Mahakal Lok Ujjain:856 करोड़ रुपए की लागत, 20 हजार श्रद्धालुओं की क्षमता, इसके बारे में सबकुछ जानिए

Mahakal Lok Corridor Ujjain के उद्घाटन के लिए भव्य तैयारियां की गईं। इस कार्यक्रम का दुनिया के दर्जनों देशों में लाइव-स्ट्रीमिंग का भी इंतजाम किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार की शाम इसके उद्घाटन के लिए भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचे। उन्होंने विधिवत उद्घाटन से पहले भगवान महाकाल का दर्शन-पूजन भी किया। यह प्रोजेक्ट पीएम मोदी की भावना के उतने ही करीब है, जितना की वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर प्रोजेक्ट। यह प्रोजेक्ट भी बीजेपी की सरकार की बहुत महत्वाकांक्षी योजना है, जो अब साकार हो रही है। उज्जैन और वाराणसी अनंतकाल से हिंदुओं की आस्था का केंद्र रहा है; और यूपी के वाराणसी के बाद मध्य प्रदेश के उज्जैन में तैयार हुआ यह परिसर भी अनेक विशेषताओं से भरा हुआ है।

पौराणिक मान्यताओं पर आधारित थीम पर विकसित कॉरिडोर

पौराणिक मान्यताओं पर आधारित थीम पर विकसित कॉरिडोर

महाकाल लोक कॉरिडोर उज्जैन के तहत पूरे परिसर को पौराणिक मान्यताओं पर आधारित थीम पर विकसित किया गया है। सनातन धर्म की मान्यताओं के मुताबिक उज्जैन के भगवान महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास 25 लाख वर्षों से भी प्राचीन है और स्वयं ब्रह्माजी ने इसकी स्थापना की थी। बीजेपी सरकार के लिए यह प्रोजेक्ट उसी तरह महत्वपूर्ण है, जैसा कि वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर। इस प्रोजेक्ट में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिलचस्पी रही है और इसके जीर्णोद्धार से उनकी विशेष भावनाएं भी जुड़ी रही हैं। इसलिए मध्य प्रदेश सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट को काफी प्राथमिकता दी है।

भगवान शिव से जुड़ी आस्था को जीवंत करने की कोशिश

भगवान शिव से जुड़ी आस्था को जीवंत करने की कोशिश

उज्जैन के महाकाल लोक कॉरिडोर भगवान शिव से जुड़ी आस्था के आधार पर विकसित किया गया है। इसमें भगवान शिव के विवाह से जुड़ी कहानियां, त्रिपुरासुर वध, शिव पुराण और शिव तांडव को सजीव चित्रण करने का प्रयास हुआ है। पूरे कॉरिडोर में श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा को समेटने की कोशिश की गई है, ताकि भगवान महाकाल का दर्शन करने के लिए उज्जैन आने वाले तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाएं पूर्ण हो सके। इस प्रोजेक्ट में सिर्फ धार्मिक आस्था का ख्याल नहीं रखा गया है, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जन-सुविधाएं, शॉपिंग, फूड जोन भी विकसित किए गए हैं।

कुल 856 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट

कुल 856 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर धाम स्थित ज्योतिर्लिंग दुनिया में सनातनियों की श्रद्धा का सर्वोच्च केंद्र रहा है। अभी इस कॉरिडोर के पहले फेज का लोकार्पण किया गया है। पूरी तरह से विकसित होने पर 900 मीटर लंबा कॉरिडोर में परंपरागत चीजें, थीम पार्क,हेरिटेज मॉल, ई-ट्रांस्पोर्ट फैसिलिटी के साथ-साथ पवित्र रुद्रसागर झील का पुनरुद्धार भी शामिल होगा। मध्य प्रदेश सरकार ने श्री महाकाल महाराज मंदिर परिसर विस्तार योजना के लिए कुल 856 करोड़ रुपए का बजट तय कर रखा है।

महाकाल लोक कॉरिडोर के महत्वपूर्ण तथ्य

महाकाल लोक कॉरिडोर के महत्वपूर्ण तथ्य

स्वागत संकुल क्षेत्र में दो विशाल द्वार तैयार किए गए हैं- नंदी द्वार और पिनाकी द्वार। यहीं 54 फीट ऊंचा पंचमुखी शिव स्तंभ भी स्थापित किया गया है और सप्तऋषियों की उपस्थिति यहां की पवित्रता और धार्मिक महत्त्व की विवेचना करते प्रतीत होते हैं। इस प्रोजेक्ट को इस तरह से तैयार किया गया है कि एक साथ 20,000 श्रद्धालुओं के यहां मौजूद होने की क्षमता होगी। मुख्य द्वार पर ही टिकटों और सूचना से संबंधित कियोस्क की व्यवस्था रहेगी। यहां एक अत्याधुनिक कमांड सेंटर के साथ सिक्योरिटी सर्विलांस की व्यवस्था भी की गई है।

श्रद्धालुओं के लिए सभी तरह की सुविधाओं का रखा गया है ख्याल

श्रद्धालुओं के लिए सभी तरह की सुविधाओं का रखा गया है ख्याल

इसके साथ ही परिसर में 128 दुकानों का भी निर्माण किया गया है। जिसमें स्वल्पहार, हैंडीक्राफ्ट, धार्मिक संस्कारों से जुड़े सामानों और फूल वालों के लिए व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा श्री महाकाल लोक परिसर में 400 कारों के लिए सर्फेस पार्किंग के साथ ही 400 किलोवॉट के सोलर रूफ का भी इंतजाम होगा। सबसे बड़ी बात है कि महाकालेश्वर मंदिर के पास में मानसरोवर का भी निर्माण किया गया है, जिससे एक बार में श्रद्धालुओं को जुटाने की क्षमता बढ़कर 6,000 हो गई है।

भगवान शिव की 93 नई प्रतीमाओं का कर सकेंगे दर्शन

भगवान शिव की 93 नई प्रतीमाओं का कर सकेंगे दर्शन

प्रोजेक्ट के तहत प्राचीन महाकाल द्वार और प्राचीन पैदल मार्ग, जो कि श्री महाकालेश्वर मंदिर और रामघाट को जोड़ता है, उसे भी संरक्षित किया गया है। रुद्रसागर झील के पुनरुद्धार के लिए इसे सीवर मुक्त किया गया है, जिसे पवित्र शिप्रा नदी के जल से भरे जाने का प्रावधान किया गया है। उज्जैन भारत के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है। अब यहां श्रद्धालुओं को भगवान शिव से जुड़ी 93 नई प्रतिमाओं के दर्शन करने का मौका मिलेगा, जिससे उनके आंखों के सामने शिव पुराण के अनुसार शिव की महिमा उपस्थित हो सकेगी।

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