MP News: गृह तहसील नहीं, अब पटवारी जाएंगे दूर-दराज, MP की नई तबादला नीति से मचा हड़कंप, जानिए पूरा मामला

MP News: मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग ने पटवारियों के तबादले को लेकर जो नई नीति लागू की है, उसने पूरे प्रदेश में न सिर्फ हलचल मचा दी है, बल्कि पटवारी वर्ग से लेकर उच्च प्रशासन तक नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

"पटवारी संविलियन नीति 2025" का ऐलान होते ही, 'गृह तहसील में नौकरी' अब बीते दिनों की बात हो गई है। अब पटवारी वही काम करेंगे - मगर वहां नहीं जहां वे रहते हैं।

MP News Strictness on Patwaris No job in home tehsil new transfer policy implemented

नीति की मूल बात,घर से दूर ही सही, मगर नीति से ही सही!

अब कोई भी पटवारी अपनी गृह तहसील में पदस्थ नहीं हो सकेगा। राजस्व विभाग ने इसे "स्थानीय दबाव, भ्रष्टाचार और पक्षपात" से मुक्त रखने का प्रयास बताया है। अब पटवारी की नियुक्ति न केवल निष्पक्ष होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया भी ऑनलाइन और पारदर्शी होगी।

"हम जानते हैं कि यह फैसला कुछ लोगों को कठिन लग सकता है, मगर यह ईमानदार और मजबूत प्रशासन की नींव रखने का प्रयास है।" - वरिष्ठ अधिकारी, राजस्व विभाग

पटवारी नीति 2025 की 5 बड़ी बातें

1. गृह तहसील में नियुक्ति पूर्णतः वर्जित: चाहे कोई कितना भी सीनियर हो, अब उसे घर से बाहर ही सेवा देनी होगी।

2. तबादले की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन: न कोई दस्तावेज लाना, न किसी दफ्तर के चक्कर लगाना। पूरा आवेदन, सत्यापन और आदेश एक डिजिटल ट्रैक पर।

3. 16 फरवरी 2024 से पहले नियुक्त पटवारी ही पात्र: इसके बाद के पटवारी केवल विशेष परिस्थितियों में आवेदन कर सकेंगे (जैसे पति-पत्नी दोनों शासकीय सेवा में हों)।

4. 15 दिन में जॉइनिंग का अल्टीमेटम: आदेश मिलते ही, 15 दिन के भीतर कार्यभार ग्रहण अनिवार्य। नहीं तो आदेश स्वतः निरस्त।

5. कोई संशोधन नहीं, कोई अपील नहीं: एक बार आदेश निकल गया, तो फिर उस पर कोई 'प्रशासनिक जुगाड़' नहीं चलेगा। यही होगा, और यही लागू होगा।

क्यों ज़रूरी थी ये सख्ती?

पटवारी पद पर स्थानीय प्रभाव की आशंका सबसे अधिक रही है। भूमि रिकॉर्ड, मुआवजा, नामांतरण, सीमांकन जैसे मामलों में अक्सर यही देखा गया कि गृह तहसील में पदस्थ पटवारी "अपने लोगों" को प्राथमिकता देने लगते हैं। नई नीति "अंदरूनी संबंधों को सिस्टम से बाहर" करने का इरादा दिखा रही है।

MP News: पटवारी बोले - 'नीति ठीक है, मगर थोड़ा लचीलापन चाहिए'

भोपाल के पटवारी रमेश वर्मा ने कहा, "हम नियमों के खिलाफ नहीं हैं, मगर गृह तहसील नहीं तो गृह जिला तो मिले। रोजाना 80-100 किलोमीटर की दूरी तय करना मुश्किल होगा।" इंदौर के पटवारी संघ अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि जॉइनिंग की समयसीमा 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन की जाए।

संविलियन नहीं मिला तो क्या होगा?

  • जिन पटवारियों पर लोकायुक्त/ईओडब्ल्यू/पुलिस में प्रकरण दर्ज हैं, वे पूरी तरह अपात्र माने जाएंगे।
  • संविलियन तभी होगा जब संबंधित वर्ग में रिक्त पद उपलब्ध होंगे।
  • अगर किसी जिले में उस वर्ग (SC/ST/OBC/EWS) का कोटा भर गया, तो भले ही अंक अच्छे हों - तबादला नहीं होगा।

MP News: नीति का मकसद: भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शिता

पटवारियों की गृह तहसील में पदस्थापना पर रोक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय प्रभाव और भ्रष्टाचार को रोकना है। राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "पटवारी भूमि रिकॉर्ड और राजस्व से जुड़े संवेदनशील काम करते हैं। गृह तहसील में पदस्थ होने पर स्थानीय दबाव और पक्षपात की आशंका रहती है। यह नीति निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।"

इसके अलावा, ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया से कागजी कार्रवाई और मैनुअल हस्तक्षेप कम होगा। भोपाल के राजस्व विभाग के प्रवक्ता ने कहा, "यह नीति डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देगी और तबादले में पक्षपात की शिकायतें खत्म होंगी।"

सामान्य प्रशासन विभाग की नीति से अलग क्यों?

सामान्य प्रशासन विभाग ने 29 अप्रैल 2025 को तबादला नीति जारी की थी, जिसमें 1 मई से 30 मई तक तबादले की अनुमति दी गई थी। इस नीति में 10% कर्मचारियों के तबादले की सीमा तय की गई थी, और खराब प्रदर्शन वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता दी गई थी। लेकिन पटवारियों के लिए अलग नीति इसलिए बनाई गई, क्योंकि उनका पद जिला स्तरीय संवर्ग का है, और उनके काम की प्रकृति (भूमि रिकॉर्ड, राजस्व संग्रह) अन्य कर्मचारियों से अलग है।

सामान्य प्रशासन विभाग की नीति में पति-पत्नी की एक ही जिले में पदस्थापना, गंभीर बीमारी, और प्रशासनिक जरूरतों जैसे आधार शामिल थे। लेकिन पटवारी नीति में गृह तहसील पर रोक और ऑनलाइन प्रक्रिया पर जोर देकर इसे और सख्त किया गया है।

डीजीपी का बड़ा फैसला: रीवा आईजी का आदेश रद्द

पटवारी नीति के साथ-साथ, मध्य प्रदेश पुलिस में भी तबादला नियमों को लेकर हलचल मची है। डीजीपी कैलाश मकवाना ने रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत के 1 मई 2025 के आदेश को निरस्त कर दिया। आईजी ने रीवा, सीधी, सतना, मैहर, मऊगंज, और सिंगरौली के एसपी को निर्देश दिया था कि चौकी प्रभारियों, सहायक उपनिरीक्षकों, सब इंस्पेक्टरों, और निरीक्षकों के तबादले उनके अनुमोदन के बिना न किए जाएं।

डीजीपी ने इसे सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति की कंडिका 8 के खिलाफ बताया, जिसमें पुलिस कर्मियों के तबादले पुलिस स्थापना बोर्ड और प्रभारी मंत्री के परामर्श से करने का प्रावधान है। डीजीपी ने कहा, "यह आदेश नीति के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, इसलिए इसे तत्काल रद्द किया जाता है।" इस फैसले ने पुलिस विभाग में भी तबादला प्रक्रिया को पारदर्शी रखने की मंशा जाहिर की है।

जनता और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया

नई पटवारी नीति को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भोपाल के एक पटवारी, रमेश वर्मा ने कहा, "गृह तहसील में पदस्थापना न होने से परिवार के पास रहना मुश्किल होगा, लेकिन भ्रष्टाचार रोकने के लिए यह जरूरी है। ऑनलाइन प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी।" वहीं, इंदौर के पटवारी संघ के अध्यक्ष ने कहा, "15 दिन में जॉइनिंग का नियम सख्त है। कई बार पारिवारिक या अन्य कारणों से देरी हो सकती है। सरकार को इसे लचीला करना चाहिए।"

स्थानीय लोग नीति का स्वागत कर रहे हैं। ग्वालियर के किसान रामसिंह कुशवाह ने कहा, "पटवारी अपने गांव में होते हैं, तो स्थानीय दबदबा बनाते हैं। यह नीति निष्पक्षता लाएगी।" X पर कई यूजर्स ने नीति की तारीफ की, लेकिन कुछ ने इसकी सख्त शर्तों पर सवाल भी उठाए। @MPPatwariUnion ने पोस्ट किया, "नई नीति में पारदर्शिता तो है, लेकिन 15 दिन की जॉइनिंग डेडलाइन अव्यवहारिक है। सरकार को इसे बढ़ाना चाहिए। #PatwariPolicy"

तबादला नीति का असर, क्या बदलेगा?

  • पटवारी संविलियन नीति 2025 का असर न केवल पटवारियों, बल्कि पूरे राजस्व विभाग और ग्रामीण प्रशासन पर पड़ेगा। प्रमुख प्रभाव:
  • भ्रष्टाचार पर लगाम: गृह तहसील में पदस्थापना पर रोक से स्थानीय प्रभाव और पक्षपात कम होगा।
  • डिजिटल गवर्नेंस: ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन से प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।
  • प्रशासनिक अनुशासन: 15 दिन में जॉइनिंग और संशोधन पर रोक से अनुशासन बढ़ेगा।
  • कर्मचारी असंतोष: सख्त नियमों, जैसे गृह तहसील में रोक और जॉइनिंग डेडलाइन, से कुछ पटवारी असंतुष्ट हो सकते हैं।
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