MP News: अस्पताल खुद बीमार, सिंघार का चौंकाने वाला खुलासा! 5 साल में 1.70 लाख मरीज भेजे गए अन्य राज्यों में
MP News: मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में है। कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में करीब 1.70 लाख मरीजों को इलाज के लिए अन्य राज्यों में रेफर किया गया, जो इस बात का संकेत है कि प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचा गहरी सांसों पर है।
सिंघार ने सरकार की नीतियों को विफल करार देते हुए कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम जनता को बुनियादी चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिल रही। इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।

"स्वास्थ्य व्यवस्था ICU में है" - उमंग सिंघार का तीखा हमला
"MP में इलाज नहीं, अब बचा है तो सिर्फ रेफर सिस्टम! डबल इंजन की सरकार में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की बात करने वाली भाजपा सरकार में 5 साल के भीतर मप्र के 1.70 लाख मरीजों को दूसरे राज्यों में इलाज के लिए मजबूरीवश जाना पड़ा। यहां करोड़ों खर्च करने के बावजूद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।"
उन्होंने आगे लिखा: "शिवपुरी से श्योपुर और बालाघाट से मंदसौर तक, MP के अस्पताल खुद बीमार हैं। जनता इलाज ढूंढ रही है, सरकार सिर्फ प्रचार में लगी है। भाजपा ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को ICU में पहुंचा दिया है।"
क्या कहते हैं आंकड़े?
कांग्रेस के मुताबिक, जिन 1.70 लाख मरीजों को रेफर किया गया, उनमें से अधिकांश कैंसर, हृदय रोग, किडनी फेलियर, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर, और अन्य जटिल बीमारियों से पीड़ित थे। मरीजों को मुख्यतः दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के अस्पतालों में रेफर किया गया।
कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों की भारी कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव, और उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को मजबूरी में बाहर भेजा गया।
वायरल तस्वीर और जमीनी हकीकत
हाल ही में टीकमगढ़ जिला अस्पताल की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें एक बच्चा अपने बीमार पिता के लिए ग्लूकोज की बोतल थामे खड़ा था। कांग्रेस ने इसे "वास्तविक भारत की तस्वीर" बताते हुए भाजपा के विकास दावों को झूठा करार दिया।
इतना ही नहीं, सिधी की बीजेपी सांसद ऋति पाठक ने भी हाल में विधानसभा में स्वीकार किया कि उनके क्षेत्र के जिला अस्पताल में 37 विशेषज्ञ डॉक्टरों की ज़रूरत है, लेकिन केवल 12 कार्यरत हैं।
स्वास्थ्य तंत्र की बड़ी समस्याएं
1. विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी
- CAG की रिपोर्ट 2024 के अनुसार, प्रदेश में 75,000 स्वीकृत पदों में से केवल 3,500 डॉक्टर कार्यरत हैं।
- ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है, जहां PHC और CHC में MBBS डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं हैं।
2. उपकरण और संसाधनों की भारी किल्लत
- CT स्कैन, MRI, डायलिसिस यूनिट और ICU बेड जैसी सुविधाएं ज्यादातर जिलों में या तो नदारद हैं या खराब पड़ी हैं।
- कई अस्पतालों में दवाइयों की आपूर्ति तक नियमित नहीं है।
3. अक्षम रेफरल प्रणाली
जननी एक्सप्रेस जैसे कुछ प्रयासों को सराहा गया है, लेकिन गंभीर बीमारियों के मामले में रेफरल नेटवर्क अनियंत्रित और असंगठित है।
4. स्वास्थ्य पर भारी निजी खर्च
नेशनल हेल्थ अकाउंट्स 2019-20 के अनुसार, भारत में औसतन 47.1% स्वास्थ्य खर्च मरीज की जेब से जाता है। MP में यह प्रतिशत और अधिक है।
5. निजीकरण के प्रयासों पर सवाल
जिला अस्पतालों के 25% बेड निजी मेडिकल कॉलेजों को आरक्षित करने के फैसले का जन स्वास्थ्य अभियान जैसे संगठनों ने विरोध किया है, जिससे गरीबों के लिए मुफ्त इलाज मुश्किल हो सकता है।
क्यों भेजे जाते हैं मरीज अन्य राज्यों में?
- बीमारी रेफर स्थान वजह
- कैंसर टाटा मेमोरियल, मुंबई कैंसर के लिए उच्चतम उपचार
- हृदय रोग नारायणा हृदयालय, बेंगलुरु बेहतर कार्डियक सर्जरी
- न्यूरो समस्याएं AIIMS, दिल्ली न्यूरोलॉजिकल स्पेशलिस्ट्स
- किडनी फेलियर PGI चंडीगढ़ डायलिसिस/ट्रांसप्लांट सुविधा
- सिकल सेल नागपुर / दिल्ली विशेषज्ञता की कमी
AIIMS भोपाल और आयुष्मान भारत पर सरकार का बचाव
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक स्टंट बताते हुए दावा किया कि उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के कई कदम उठाए हैं:
- AIIMS भोपाल को और बेहतर किया गया है।
- आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक 55 करोड़ लोगों को लाभ मिला है।
- वन स्टेट, वन हेल्थ नीति से ग्रामीण क्षेत्रों को AIIMS जैसी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
- स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि अक्टूबर 2025 तक डॉक्टरों की भर्ती पूरी कर ली जाएगी और सभी अस्पतालों में जरूरी उपकरण सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
आरोप-प्रत्यारोप और जनता की चिंता
कांग्रेस के नेता चरण सिंह सापरा ने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना में फर्जी मरीजों के नाम पर भुगतान, नकली मोबाइल नंबर, और डुप्लिकेट क्लेम जैसी गड़बड़ियां हुई हैं। वहीं बीजेपी का कहना है कि विपक्ष सिर्फ चुनावी लाभ के लिए भ्रम फैला रहा है। जनता, खासकर ग्रामीण और गरीब तबका, इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच इलाज के लिए दर-दर भटक रही है।












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