MP में चीतों की और बिखरेगी चांदनी, सवाना भी प्रेग्नेंट, कुनबा बढ़ते ही शिफ्ट हो सकता है एक दल
कूनो में साशा चीता की मौत के बाद जंगल के अन्य चीतों के स्वास्थ्य को लेकर विशेषज्ञ चिंतिंत हैं। खबर है कि यहां के चीतों का एक दल अन्य जगह शिफ्ट किया जा सकता है।

MP cheetahs: आजादी के 75 साल बाद हिन्दुस्तान में फिर से चीते की चांदनी बिखर रही हैं । मध्य प्रदेश के कूनो में चीते न सिर्फ आबाद हैं बल्कि कुनबा भी बढ़ रहा हैं। इस बीच खबर है कि 23 चीतों वाले कूनो के पार्क से चीतों का एक दल बाहर शिफ्ट किया जाएगा।

मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क चीतों से आबाद हैं। 'साशा' चीता की मौत के बाद चार शावकों के जन्म की आई अच्छी खबर ने कई उम्मीदों को भी जन्म दे दिया हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर यदि यकीन करें तो कूनो के जंगल में 23 चीतों में सवाना नाम की एक और मादा चीता गर्भवती है। दावा किया जा रहा है कि सवाना भी साशा और सियाया की तरह कैप्टिव ब्रीड हैं। कूनो के डीएफओ प्रकाश शर्मा के मुताबिक शावकों को जन्म देने के बाद मादा चीता को उनकी फीडिंग की चिंता होती हैं। इस दौरान उसे ज्यादा खुराक चाहिए और वह अपना शिकार भी तेज कर देती हैं। तीन महीने तक सियाया अपने चार शावकों को फीडिंग कराएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अफ्रीका से आए चीतों के बाद उनकी आबादी में इजाफा बना रहेगा। लेकिन हाल ही में साशा चीता की मौत चिंता का विषय भी हैं। टास्क फ़ोर्स इसके लिए नई प्लानिंग भी कर रहा हैं। कहा जा रहा है कि कूनो से चीतों का एक दल बाहर शिफ्ट किया जाएगा। साउथ अफीका से लाए गए चीतों का क्वारंटीन पीरियड भी पूरा हो चुका हैं। इन्हें खुले जंगल में अब छोड़ा जा सकता हैं। लेकिन इसके फैसला विशेषज्ञ हर पहलु पर विचार करने के बाद फैसला लेंगे। पहले जबलपुर से लगे नौरादेही के जंगल में शिफ्ट करने पर भी विचार बना था। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में यदि कोई फैसला हुआ तो चयनित जगहों में मंदसौर की गांधी सागर सेंचुरी शामिल हैं। यहां फेंसिंग का काम भी चल रहा हैं।
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