Malegaon Blast Case: बरी होने के बाद भोपाल पहुंची प्रज्ञा ठाकुर का भव्य स्वागत, PM मोदी को लेकर कही ये बात
Malegaon Blast Case Sadhvi Pragya Singh Thakur: 2008 मालेगांव विस्फोट मामले में एनआईए कोर्ट से बरी होने के बाद भोपाल लौटते ही बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का भव्य स्वागत हुआ। एयरपोर्ट से लेकर उनके निवास तक समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिन्होंने ढोल-नगाड़ों के साथ फूल बरसाए और "साध्वी प्रज्ञा जिंदाबाद" के नारे लगाए। पूरे रास्ते उनका अभिनंदन किया गया और माहौल एक जश्न जैसा दिखाई दिया।
मीडिया से बात करते हुए साध्वी प्रज्ञा भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि सालों की प्रताड़ना और अन्याय के बाद अंततः सत्य की जीत हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष धन्यवाद दिया और कहा कि उनके नेतृत्व में न्याय का मार्ग प्रशस्त हुआ, जो आज इस फैसले के रूप में सामने आया है। साध्वी प्रज्ञा ने इस निर्णय को न सिर्फ अपनी, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जीत बताया।

'मोहन भागवत और PM मोदी का नाम जबरन लेने का दबाव'
साध्वी प्रज्ञा ने अपने बयान में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि, 'मुझसे बहुत बड़े-बड़े लोगों के नाम जबरदस्ती बोलने के लिए कहा गया, जो मैंने नहीं लिए। उनके अनुसार मैंने काम नहीं किया इसलिए मुझे प्रताड़ित किया गया। उन नामों में विशेष तौर पर मोहन भागवत, राम माधव का नाम, पीएम मोदी, सीएम योगी समेत तमाम बड़े-बड़े नेताओं का नाम लेने के लिए कहा गया... मैंने उनकी बात को नहीं माना इसलिए मुझे प्रताड़ित किया गया।'
'24 दिनों की पुलिस कस्टडी में रही'
उन्होंने आगे कहा, 'मैंने बार-बार यह कहा है कि परमबीर सिंह बहुत निकृष्ट और अदम व्यक्ति है क्योंकि उसने हर सीमा पार की है, हर कानून को तोड़ा है और कानून से बाहर जाकर मुझे प्रताड़नाएं दी हैं। अकेले परमबीर सिंह ने ही नहीं बल्कि मुझे सभी ATS अधिकारियों ने प्रताड़ित किया है... मुझे गैर कानूनी तौर पर 13 दिनों तक रखा और 11 दिनों की पुलिस हिरासत में रखा गया। इस प्रकार से मैं 24 दिनों की पुलिस कस्टडी में रही और ATS की प्रताड़नाएं झेलती रही।'
क्या है मालेगांव ब्लास्ट केस?
मालेगांव ब्लास्ट केस 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव शहर में हुए एक बम धमाके से जुड़ा है। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। बम एक मोटरसाइकिल में लगाया गया था, जो शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में खड़ी थी। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास का इलाका हिल गया और पूरे देश का ध्यान इस पर गया।
शुरुआती जांच महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने की, जिसमें हिंदुत्व विचारधारा से जुड़े कुछ लोगों को आरोपी बनाया गया। प्रमुख आरोपियों में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित और अन्य शामिल थे। 2011 में यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया। केस की सुनवाई के दौरान कई गवाह अपने बयानों से पलट गए, और अदालत ने सबूतों को अविश्वसनीय मानते हुए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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