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चमत्कारः नर्मदा में डूबीं बुजुर्ग, दिन-रात लहरों से किया संघर्ष, 18 घंटे बाद जीवित लौट आईं

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सागर, 5 अक्टूबर। कहते हैं जाको राखे साईंया, मार सके न कोए, बाल न बाको कर सके, जो जग बैरी होये... कुछ ऐसा ही चमत्कार नवरात्र के दौरान मां नर्मदा ने दिखाया है। दरसअल सागर नर्मदा नदी के बरमान घाट पर दो दिन पहले एक बुजुर्ग महिला पैर फिसलने के बाद नर्मदा नदी कि तेज धारा में समा गई, उसे बचाने का प्रयास मौके पर मौजूद लोगों ने किया, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। इधर पूरे 18 घंटे बाद उसी महिला को बरमान से 58 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में उदयपुरा के धरमपुरा घाट पर युवकों ने जिंदा बचा लिया। महिला उस वक्त भी नदी के पानी में जिंदगी के लिए हाथ पैर चला रही थी। लोग से नर्मदा मां की कृपा और चमत्कार मान रहे हैं।

सुहागरानी का पैर फिसलने से वे नर्मदा में समा गईं थीं

सुहागरानी का पैर फिसलने से वे नर्मदा में समा गईं थीं

मप्र के सागर जिले में सुरखी के हनौता गांव की रहने वाली एक बुजुर्ग महिला बरमान घाट नर्मदा स्नान के लिए गईं थीं। वे यहां स्नान के बाद पानी भर रहीं थी, तभी उनका पैर फिसल गया और नदी के तेज बहाव में बह गईं। इसे मां नर्मदा का चमत्कार कहें या महिला की किस्मत, वे 18 घंटे तक नर्मदा के पानी में बहती रहीं, धपेड़े खाए और करीब 58 किलोमीटर दूर रायसेन जिले के उदयपुरा में धरमपुरा घाट पर बचा ली गईं।

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    नर्मदा में बह गई थी बुजुर्ग, 18 घंटे बाद जिंदा लौटी!
    नर्मदा में अटूट आस्था, जान बचने को उन्हीं की कृपा बता रहीं

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    सागर जिले के सुरखी ब्लॉक के हनौता गांव की रहने वाली सुहागरानी मां नर्मदा में अटूट आस्था रखती हैं। जब-तब त्योहारों के मौके पर वे अकेले ही नर्मदा स्नान के लिए बरमान चली जाती थीं। दो दिन पहले भी सुहागरानी अकेले ही बरमान चली गईं। उन्होंने नर्मदा नदी में सतधारा घाट पर स्नान किया था। बाद में वे पानी बोतल में पानी भरने के लिए दोबारा नदी किनारे गईं थी, इसी दौरान चट्टान से उनका पैर फिसला और वे पानी की तेजधारा में बह गईं। आसपास मौजूद लोगों ने प्रयास किया, लेकिन वे सुहागरानी को बचा नहीं सके। लोगों ने समझा कि वे चट्टानों के बीच तेज धारा में समा गई हैं और आगे बह गईं।

    उदयपुरा के धरमपुरा घाट पर युवाओं ने बीच नदी में बहते देखा तो बचाया

    उदयपुरा के धरमपुरा घाट पर युवाओं ने बीच नदी में बहते देखा तो बचाया

    इधर रायसेन जिले में उदयपुरा तहसील का धरमपुरा नर्मदा घाट बरमान घाट से करीब 58 किलोमीटर दूर है। वहां दोपहर में नदी में स्नान कर रहे कुछ स्थानीय युवाओं ने देखा कि पानी में बीच धार में कोई बुजुर्ग महिला डूब रही है, बचाने के लिए इशारा भी कर रही है, तो वे आनन-फानन में नदी की तेजधार में कूंदे और बुजुर्ग महिला को किनारे लेकर आए। जब डूबने से बची महिला से पूछा कि कौन हैं और कहां से बह गई तों महिला के जवाब से सभी स्तब्ध रह गए। बुजुर्ग महिला बरमान से नर्मदा में बह गई सुहागरानी ही थीं। करीब 18 घंटे और 58 किलोमीटर तक नर्मदा जैसी खतरनाक नदी में रहने के बावजूद उन्हें जीवित देखकर लोग हैरत में थे।

    पूरी रात नर्मदा की उफनती लहरों पर जीवन के लिए संघर्ष किया

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    सुहागरानी ने धरमपुरा में उन्हें बचाने वाले युवाओं और अस्पताल में पुलिस को अपना जीवन बचाने के लिए किए गए संघर्ष की कहानी सुनाई तो सभी हैरान रह गए। सुगरानी ने बताया कि वे शाम करीब छह बजे पानी में बह गई थीं। उसके बाद वे तेज धारा में बहने लगीं थी। उन्होंने बचपन तैरना सीखा था। इसलिए वे पानी में डूबने से बचने के लिए कभी एक पैर तो कभी दूसरा पैर, कभी एक हाथ तो कभी दूसरा हाथ चलाकर बची रहीं। पानी का बहाव तेज था, इसलिए वे किनारे नहीं लग सकीं और बहती रहीं। पूरी रात उन्होंने नर्मदा की लहरों के साथ संघर्ष किया था। रात में एक घाट के पास उन्हें एक नाव वाला भी दिखा था, उन्होंने उसे बचाने के लिए आवाज दी थी, लेकिन वह डर के कारण भाग गया। वे जीने की उम्मीद में सिर को पानी के ऊपर किए संघर्ष करती रहीं और आखिरकर धरमपुरा घाट पर उन्हें बचा लिया गया। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने उनके परिजन को सूचना देकर बुलाया है। सुहागरानी के अनुसार मां नर्मदा की कृपा और चमत्कार ही रहा जो वे बच गईं।

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    English summary
    An elderly woman resident of Hanauta village of Surkhi in Sagar district of MP had gone to Barman Ghat for a Narmada bath. She was filling water here after a bath, when her foot slipped and got washed away in the strong current of the river. Call it the miracle of Maa Narmada or the fate of the woman, she swam in the Narmada waters for 18 hours and was rescued at Dharampura Ghat in Udaipur, Raisen district, about 58 km away.
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