा? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए वन इंडिया की टीम छिंदवाड़ा पहुंची, जहां पर हमारी टीम ने हर तबके से लोगों से उनके ओपिनियन जानने की कोशिश की और इस बार किन मुद्दों पर चुनाव होने वाला है यह भी जानने की कोशिश की, जिसमें कई रोचक जानकारियां सामने आई।

छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें से चार विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और तीन में भाजपा को लीड है। हमारी टीम ने यहां पर विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से लोगों से बातचीत की और जानने की कोशिश की की कहां, कौन मजबूत है और क्यों मजबूत है?
छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में किसकी लहर ?
Recommended Video
छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना और महापौर विक्रम आहाके अब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जिसकी वजह से इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति इतनी मजबूत नजर नहीं आ रही है, जितनी पहले दिखाई देती थी। बता दो दीपक सक्सेना छिंदवाड़ा से चार बार विधायक और दिग्विजय सिंह सरकार में दो बार मंत्री भी रहे, इसलिए उनका प्रभाव इस विधानसभा में जरूर दिखाई देता है। लेकिन जनता के रुझान यहां पर मिले-जुले मिले। सब्जी का ठेला लगा रही हर्बो बाई ने बताया कि छिंदवाड़ा में विकास बहुत हुआ है लेकिन रोजगार को लेकर बड़ी समस्याएं है। वही वोट देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनका विश्वास कमलनाथ में है।

चाय नाश्ते की दुकान लगाने वाले रवि वर्मा ने बताया कि इस बार चुनाव में नेता इधर से उधर जा रहे हैं, इसलिए हम कंफ्यूज हैं किधर वोट करें। हालांकि कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव में यहां से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार जनता बंटी साहू को भी मौका दे सकती है। 5 सालों में नकुलनाथ हमारे बीच नजर नहीं आए।
जुन्नर विधानसभा क्षेत्र से नकुलनाथ या विवेक बंटी साहू, किसको पसंद कर रही है जनता?
इस सवाल को जानने के लिए जब वन इंडिया की टीम जो न विधानसभा क्षेत्र पहुंची तो लोगों के रुझान दोनों तरफ थे। एक नौजवान ने बताया कि अभी तो बड़े नेता पार्टी छोड़कर दूसरे दल में जा रहे हैं। इसलिए वह कंफ्यूज है कि वोट किस तरफ करें। वही विधानसभा में मुद्दे की बात पर कहा कि यहां कोई रोजगार नहीं है। कमलनाथ ने 40 सालों में विकास के कार्य तो किया लेकिन पिछले 10 सालों से यहां कोई उद्योग नहीं है जितनी कोयला खदानें थी धीरे-धीरे वह भी बंद हो रही है। वही वोट देने के सवाल पर धीमी आवाज में कहा कि इस बार बंटी साहू को मौका दे सकते हैं।

उद्योग नहीं होने से समोसा भी नहीं बिक रहा
जुन्नर विधानसभा क्षेत्र के ह्मबाड़ा ग्रामीण क्षेत्र में 45 वर्षीय रघुवीर सिंह ने बताया कि यहां उद्योग नहीं होने से हमारी होटल भी नहीं चल पा रही हैं समोसा बना तो लेते हैं लेकिन कोई खाने वाला नहीं है। कांग्रेस के नेता युवाओं के भविष्य की बात करते हैं लेकिन यहां तो हमारे युवाओं के बाल सफेद हो रहे हैं, लेकिन रोजगार नहीं मिल रहा है। लोगों से बातचीत करने के बाद हमारी टीम को यहां पर नकुलनाथ और बंटी साहू के बीच कांटे का मुकाबला नजर आया।
बता दे जुन्नर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस 2030 के विधानसभा चुनाव में कम वोटों से यानी 3210 के अंतर से जीती थी। विधायक सुनील उइके ने बताया कि उन्होंने कमलनाथ के सामने वादा किया है कि वह अपने विधानसभा क्षेत्र से करीब 10,000 वोटो की लीड दिलाएंगे। खास बात यह है कि यहां पर कांग्रेस एकजुट नजर आ रही है। इधर भाजपा की जमीनी तैयारी कांग्रेस जैसी नहीं है। पार्टी ने यहां नत्थन शाह को आगे किया है।

अमरवाड़ा विधानसभा में नकुलनाथ या बंटी साहू, किसकी होगी जीत ?
अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका लगा था। दरअसल, हरई राजघराने से ताल्लुक रखने वाले और कमलनाथ के विश्वास पात्र रहे कमलेश शाह बीजेपी में शामिल हो गए। कांग्रेस के तीसरी बार के विधायक कमलेश शाह के जाने से कांग्रेस यहां पर कमजोर तो हुई लेकिन जनता में भी कमलनाथ को लेकर विश्वास बना हुआ है। स्थानीय व्यापारी चीमन पटेल ने बताया कि अमरवाड़ा में नाथ परिवार में बहुत काम किया है। इसलिए विधायक के भाजपा में जाने से यहां पर चुनाव में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वही युवा वोटर राम मंदिर के मुद्दे पर चर्चा करते हुए नजर आए। उन्होंने बंटी साहू को मौका देने की बात कही। कुल मिलाकर अमरवाड़ा विधानसभा में भी कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दे रहा है।
परासिया विधानसभा में नकुलनाथ या विवेक बंटी साहू कौन है किस पर भारी
परासिया विधानसभा में स्थानीय फल सब्जी विक्रेता राजीव साहू ने बताया कि लोग यदि राम मंदिर के मुद्दे पर या डेवलपमेंट को देखकर वोट देंगे तो यह बीजेपी को मिलेगा, लेकिन कमलनाथ ने भी यहां पर लगातार विकास कार्य किए हैं उसे भी जनता नकार नहीं सकती है। वहीं एक महिला ने बताया कि उन्हें नकुलनाथ और कमलनाथ में पर विश्वास है। यहां पर लोगों से बातचीत करने के बाद हमारी टीम को लगा कि परासिया विधानसभा क्षेत्र में जनता कमलनाथ पर ज्यादा विश्वास दिखा रही है।

वहीं परासिया के विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने बताया कि नाथ परिवार ने परासिया विधानसभा क्षेत्र के लिए काफी काम किया है। 18 सालों से भाजपा की सरकार प्रदेश में होने के कारण हमारे साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। लेकिन यूपीएस सरकार के कार्यकाल के दौरान कमलनाथ ने परासिया विधानसभा क्षेत्र में कोयले की खदाने शुरू करवाई, जिससे यहां के लोगों को रोजगार मिल सका। लेकिन पिछले 10 सालों में मोदी सरकार ने यहां कोई उद्योग स्थापित नहीं किया।
पांढुर्णा में कांग्रेस या भाजपा किसका चलेगा जादू
भाजपा ने पांढुर्णा में काफी पहले से काम शुरू कर दिया है। शिवराज सरकार ने पहले छिंदवाड़ा को तोड़कर नया जिला बना दिया और अब पार्टी ने कांग्रेस को तोड़कर समीकरण ही बदल दिए हैं। कुछ दिनों पहले तक कांग्रेस की नगर पालिका थी, अब भाजपा की है। नगर पालिका अध्यक्ष और छह पार्षदों के साथ भाजपा में शामिल हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव अज्जू ठाकुर भी भाजपा के हो गए हैं। उनका अपना प्रभाव है। पांडुर्णा में महाराष्ट्रियन तेली समाज के वोटर काफी हैं और भाजपा प्रत्याशी विवेक भी इसी समाज से आते हैं।

सौंसर में कमल या पंजा
भाजपा नेता और पूर्व मंत्री नानाभाऊ मोहोड़ के प्रभावशाली होने के कारण कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना की वजह से समीकरण बदले हैं। सक्सेना का इस क्षेत्र में होल्ड है। दोनों पहले राजनीतिक रूप से प्रतिद्वंद्वी थे, लेकिन अब रेत के कांट्रेक्ट की वजह से साथ हैं। मोहोड़ अभी राजनीतिक रूप से 'साइलेंट मोड' में हैं। सक्सेना छोटे बेटे अजय के साथ एक्टिव हैं, लेकिन बड़ा बेटा जय अब नकुलनाथ के साथ है। इस क्षेत्र में कांग्रेस-भाजपा की स्थिति 50:50 जैसी है।

चौरई में कमलनाथ या भाजपा
दूसरी बार के कांग्रेस विधायक चौधरी सुजीत सिंह की क्षेत्र में पकड़ मजबूत है। वे शिक्षक की नौकरी छोड़कर 2018 में पहली बार विधायक बने। उनकी तोड़ के लिए भाजपा ने पिछले चुनाव में कांग्रेस से बगावत करने वाले नीरज ठाकुर (बंटी पटेल) को तोड़ लिया। विधानसभा चुनाव में नीरज 19681 वोट ले आए थे। विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं देने का बदला कांग्रेस से लेने के लिए अब बंटी भाजपा के लिए मेहनत कर रहे हैं, हालांकि भाजपा के पुराने लोग जरूर असहज महसूस कर रहे हैं। इस क्षेत्र में भी स्थिति बराबर की दिख रही है।
छिंदवाड़ा सीट के समीकरण
छिंदवाड़ा संसदीय सीट पर आदिवासी मतदाताओं का प्रभाव प्रमुख है। यहाँ लगभग 38 फीसदी से अधिक आबादी आदिवासियों की है। इस क्षेत्र में सात विधानसभा सीटों में से तीन अनुसूचित जनजाति और एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इसलिए, चुनावी सभाओं और रैलियों में कांग्रेस और भाजपा ने आदिवासियों को प्राथमिकता दी। वहीं, जिले के शहरी क्षेत्रों में सामान्य वर्ग की आबादी अधिक है और उनका प्रभाव भी महत्वपूर्ण है।
छिंदवाड़ा में सात विधानसभा सीटें हैं। इसमें 15 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन उनमें से कोई भी महिला उम्मीदवार नहीं है। इस क्षेत्र में कुल 16,32,190 मतदाता हैं, जिनमें 8,24,449 पुरुष, 8,07,726 महिलाएं और 15 थर्ड जेंडर हैं।
2019 के चुनाव में, कांग्रेस के उम्मीदवार नकुलनाथ ने 5.9 लाख मतों के साथ 47 प्रतिशत मत प्राप्त किए, जबकि भाजपा के उम्मीदवार नाथशाह कवर्ती ने 5.5 लाख मत प्राप्त किए, जो कुल मतों का 44 प्रतिशत था।
2014 के चुनाव में, कांग्रेस के उम्मीदवार कमलनाथ ने 5.6 लाख मतों के साथ 50.5 प्रतिशत मत प्राप्त किए, जबकि भाजपा के उम्मीदवार चंद्रभान सिंह ने 4.4 लाख मत प्राप्त किए, जो कुल मतों का 40 प्रतिशत था।












Click it and Unblock the Notifications