Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

MP News: इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेट रविवार को खोले जाएंगे, नर्मदा घाटी में बाढ़ का अलर्ट

MP News: मध्य प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और नर्मदा नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि के कारण इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेट रविवार, 27 जुलाई 2025 को खोले जाएंगे।

नर्मदा घाटी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ के कारण बना स्ट्रॉन्ग मॉनसून सिस्टम भारी वर्षा का कारण बन रहा है, जिससे बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बांध प्रबंधन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ का अलर्ट जारी किया है और सावधानी बरतने की अपील की है। इस निर्णय से नर्मदा नदी के किनारे बसे गांवों और शहरों में बाढ़ जैसे हालात बनने की आशंका है।

Gates of Indira Sagar and Omkareshwar dam will be opened on Sunday flood alert in Narmada valley

बांधों का जलस्तर और गेट खोलने का निर्णय

इंदिरा सागर बांध, जो खंडवा जिले के पुनासा गांव के पास नर्मदा नदी पर स्थित है, देश का सबसे बड़ा जलाशय है, जिसकी कुल भंडारण क्षमता 12.22 बिलियन क्यूबिक मीटर है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को खंडवा और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई, जिसके कारण बांध का जलस्तर 258.70 मीटर से अधिक हो गया है, जो इसकी पूर्ण क्षमता (262.13 मीटर) से मात्र 4 मीटर कम है।

इसी तरह, ओंकारेश्वर बांध, जो मंधाता में नर्मदा नदी पर स्थित है, भी भारी जलप्रवाह के कारण पूरी क्षमता के करीब पहुंच गया है। शनिवार को बरगी और तवा डैम से छोड़ा गया पानी इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांधों में पहुंचा, जिससे जलस्तर में और वृद्धि हुई। बांध प्रबंधन ने जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए रविवार को गेट खोलने का निर्णय लिया है। पिछले वर्षों में भी भारी बारिश के दौरान इन बांधों के गेट खोले गए थे, जैसे कि 2024 में इंदिरा सागर के 12 और ओंकारेश्वर के 15 गेट खोले गए थे, जिससे नर्मदा नदी में बाढ़ की स्थिति बन गई थी।

नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी (NCA) के अनुसार, इंदिरा सागर बांध से छोड़ा गया पानी 36 घंटों में ओंकारेश्वर बांध और फिर सरदार सरोवर बांध तक पहुंचता है। रविवार को गेट खोलने से नर्मदा नदी में 2-3 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा सकता है, जिससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ेगा।

निचले इलाकों में बाढ़ का अलर्ट

बांधों के गेट खोलने के निर्णय के बाद नर्मदा नदी के किनारे बसे खंडवा, धार, धामनोद, महेश्वर, मंडलेश्वर, बड़वानी, सनावद, बड़वा, और ओंकारेश्वर जैसे क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने नर्मदा नदी के किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी किया है और लोगों से नदी किनारे न जाने की अपील की है। खेड़ीघाट, मोरटक्का, और अन्य निचले इलाकों में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं।

मंडलेश्वर में जलस्तर के बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने निचली बस्तियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू कर दी है। खंडवा जिला प्रशासन ने नावघाट खेड़ी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है, जहां नर्मदा का जलस्तर पहले ही खतरे के निशान के करीब पहुंच चुका है।

प्रशासन की तैयारियां और सावधानियां

जिला प्रशासन और नर्मदा वैली डेवलपमेंट अथॉरिटी (NVDA) ने बांधों के गेट खोलने से पहले निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

अलर्ट और जागरूकता: नर्मदा नदी के किनारे बसे सभी गांवों और कस्बों में मुनादी कराई गई है, जिसमें लोगों से नदी के पास न जाने और पशुओं को सुरक्षित रखने को कहा गया है।

राहत और बचाव: एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें नर्मदा नदी के निचले इलाकों में तैनात की गई हैं। नावों और राहत सामग्री की व्यवस्था की गई है।

निगरानी: बांधों के जलस्तर और नर्मदा नदी के प्रवाह की निरंतर निगरानी के लिए फ्लड कंट्रोल सेंटर सक्रिय है।

समन्वय: इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, और सरदार सरोवर बांध प्रबंधन के बीच समन्वय के लिए हॉटलाइन स्थापित करने की मांग की गई है, ताकि पानी छोड़ने के निर्णय समय पर लिए जा सकें।

खंडवा कलेक्टर ने कहा, "हम स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं। बांधों से पानी छोड़ने से पहले सभी जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। लोगों से अपील है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित रहें।"

भारी बारिश का प्रभाव

मध्य प्रदेश में शनिवार को 53 जिलों में बारिश दर्ज की गई, जिसमें डिंडौरी (7 इंच), रायसेन (6.5 इंच), और राजगढ़ (6 इंच) में अति भारी बारिश हुई। इंदौर में 54.75 मिमी बारिश ने शहर को जलमग्न कर दिया, और भोपाल में रात से ही मूसलाधार बारिश जारी है। मौसम विभाग ने रविवार को भी इंदौर, खंडवा, नर्मदापुरम, और भोपाल सहित 41 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

नर्मदा नदी के ऊपरी क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण बरगी और तवा डैम के गेट पहले ही खोले जा चुके हैं। तवा डैम से 42,430 क्यूसेक और बरगी डैम से पानी छोड़ा जा रहा है, जिसने इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांधों पर दबाव बढ़ा दिया है। मंडला में नर्मदा नदी का जलस्तर 437.2 मीटर तक पहुंच गया, जिससे माहिष्मती घाट का रपटा पुल डूब गया।

नर्मदा घाटी की चुनौतियां

नर्मदा घाटी में बांधों के गेट खोलने का इतिहास विवादास्पद रहा है। 2023 में, सरदार सरोवर बांध के गेट समय पर न खोलने के कारण गुजरात के नर्मदा और भरूच जिलों में बाढ़ आई थी। नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने तब आरोप लगाया था कि गेट खोलने में देरी के कारण नर्मदा नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया, जिससे निचले इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि नर्मदा घाटी के बांधों के बीच बेहतर समन्वय और समय पर गेट खोलने की नीति से बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सकता है। हिमांशु ठक्कर, साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल के संयोजक, ने कहा, "यदि बारिश के पूर्वानुमान के आधार पर गेट पहले खोले जाएं, तो निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति से बचा जा सकता है।"

जनता से अपील और सुझाव

  • प्रशासन ने नर्मदा नदी के किनारे रहने वाले लोगों से निम्नलिखित सावधानियां बरतने को कहा है:
  • नदी किनारे या निचले इलाकों में न जाएं।
  • पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं।
  • बच्चों को पानी से दूर रखें।
More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+