'गोलघर स्मारक' का CM मोहन यादव ने किया लोकार्पण, कहा- हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान

MP News: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार 15 मार्च को 'गोलघर स्मारक' का लोकार्पण किया। सीएम यादन ने इस दौरान गोलघर का अवलोकन करते हुए कलाकारों की मनमोहक कला को देखा। इस दौरान सीएम ने कलाकारों से बातचीत करते हुए उनका हौसला भी बढ़ाया।

सीएम यादव ने कहा कि गोलघर के माध्यम से हस्तशिल्प एवं चारबैत कलाकारों को नई पहचान मिलेगी। हस्तशिल्प वस्तुओं को प्रोत्साहन मिलेगा और पर्यटकों को भोपाल की मूल परंपराओं, शिल्प, कला-संगीत एवं व्यंजनों का आनंद मिल सकेगा। इतना ही नहीं,इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

Mohan Yadav

सीएम यादव ने कहा कि गोलघर को देखने और इसके निर्माण की तकनीक को समझने की जरूरत है। नवसज्जा के पश्चात् निश्चित ही यह केन्द्र जनाकर्षण का केन्द्र बनेगा। सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक गोलघर जिसे पर्यटन विभाग ने बहुउद्देशीय कला केन्द्र के रूप में विकसित किया है, उसे आज आमजन को समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के केन्द्र आज भी उपयोगी हो सकते हैं। अतीत की धरोहर गोलघर को वर्तमान से जोड़ने की पहल सराहनीय है। भोपाल में गोलघर का मूल नाम गुलशन-ए-आलम था, जिसे 19वीं सदी में नवाब शाहजहां बेगम ने बनवाया था। गोलाकार स्वरूप के कारण इसे गोलघर के नाम से जाना जाता है।

सीएम ने कहा कि गोलघर जैसी इमारतों के निर्माण के लिए अनूठी कल्पना की गई। अनेक प्राचीन निर्माण जिनमें बांध, स्मारक और‍किले शामिल हैं, उत्कृष्ट अभियांत्रिकी का नमूना होते हैं। जब भोजताल (भोपाल की बड़ी झील) का निर्माण किया गया तो, पानी के सुविधाजनक निकास की व्यवस्था भी की गई थी। कितनी ही ज्यादा बारिश हो जाए, भोपाल की बड़ी झील सीमा नहीं तोड़ती।

कहा कि प्राकृतिक चट्टानों के उपयोग के साथ जल संपदा को सुरक्षित रखने पर ध्यान दिया गया। भोपाल की बड़ी झील का सदियों से अस्तित्व है और आगे भी रहेगा। कहा कि गोलघर में विभिन्न निर्माण श्रेष्ठ इंजीनियरिंग के उदाहरण हैं। इस पुरानी धरोहर को जीर्णोद्धार के माध्यम से नया रूप दिया गया है। यह आनंदित करने वाला विषय है।

यहां विभिन्न वस्तुओं की बिक्री की व्यवस्था इस केन्द्र को बहुउद्देशीय बनाती है। सीएम ने कार्यक्रम में प्राचीन गायन कला चार बैत की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि कलाओं के संरक्षण के लिए कला केन्द्रों का पूरा उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकल फॉर वोकल पर जोर देते हुए शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया गया है।

नवसज्जित गोलघर की विशेषताएं
- गोलघर स्मारक की वीथिकाओं में आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर विकसित किया गया।
- भोपाल की पुरानी शिल्प कला के संरक्षण के लिए कलाकारों को मंच उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है।
- स्थानीय कलाकारों और दस्तकारों की बनाई वस्तुएं यहाँ बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगी। महिला समूहों द्वारा उत्पादित हस्तशिल्प को प्राथमिकता दी गई है।
- ऐतिहासिक धरोहर की मूल कल्पना के अनुसार फिर से गोलघर को सज्जित और विकसित कर भोपाल शहर को एक सौगात दी गई है। पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र बनेगा।
- भोपाल की परम्पराओं, शिल्प, कला, संगीत और व्यंजनों का आनंद इस परिसर में प्राप्त किया जा सकता है।
- पर्यटन विभाग ने गोलघर की क्षतिग्रस्त वीथिकाओं को मूल स्वरूप में विकसित करने के लिए अनुरक्षण कार्य किए हैं।
- गोलघर परिसर में टिकट घर, प्रसाधन व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, पाथ-वे, लैंड स्केपिंग वर्क, आंतरिक एवं बाह्य विद्युतिकरण, बाउण्ड्रीवाल, आवश्यक लाइटिंग और संग्रहालय में दर्शकों के लिए सुविधाजनक प्रदर्शन व्यवस्था पर लगभग चार करोड़ की राशि व्यय की गई है।

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