Women's Day Bhopal: समाज के लिए मिसाल बनीं दीप्ति पटवा: दिव्यांग बच्चों के लिए नई रोशनी
International women's day: महिला दिवस पर आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताते हैं, जो न केवल अपनी मेहनत और समर्पण से समाज में बदलाव लाने का काम कर रही हैं, बल्कि विकलांग और मूकबधिर बच्चों के लिए एक नई दिशा भी दिखा रही हैं। उनकी कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाती है कि अगर किसी के पास समाज में सुधार लाने की मजबूत इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
दीप्ति पटवा: समाज सेवा में समर्पित
इनका नाम है दीप्ति पटवा। दीप्ति एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने सामाजिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है और अब तक ढाई सौ से ज्यादा विकलांग बच्चों को प्रशिक्षित कर चुकी हैं।

दीप्ति पटवा 'उमंग वेलफेयर सोसाइटी' नाम की संस्था चला रही हैं, जो खास तौर पर विकलांग और मूकबधिर बच्चों के लिए काम करती है। यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन दीप्ति के लिए यह काम उनका जुनून बन चुका है।
प्रेरणा की कहानी
दीप्ति बताती हैं, "मेरे घर में एक दिव्यांग भाई था। जब मैं उसे कुछ सिखाती थी, तो मुझे एहसास हुआ कि मुझे इस दिशा में कुछ बड़ा करना चाहिए। इसी प्रेरणा से मुझे यह रास्ता मिला और मैंने ठान लिया कि मैं इस क्षेत्र में काम करूंगी।"
इस तरह, दीप्ति ने 'उमंग गौरव दीप वेलफेयर सोसाइटी' की शुरुआत की, और आज इस संस्था में सैकड़ों दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

बच्चों के लिए नई उम्मीद
इस संस्था के माध्यम से न केवल बच्चों को शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कई दिव्यांग बच्चे अब आत्मनिर्भर बन चुके हैं और समाज में सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं। इस काम ने उन परिवारों की चिंता को भी दूर किया है, जो यह सोचते थे कि उनके दिव्यांग बच्चों का भविष्य क्या होगा।
चुनौतियां और संघर्ष
यह सफर दीप्ति के लिए आसान नहीं था। शुरुआत में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी इच्छाशक्ति ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दिया। फंडिंग की समस्या, समाज की मानसिकता और लोगों की उदासीनता-इन सभी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किए।
सम्मान और उपलब्धियां
दीप्ति पटवा के इस निस्वार्थ सेवा कार्य को समाज में सराहा जा रहा है। उन्हें कई सामाजिक संगठनों और सरकारी संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उनकी संस्था आज एक मिसाल बन चुकी है और कई लोग इससे प्रेरित होकर इसी क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं
दीप्ति का सपना है कि उनकी संस्था देशभर में विस्तार करे और अधिक से अधिक दिव्यांग बच्चों को लाभ मिल सके। वे चाहती हैं कि कोई भी बच्चा अपनी अक्षमताओं के कारण पीछे न रह जाए और समाज में अपने पैरों पर खड़ा हो सके।












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