'चीते पवन' की जान को खतरा दिखा तो विशेषज्ञों ने कर लिया रेस्क्यू, बेहोश कर Kuno ले गए
कूनो नेशनल पार्क की शान बन चुके चीता पवन रातों-रात माधव नेशनल पार्क पहुंच गया था। चूंकी यहां पहले से तीन टाइगर हैं, चीता जंगल-खेतों में डेरा डाले था, पालतू मवेशियों का शिकार करने लगा, इसलिए खतरा भांपकर उसका रेस्क्यू किया

शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क से सटे आम गांव से रेस्क्यू किया गया है। यह इलाका जंगल से सटा हुआ और बफर जोन में आता है। यह चीता दो दिन से खेतों में घूमता दिख रहा था। चीता जंगली जानवरों के अलावा पालतू गाय-बकरियों को शिकार करने लगा। यदि वह आगे बढ़ता तो उसे टाइगर से भी खतरा हो सकता था, इसलिए रेस्क्यू किया गया है।
Recommended Video
कूनो नेशनल पार्क के विशेषज्ञों की टीम ने शनिवार शाम को शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क इलाके में अमोला थाना इलाके के अंतर्गत आने वाले छान गांव से चीता पवन का रेस्क्यू किया है। उसे विशेषज्ञ ने गन से डाॅट मारकर बेहोशी की दवा दी, उसके बेहोश होने के बाद विशेषज्ञों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया और उसे विशेष रूप से चीतों को रखने के लिए बनाए गए बाॅक्स में रखकर विशेष वाहन से श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क रवाना किया गया।

16 अप्रैल को तीसरी बार जंगल से बाहर निकल गया था
जानकारी अनुसार चीता पवन जिसे पहले ओबान नाम से पुकारा जाता था, वह पहले भी दो दफा जंगल से बाहर निकल चुका था। तीसरी दफा वह 16 अप्रैल की रात में फिर कूनो नेशनल पार्क की सीमा से बाहर निकलकर शिवपुरी जिले के जंगलों में पहुंच गया था। 4 दिन से वह माधव नेशनल पार्क की सीमा में घूम रहा था। शनिवार को वह छान गांव के खेतों में मिला था। उसने बीते दिनों 3 हिरणों का शिकार किया था। इसके बाद वह गांव के पालतू मवेशी जिसमें एक गाय का बछड़ा व बकरियों का शिकार करने लगा था।












Click it and Unblock the Notifications