MP News: मध्य प्रदेश में 50,000 ‘भूत कर्मचारियों’ का क्या है रहस्य, 230 करोड़ रुपये का वेतन घोटाला
MP News: मध्य प्रदेश की सरकारी वेतन प्रणाली में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य के करीब 50,000 सरकारी कर्मचारियों की सैलरी पिछले पांच से छह महीनों से सरकारी खजाने से नहीं निकाली गई है।
इन कर्मचारियों के पास सक्रिय एम्प्लॉयी कोड हैं, लेकिन उनकी जमीनी उपस्थिति, पहचान, या पदस्थापन का कोई रिकॉर्ड नहीं है। विपक्ष ने इसे 230 करोड़ रुपये का संभावित वेतन घोटाला करार दिया है, जबकि सरकार इसे डेटा विश्लेषण की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।

IFMIS सिस्टम में गड़बड़ी
- 23 मई 2025 को ट्रेजरी और अकाउंट्स विभाग के कमिश्नर भास्कर लक्षकार ने सभी जिला कोषालय अधिकारियों (DTO) और आहरण संवितरण अधिकारियों (DDO) को पत्र जारी किया। पत्र में कहा गया:
- "IFMIS सिस्टम में ऐसे रेगुलर और नॉन-रेगुलर कर्मचारियों का डेटा संलग्न है, जिनकी सैलरी दिसंबर 2024 से नहीं निकली। इनके कोड सक्रिय हैं, लेकिन मृत्यु या सेवानिवृत्ति की तिथि IFMIS में दर्ज नहीं की गई है, और न ही IFMIS पोर्टल पर Exit प्रक्रिया पूरी हुई है।"
- पत्र में 15 दिनों के भीतर डेटा सत्यापन और वेतन आहरण न होने के कारणों की जानकारी मांगी गई।
कर्मचारी असली या 'भूत'?
जांच में सामने आया कि इन 50,000 कर्मचारियों में 40,000 नियमित और 10,000 अस्थायी कर्मचारी शामिल हैं। इनका रुका हुआ वेतन लगभग 230 करोड़ रुपये है। इनके एम्प्लॉयी कोड सक्रिय होने के कारण वेतन निकाला जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कमिश्नर भास्कर लक्षकार ने कहा, "यह जांच संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए है।"
salary scam: विपक्ष का हमला
कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने इसे 12,000 करोड़ रुपये का घोटाला बताया और सीबीआई जांच की मांग की। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी ईडी, आईटी, और सीबीआई की चुप्पी पर सवाल उठाए।
सरकार का जवाब
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा, "सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार हैं।" विभाग का दावा है कि यह IFMIS सिस्टम की नियमित जांच है।
IFMIS सिस्टम की खामियां
IFMIS सिस्टम में कर्मचारियों के डेटा अपडेट न होने की समस्या पहले भी सामने आई है। 2024 में 162 करोड़ रुपये के गलत भुगतानों का मामला सामने आया था।












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